पटना हाईकोर्ट के वकीलों ने अदालतों में सामान्य कामकाज बहाल करने की मांग की, बताई वजह

पत्र में कहा गया है कि उक्त अवधि में उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के 64 प्रतिशत पद रिक्त पड़े रहे.

उन्होंने कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के कारण अदालतों का कामकाज सीमित किये जाने के कारण वकीलों और वादियों को हो रही परेशानियों का भी जिक्र किया.

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    पटना. पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) के वकीलों ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) को पत्र लिख कर अगले हफ्ते से अदालतों में कामकाज के सामान्य घंटे ‘पूर्वाह्न साढ़े दस बजे से शाम सवा चार बजे तक’ बहाल करने का अनुरोध किया. उन्होंने कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के कारण अदालतों का कामकाज सीमित किये जाने के कारण वकीलों और वादियों को हो रही परेशानियों का भी जिक्र किया. पटना उच्च न्यायालय की एडवोकेट्स एसोसिएशन ने इस सिलसिले में मुख्य न्यायाधीश संजय करोल को पत्र लिखा है.

    पत्र में कहा गया है कि उक्त अवधि में उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के 64 प्रतिशत पद रिक्त पड़े रहे. पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 पाबंदियों के कारण कई वकीलों के पास मामलों की संख्या काफी घट गई और वे वकालत के पेशे को छोड़ रहे हैं तथा अपना परिवार चलाने के लिए अन्य जरिया तलाश रहे हैं. एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों में शारीरिक उपस्थिति के साथ मुकदमों की सुनवाई बहाल करने का भी अनुरोध किया.

    वकीलों की चुनौती बढ़ गई है
    बता दें कि पिछले महीने भी पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा ने वकीलों की समस्‍या से अवगत कराने के लिए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था. पत्र में वकीलों की समस्या का जिक्र करते हुए कहा गया था कि हाईकोर्ट के समक्ष कई मामले सुनवाई हेतु लंबित हैं. हाईकोर्ट में पहली बार ग्रीष्मावकाश होने के कारण ई फाइलिंग रोक दिए जाने से वकीलों और वादियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल ई फायलिंग की सुविधा नहीं दिए जाने से वकीलों की चुनौती बढ़ गई है.

    पिछले 14 महीनों से न्यायालय ठप पड़े हुए हैं
    तब उन्होंने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के जिला व सेशन जजों को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि निचली अदालतों में अति आवश्यक जमानत याचिका व अन्य मामलों पर वर्चुअल माध्यम से सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है. वैसी व्यवस्था पटना हाईकोर्ट द्वारा भी किया जाए. कोरोना के कारण पिछले 14 महीनों से न्यायालय ठप पड़े हुए हैं.

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