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2020 के रण में आमने-सामने होंगे दो युवराज, कौन होगा पास-कौन होगा फेल?
Patna News in Hindi

News18 Bihar
Updated: February 12, 2020, 10:41 AM IST
2020 के रण में आमने-सामने होंगे दो युवराज, कौन होगा पास-कौन होगा फेल?
जानकारों की राय में 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान और तेजस्वी यादव का भविष्य तय होगा.

हस्तिनापुर (दिल्ली) में हारमें चुनावी हार के बाद पिछले 15 सालों से बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार के लिए यह चुनाव एक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है तो बिहार के दो युवराजों के लिए 2020 का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. 

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  • Last Updated: February 12, 2020, 10:41 AM IST
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पटना. दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) नतीजे के बाद अब सियासी हवा का रुख बिहार (Bihar) की ओर हो चला है. आने वाले अक्टूबर-नवंबर तक जहां प्रदेश में बीतते समय के साथ राजनीतिक तापमान में लगातार बढ़ोतरी दिखने लगी है, वहीं बिहार के दो युवराजों यानि लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बेटे तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) और रामविलास पासवान (Ramvilas Paswan) के बेटे चिराग पासवान (Chirag paswan) के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव में अभी आठ महीने की भले ही देरी हो, लेकिन इन दोनों युवराजों ने अभी से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है. अपनी-अपनी नई टीम बनाकर ये दोनों चुनावी मैदान में उतरने को बेताब भी हैं.

दरअसल इन दोनों का ताल्लुक बिहार के सबसे शक्तिशाली सियासी घराने से है. इसमें एक लालू का लाल है जिसके साथ मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण चट्टान की तरह खड़ा है तो दूसरा है रामविलास पासवान के कुल का चिराग. जिसके साथ दलितों का मजबूत वोट बैंक है.

माना जा रहा है कि सीएम नीतीश कुमार तो एनडीए का चेहरा जरूर हैं लेकिन बिहार के सियासी भविष्य की लड़ाई तेजस्वी और चिराग के बीच ही मानी जा रही है. जाहिर है दोनों के बीच इस बार सीधी टक्कर है. शायद यही वजह है कि  चुनाव से पहले इन दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

सबके अपने-अपने दावे
आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी का दावा है कि तेजस्वी कप्तान हैं और इसबार 2020 के चुनाव में विरोधियों को क्लीन बोल्ड कर देंगे. वहीं, जेडीयु प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद की मानें तो चिराग न सिर्फ बिहार बल्कि देश के भविष्य हैं. तेजस्वी एक फ्लॉप योद्धा हैं.

जातीय समीकरण में किसका पलड़ा भारी?बिहार के चुनाव में जातीय समीकरण एक हकीकत है और इसके आधार पर ही जीत-हार का गुणा-भाग भी किया जाता है. जाहिर है इस बार भी जिसके साथ मजबूत जातीय समीकरण रहा वो यक़ीनन पास हो जाएगा.

सांगठिनक स्तर पर हो रहे प्रयोग
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय की मानें तो इसमें तेजस्वी, चिराग़ पासवान पर थोड़े भारी पड़ जाएंगे क्योंकि उनके साथ लालू का मजबूत MY समीकरण भी है, जिनका बिहार में अकेले करीब 31 फीसदी वोट है. साथ में इस बार तेजस्वी ने अतिपछड़ों और दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए संगठन के स्तर पर एक बड़ा प्रयोग भी किया है.

तेजस्वी का फॉर्मूला कामयाब हुआ तो...
बकौल रवि उपाध्याय अगर तेजस्वी का यह फार्मूला कामयाब हुआ तो वे चिराग पर बहुत भारी पड़ जाएंगे.  लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि चिराग पासवान कोई कमजोर योद्धा हैं.

चिराग के साथ दलितों का जनाधार और दो बड़े चेहरे
रवि उपाध्याय कहते हैं कि चिराग के साथ रामविलास पासवान का 50 साल का अनुभव है और साथ में दलितों का मजबूत वोट बैंक भी है.  इस बार चिराग ने भी अपनी नई टीम में दलितों-पिछड़ों के साथ अगड़ों पर भी दांव लगाया है. साथ में चिराग के साथ नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी जैसा चेहरा भी है.

साफ है कि बिहार चुनाव में दो युवराजों के बीच इस बार की लड़ाई जोरदार होनेवाली है. पार्टियों ने भी अपने सेनापतियों पर सारा दांव लगा दिया है. ऐसे में बिहार का किंग जो भी बने, लेकिन इन युवराजों के लिए यह चुनाव वाकई उनका राजनीतिक भविष्य तय करेगा.

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First published: February 12, 2020, 10:37 AM IST
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