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M. Ed. कोर्स की मान्यता रद्द हुई तो NCTE के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा PU प्रशासन
Patna News in Hindi

Rajnish Kumar | News18 Bihar
Updated: February 8, 2020, 12:24 PM IST
M. Ed. कोर्स की मान्यता रद्द हुई तो NCTE के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा PU प्रशासन
एनसीटीई के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा पटना विश्वविद्यालय

एमएड कोर्स की मान्यता रदद् होने से कोर्स में नामांकन कराने का सपना देख रहे छात्र भी मायूस हैं क्योंकि इस साल नामांकन पर रोक लगी हुई है.

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पटना. एक तरफ पटना यूनिवर्सिटी (Patna University) को केंद्रीय विश्वविद्यालय (Central university) का दर्जा दिलाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है तो भारत सरकार भी आश्वासन देने में लगी है. वहीं, पर्याप्त जगह नहीं होने की वजह से एमएड की मान्यता रद्द कर दी गई है. एमएड कोर्स (M.Ed. Course) की मान्यता रद्द होने के बाद पटना विश्वविद्यालय में सत्र 2020 -21 में नामांकन को लेकर ऊहापोह की स्थिति हो गई है और मामला हाईकोर्ट (High Court) तक पहुंच गया है.

NCTE की कार्रवाई गलत- PU
पटना विश्वविद्यालय ने एनसीटीई की कार्रवाई को गलत करार देते हुए कोर्ट से न्याय की मांग करते हुए भरोसा जताया है कि कोर्ट के फैसले पक्ष में आएंगे और नए सत्र में नामांकन भी संभव हो सकेगा.

NCTE ने रद्द कर दी मान्यता

गौरतलब है कि हाल ही में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन  (एनसीटीई ) ने ईस्टर्न रीजनल कमिटी की बैठक में मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया था. एनसीटीई की मानें तो पटना विवि में एमएड विभाग के पास कोर्स संचालन के लिए पर्याप्त जगह नहीं हैं इसीलिए सत्र 20-21 में नामांकन पर रोक लगाते हुए कोर्स की मान्यता रद्द कर दी है.

मान्यता रद्द होने के बाद विवि जहां एनसीटीई से मापदंड के आधार पर मान्यता देने की अपील की है वहीं हाईकोर्ट से भी याचिका दर्ज कराकर गुहार लगाई है.

अब हाईकोर्ट से उम्मीदएमएड विभाग के एचओडी खगेंद्र कुमार ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा है कि पीयू में एमएड कोर्स 1954 से चल रहा है और यहां एमएड के लिए पटना ट्रेनिंग कॉलेज के लिए 4000 स्कावयर मीटर एरिया है. प्रोफेसरों की संख्या भी पर्याप्त है बावजूद कोर्स को वापस ले लिया गया है जो कि गलत है. हालांकि उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि कोर्ट से जल्द ही कोर्स की अनुमति मिलने की उम्मीद है.

उधर एमएड कोर्स की मान्यता रदद् होने से कोर्स में नामांकन कराने का सपना देख रहे छात्र भी मायूस हैं क्योंकि इस साल नामांकन पर रोक लगी हुई है. छात्र आदर्श कुमार और विजय भास्कर ने भी पीयू और एनसीटीई से गुहार लगाते हुए कहा कि जल्द ही कोशिश होनी चाहिए ताकि कोर्स को मान्यता मिल सके.

वहीं, परीक्षा नियंत्रक आरके मंडल ने भी दावे के साथ कहा है विश्वविद्यालय एमएड कोर्स को चलाने के लिए हर मापदंड को पूरा कर रहा है और पूरी उम्मीद है कि अप्रैल तक फैसला आ जाएगा ताकि एमएड में नामांकन लिया जा सकेगा.

'PU को टारगेट किया जा रहा'
बता दें कि विश्वविद्यालय ने एनसीटीई पर यह भी आरोप लगाया है कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी एमएड की पढाई हो रही है, लेकिन वहां न तो सही से भवन है और न ही पर्याप्त संख्या में शिक्षक, बावजूद उसकी मान्यता रद्द नहीं करते हुए पीयू को टारगेट किया गया.

गौरतलब है कि इसी पटना विश्वविद्यालय में पिछले साल उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंच से ये भरोसा दिया था कि इसका न सिर्फ कायाकल्प होगा बल्कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए भारत सरकार से बात भी करूंगा.

उपराष्ट्रपति की पहल के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए पीयू ने भारत सरकार को प्रस्ताव भी भेज दिया है, लेकिन इस बीच एनसीटीई की इस कार्रवाई ने पीयू के सपनों पर ग्रहण सा लगा दिया है.

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First published: February 8, 2020, 11:57 AM IST
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