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जब महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था- 'अभी तक हमरे बोर्ड लागल बा हियां'

News18 Bihar
Updated: November 15, 2019, 8:05 AM IST
जब महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था- 'अभी तक हमरे बोर्ड लागल बा हियां'
गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार.

प्रोफेसर जॉन कैली के बुलावे पर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी जाकर वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashith Narayan Singh) ने पीएचडी किया. उसके बाद वो जब भी वापस अपने पटना यूनिवर्सिटी आते थे तो उन्हें एक झलक देखने के लिए छात्र उत्सुक हो जाते थे. छात्रों की भीड़ लग जाती थी.

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पटना. प्रख्यात गणितज्ञ और बिहार (Bihar) के विभूति वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashith Narayan Singh) का गुरुवार को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया. पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे वशिष्ठ बाबू ने पटना के पीएमसीएच (PMCH) में अंतिम सांस ली. शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार भोजपुर (Bhojpur) जिले के उनके पैतृक गांव बसंतपुर में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं उनसे जुड़ी बहुत सी यादें लोगों के जेहन में उभर रही हैं.

एक झलक देखने के लिए छात्रों की लग जाती थी भीड़
एक समय ईस्ट का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले पटना यूनिवर्सिटी (Patna University) के साइंस कॉलेज (Science College) से अपनी पढ़ाई करने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी भी गए. प्रोफेसर जॉन कैली के बुलावे पर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी जाकर उन्होने पीएचडी किया. उसके बाद वो जब भी वापस अपने पटना यूनिवर्सिटी आते थे तो उन्हें एक झलक देखने के लिए छात्र उत्सुक हो जाते थे. छात्रों की भीड़ लग जाती थी.

छू लेने भर की रहती थी चाहत

पटना यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर यूके सिन्हा ने ऐसे ही एक संस्मरण का जिक्र करते हुए बताया कि 1972-74 के बीच जब वशिष्ठ बाबू पटना यूनिवर्सिटी आए थे उस समय हम और हमारे कुछ साथियों ने उनसे मिलने का प्लान बनाया. तब वशिष्ठ बाबू की एक झलक देखने और उन्हें छू लेने की इच्छा हम सभी में थी.

'जान बूझकर उनसे टकरा जाते थे'
यूके सिन्हा कहते हैं कि हमने तय किया कि जैसे ही वो यूनिवर्सिटी आएंगे हमलोग उन्हें छुएंगे. जब वो यूनिवर्सिटी आए तब हम साथी उनके पीछे-पीछे चलते-चलते जान बूझकर उनसे टकरा गए ताकि उन्हें छू सकें. जब वो यूनिवर्सिटी में भ्रमण कर रहे थे तो उनके आस-पास बहुत भीड़ होती थी. हमलोग उस समय-15-16 साल के होंगे और अपनी पढ़ाई कर रहे थे.
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रूम नंबर 9 में रहते थे वशिष्ठ बाबू
पटना यूनिवर्सिटी के सीनियर प्रोफेसर कृतेश्वर प्रसाद बताते हैं कि वशिष्ठ बाबू पटना यूनिवर्सिटी के फैराडे हॉस्टल के रूम नंबर नौ में रहते थे. सौभाग्य से उनके बैचमेट विभूति नारायण सिंह को पीयू के फैराडे हॉस्टल के उसी कमरे में रहने का अवसर मिला था जिसमे वशिष्ठ बाबू रहते थे.

'अभी तक हमरे बोर्ड लागल बा हियां'
एक बार जब वर्ष 1977 में वशिष्ठ नारायण सिंह पटना यूनिवर्सिटी आए थे तो कैंपस भ्रमण के दौरान वो अपने रूम नंबर 9 के पास भी गए थे. तब विभूति नारायण सिंह (वीएन सिंह) उस कमरे में रहते थे और उनके नाम का ही बोर्ड कमरे के बाहर लगा था. जैसे ही वशिष्ठ बाबू ने बोर्ड पर वीएन सिंह लिखा देखा तो कह पड़े- अभी तक हमरे बोर्ड लागल बा हियां.

(रिपोर्ट- उत्कर्ष कुमार)

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First published: November 15, 2019, 7:18 AM IST
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