सीमांचल का चुनावी गणित: एनडीए के हाथ कुछ लगेगा या विपक्षी गठबंधन बनेगा सिकंदर

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 18 अप्रैल को वोटिंग होनी है. इस चरण में बिहार के सीमांचल इलाके की महत्वपूर्ण सीटों पर भी मतदान होगा.

News18 Bihar
Updated: April 16, 2019, 7:20 PM IST
सीमांचल का चुनावी गणित: एनडीए के हाथ कुछ लगेगा या विपक्षी गठबंधन बनेगा सिकंदर
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Updated: April 16, 2019, 7:20 PM IST
लोकसभा चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग 18 अप्रैल को होनी है. इस चरण में बिहार के सीमांचल इलाके की महत्वपूर्ण सीटों पर भी मतदान होगा. किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया की सीटों पर इस दिन वोटिंग होगी. एनडीए और आरजेडी महागठबंधन दोनों के लिए ही यह चरण बेहद महत्वपूर्ण है.

सीमांचल में जातीय गणित का खेल ही विजेता तय करेगा. बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है जनता दल यूनाइटेड ने मुसलमानों वोटों का रुख अपनी तरफ करने में पूरी ताकत झोंक दी है तो कांग्रेस की निगाह सवर्ण वोट बैंक पर है. जेडीयू और कांग्रेस दोनों की ही तरफ से धर्मनिरपेक्ष राजनीति को स्टैंड बनाया गया है. इस इलाके में मुसलमानों की तादाद अच्छी-खासी है. ऐसे में यहां पर बीजेपी के बजाए जेडीयू ही ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है. बीजेपी ने अपने हिंदुत्व के स्टैंड में इस इलाके में ढील दी हुई है.

जेडीयू की ओर से आरसीपी सिंह ने किशनगंज की सियासत में पिछले दिनों काफी माथापच्ची की है. किशनगंज में जेडीयू की कोशिश है कि कांग्रेस का वोटबैंक समेट लिया जाए, जबकि कांग्रेस का प्लान है पूर्णिया और कटिहार में बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक को खिसका दिया जाए.

किशनगंज: मुस्लिम बहुल इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है. जेडीयू से सैयद महमूद अशरफ, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. मो. जावेद व एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान के बीच ही यहां मुख्य मुकाबला होने की उम्मीद है. इस सीट पर पिछले दो बार ( 2009 और 2014 ) कांग्रेस के मौलाना असरारुल हक ने जीत हासिल की है. इस बार कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बदला है. कांग्रेस की तरफ डॉ. मो. जावेद मैदान में हैं. पिछली बार इस सीट पर बीजेपी के विनय कुमार जायसवाल चुनाव लड़े थे. तब बीजेपी-जेडीयू का गठबंधन नहीं था. इस बार गठबंधन के तहत ये सीट जेडीयू के खाते में गई है. जेडीयू कैंडिडेट महमूद अशरफ दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. इससे पहले वो 2009 में भी जेडीयू के टिकट पर भाग्य आजमा चुके हैं. वहीं एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लड़ाई को त्रिकोणीय संघर्ष में बदल दिया जाए.

तारिक अनवर


कटिहार: मुसलमान-यादव बहुल इस सीट पर इस बार सीधा मुकाबना एनडीए उम्मीदवार दुलालचंद्र गोस्वामी और आरजेडी नीत महागठबंधन उम्मीदवार तारिक अनवर के बीच है. सीमांचल की इस सीट के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तेजस्वी यादव ने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत इसी सीट से की थी. सीएम नीतीश कुमार समेत कई बड़े नेता यहां पर चुनावी सभा कर चुके हैं. दोनों ही गठबंधन मानते हैं कि यह चुनाव उनकी ओर झुकेगा. आरजेडी का मानना है कि उसके एमवाई समीकरण की बदौलत विजयश्री मिलेगी तो वहीं नीतीश कुमार को अगड़ी जातियों, अतिपिछड़ा वोट बैंक समेत अपनी योजनाओं पर पूरा भरोसा है. आरजेडी उम्मीदवार के लिए यहां एक चिंता की बात एनसीपी प्रत्याशी मो. शकूर हो सकते हैं जो मुस्लिम वोटों पर अपनी पूरी दखल बनाने की कोशिश करेंगे. शकूर अपनी मौजूदगी से मुकाबले को त्रिकोणीय रुख देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मुस्लिम ( 41 प्रतिशत) मतदाता हैं उसके बाद यादव समुदाय (11 फीसदी) की संख्या है.

पूर्णिया : पूर्णिया सीट पर भी एनडीए और विपक्षी गठबंधन में सीधी लड़ाई है. महागठबंधन की तरफ से उदय सिंह कांग्रेस उम्मीदवार हैं और एनडीए के प्रत्याशी वर्तमान सांसद संतोष कुशवाहा हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में 6 (कस्बा, बनमखनी, रुपौली, धमदाहा, पूर्णिया और कोरहा) विधानसभा सीटें आती हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में दो सीटें बीजेपी, दो सीटें जेडीयू और दो सीटें कांग्रेस की झोली में गई थीं. दिलचस्प ये है कि इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार उदय सिंह यहां से 2004 और 2009 में बीजेपी के टिकट पर सांसद बन चुके हैं. पिछले चुनाव में उन्हें संतोष कुशवाहा ने पटखनी दी थी. अब एक बार फिर दोनों आमने-सामने हैं, देखना होगा किसकी जीत होती है.
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18 अप्रैल को होने वाली वोटिंग में भागलपुर और बांकी सीट पर भी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा. क्या कहता है इन सीटों का गणित:

भागलपुर: भागलपुर सीट पर मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के शैलेश कुमार ऊर्फ बूलो मंडल और जेडीयू जदयू के अजय मंडल के बीच है. भागलपुर की पहचना बिहार की सिल्क सिटी के तौर पर की जाती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी के कद्दावर नेता सैयद शाहनवाज हुसैन करीब नौ हजार वोटों से आरजेडी के बूलो मंडल से मात खा गए थे. इस बार यह सीट एनडीए गठबंधन के तहत जेडीयू के खाते में गई है. इस बात को लेकर काफी राजनीतिक कोहराम भी मच चुका है. जेडीयू ने नाथनगर के विधायक अजय मंडल को टिकट दिया है. वहीं विपक्षी गठंबधन की तरफ से वर्तमान सांसद बूलो मंडल ही प्रत्याशी हैं. इस सीट का एक जमाने में प्रतिनिधित्व कर चुकीं कांग्रेस और बीजेपी इस चुनाव में सहयोगी दल की भूमिका में हैं.

बांका में चुनाव प्रचार करते जय प्रकाश नारायण यादव


बांका: इस सीट पर लोकसभा चुनाव त्रिकोणीय संघर्ष में तब्दील हो गया है. यहा आरजेडी की तरफ से जय प्रकाश नारायण यादव ( मौजूदा सांसद ), जेडीयू के गिरधारी लाल यादव और निर्दलीय पुतुल कुमारी के बीच मुकाबला है. पुतुल कुमार के दिवंगत पति दिग्विजय सिंह राज्य में कद्दावर नेता रह चुके हैं. वर्तमान सांसद के अलावा जेडीयू और निर्दलीय प्रत्याशी भी पहले यहां के सांसद रह चुके हैं.

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