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क्या बिहार में भी हैं काली कमाई के धनकुबेर कई पीयूष जैन? 1800 ठेकेदारों पर कसा शिकंजा!

क्या बिहार में भी हैं काली कमाई के धनकुबेर कई पीयूष जैन? 1800 ठेकेदारों पर कसा शिकंजा!

पीषूष जैन की तर्ज पर ही बिहार में 1800 ठेकेदारों ने जीएसटी में  अनियमितता की है.

पीषूष जैन की तर्ज पर ही बिहार में 1800 ठेकेदारों ने जीएसटी में अनियमितता की है.

Irregularities in GST in Rural Works Department Bihar :ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता और प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारियों को पत्र भेजा है. इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि विपत्रों (बिल) के भुगतान से पूर्व संवेदकों (ठेकेदारों) की ओर से जीएसटी जमा किए जाने का प्रावधान है. इंजीनियरों को जीएसटी विवरणी दाखिल की जांच करनी होती है. वाणिज्यकर विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2021-22 के सितंबर से नवंबर का वर्ष 2020-21 के सितंबर-नवंबर अवधि का तुलना करने पर पाया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार ग्रामीण कार्य विभाग में जीएसटी संग्रह काफी कम है.

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    पटना. उत्तर प्रदेश के कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर के घर से 177 करोड़ बरामद किए गए थे. इसके बाद से लगातार उनके ठिकानों को खंगाला जा रहा है. इसी क्रम में उनके कन्नौज स्थित घर से भी सोमावर को छापेमारी के दौरान 194 करोड़ नगद मिले हैं. इस मामले में एक खुलासा यह भी हुई है कि इस कारोबारी द्वारा सरकारी आंकड़ों में टर्न ओवर सालाना सिर्फ 5 करोड़ दिखाया जाता रहा है, लेकिन बरामद हुई रकम सैकड़ों करोड़ में है. अब पीयूष जैन न्यायिक हिरासत में हैं और मामला कोर्ट में है. कई जांच एजेंसियां उनकी इन अवैध कमाई का कच्चा चिट्ठा खोलने की कवायद में लगी हुई हैं. काली कमाई के इस ‘कुबेर की कहानी का एक सिरा जीएसटी जमा नहीं करने से भी जुड़ा है, ऐसे में जीएसटी न देने वालों को लेकर बिहार में भी हलचल देखी जा रही है.

    दरअसल, यहा भी करीब 1800 ऐसे ठेकेदार बताए जा रहे हैं जिन्होंने सरकार से पूरी राशि तो ले ली, लेकिन जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) जमा नहीं किया है. यह भी बताया जा रहा है कि ऐसा इंजीनियरों की लापरवाही के कारण हुआ है और सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला जब सामने आया तो ग्रामीण कार्य विभाग एक्शन में आ गया है और इंजीनियरों को उन ठेकेदारों से जीएसटी वसूलने की कवायद तेज करने को कहा है. मिली जानकारी के अनुसार जीएसटी की यह राशि करोड़ों में है.

    मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता और प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारियों को पत्र भेजा है. इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि विपत्रों (बिल) के भुगतान से पूर्व संवेदकों (ठेकेदारों) की ओर से जीएसटी जमा किए जाने का प्रावधान है. इंजीनियरों को जीएसटी विवरणी दाखिल की जांच करनी होती है. वाणिज्यकर विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2021-22 के सितंबर से नवंबर का वर्ष 2020-21 के सितंबर-नवंबर अवधि का तुलना करने पर पाया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार ग्रामीण कार्य विभाग में जीएसटी संग्रह काफी कम है.

    इस समीक्षा में यह भी पाया गया कि 90 निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों ने 1832 संवेदकों को राशि भुगतान कर दी, लेकिन या तो उनसे जीएसटी नहीं वसूली गई या कम पैसे वसूले गए. पदाधिकारियों ने जीएसटी विवरणी दाखिल करने में भी अनियमितता बरती. नियमानुसार ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत ठेकेदारों का जीएसटी के तहत पंजीकृत होना जरूरी है. रजिस्टर्ड ठेकेदारों को हर तीन महीने पर जीएसटी विवरणी दाखिल कर रिपोर्ट देनी है.

    इस बीच ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी कार्य अनुबंधों में निष्पादित कार्यों के भुगतान से पूर्व हर हाल में यह जांच की जाए कि संवेदकों ने मौजूदा वित्तीय वर्ष का जीएसटी जमा कर दिया है. इसके लिए जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन भी जांच की जा सकती है.

    विभाग ने कार्यपालक अभियंता व प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि संवेदकों द्वारा किए गए जीएसटी रिटर्न का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. जीएसटी भुगतान किए बिना ही संवेदकों (ठेकेदारों) को राशि देने वाले पदाधिकारियों व कर्मियों पर वित्तीय अनुशासनहीनता का दोषी माना जाएगा और उन पर कार्रवाई की जाएगी. बहरहाल,अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या बिहार में भी कोई काली कमाई का धनकुबेर पीयूष जैन निकलता है?

    Tags: Bihar Government, Gst news, Income Tax Raids, IT Raid, IT Raids, Kannauj IT Raid, Piyush jain black money, Piyush Jain income tax raid

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