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मजार से सटे वक्फ बोर्ड की बिल्डिंग तोड़ने के पटना हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट मजार के पास वक्फ बोर्ड की बिल्डिंग को पटना हाई कोर्ट ने गिराने का आदेश दिया था.

पटना हाई कोर्ट मजार के पास वक्फ बोर्ड की बिल्डिंग को पटना हाई कोर्ट ने गिराने का आदेश दिया था.

Bihar News: पटना हाई कोर्ट की 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की थी. इसमें 4-1 से मजार से सटे बिल्डिंग को तोड़ने का फैसला आया था. अपने अलग फैसले में जस्टिस ए अमानुल्लाह ने कहा था कि जो निर्माण अवैध रूप से दस मीटर से अधिक है, उसे ही तोड़ा जाए न कि पूरे निर्माण को तोड़ा जाए.

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दिल्ली. पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) के नजदीक बन रहे बिहार वक्फ बोर्ड के भवन (Bihar Waqf Board Buildings) को गिराने के आदेश के खिलाफ वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में याचिका दाखिल की है. याचिका में वक्फ बोर्ड ने आरोप लगाया है की हाई कोर्ट ने गलत आधार पर पूरे भावन को गिराने का आदेश दिया है जबकि बोर्ड खुद भवन की ऊंचाई को 10 मीटर कम करने की आग्रह कर रहा था.  बता दें कि पटना हाई कोर्ट ने 3 अगस्त को पूरा भवन गिराने का आदेश दिया था क्योंकि भवन नियम से 10 मीटर ऊंची है.

गौरतलब है कि ये तीन मंजिला इमारत एक एकड़ में वक्फ की जमीन पर है जिसमें एक ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी और वक्फ बोर्ड की आफिस बनाई जा रही है. पटना हाई कोर्ट ने इस भवन के बनने का स्वत संज्ञान लिया था क्योंकि ये भवन पटना हाई कोर्ट के बहुत नजदीक है.

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बता दें कि पटना हाई कोर्ट ने तब बिहार भवन निर्माण निगम को अवैध निर्माण एक माह में तोड़ने का निर्देश दिया था.जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जजों की संवैधानिक पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे 3 अगस्त को सुनाया गया था.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि बिहार भवन निर्माण निगम इस अवैध निर्माण को नहीं तोड़ता है तो पटना नगर निगम इसे तोड़ने की कार्रवाई करेगा. गौरतलब है कि न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह, न्यायमूर्ति विकास जैन, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की थी.

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हालांकि इसमें 4-1 से फैसला आया था क्योंकि अपने अलग फैसले में जस्टिस ए अमानुल्लाह ने कहा कि जो निर्माण अवैध रूप से दस मीटर से अधिक है, उसे ही तोड़ा जाए न कि पूरे निर्माण को तोड़ा जाए. कोर्ट ने इससे पहले इस भवन के निर्माण पर रोक लगा दी थी इसके बावजूद निर्माण कार्य हुआ.

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