Bihar Politics: चिराग-नीतीश की अदावत के बीच पिस रही भाजपा, हो सकता है बड़ा नुकसान!

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधी दुश्मनी चिराग पासवान को काफी महंगी पड़ी.

LJP's political controversy: पिछले सात सालों में BJP पहलीबार कमजोर दिख रही है. उसके सामने अपने पुराने सहयोगियों को बनाए रखने और नए सहयोगियों को खोजने की बड़ी चुनौती है.

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पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में मचे घमासान के बीच कई सवाल राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन पड़ा है. पहला यह कि अब LJP में आगे और क्या कुछ होगा? बड़ा सवाल यह भी कि LJP में मचे इस घमासान के बाद चिराग पासवान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? BJP चिराग पासवान को कितना अहमियत देगी? एलजेपी के पांच सांसद भले बागी हुए हैं और उन्होंने अपना नेता पशुपति कुमार पारस को मान लिया है, लेकिन आम धारणा अब भी यही है कि LJP के नेता अबतक चिराग पासवान ही हैं. यह भी तय है कि उनके समर्थक उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं.

दरअसल रामविलास पासवान की जगह कार्यकर्ता उनके भाई पशुपति पारस को स्वीकार  नहीं कर पा रहे हैं. गौरतलब है कि  पासवान अपने निधन से पहले चिराग पासवान को राजनीति में स्थापित कर चुके थे. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि चिराग पासवान को यूंही इग्नोर नहीं किया जा सकता है. साथ ही यह भी कि BJP भी चिराग पासवान को छोड़कर नीतीश कुमार को बेलगाम होने और लालू यादव को और मज़बूत होने का मौका नहीं देगी.

इस बात में सक्षम हैं चिराग पासवान
बता दें कि पिछले विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान ने अहम भूमिका निभाई थी और नीतीश कुमार को भारी नुकसान पहुंचाकर बीजेपी को एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में पहुंचा दिया था. लोजपा के अकेले चुनाव मैदान में होने की वजह से नीतीश कुमार को 30 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ था. चिराग पासवान को भले विधान सभा चुनाव में एक ही सीट मिली, लेकिन उन्होंने ये तो साबित कर ही दिया कि वो अकेले जीतने की ताकत भले ना रखते हों लेकिन किसी को हराने में वो सक्षम जरूर हैं.

मुश्किल में पड़ी भाजपा क्या करेगी?
राजनीतिक जानकार यह भी बताते हैं कि अगर भाजपा चिराग पासवान की अनदेखी करती है तो उन्हें अपने साथ लेने में लालू प्रसाद यादव भी एक मिनट की देर नहीं लगायेंगे. ऐसे भी आरजेडी ने चिराग पासवान को खुला ऑफर दे भी दिया है कि वे राजद के साथ हो जाएं और तेजस्वी यादव के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करें. अगर चिराग पासवान RJD के साथ चले जाते हैं तो सत्ता पर काबिज होने की तेजस्वी यादव की राह आसान हो जायेगी और सबसे ज्यादा मुश्किल में बीजेपी होगी.

बीजेपी की मजबूरी भी हैं चिराग
राजनीतिक के जानकारों का यह भी कहना है कि नीतीश कुमार के साथ-साथ चिराग पासवान को भी साथ लेकर चलना बीजेपी की मजबूरी है. मंत्रिमंडल विस्तार में भले JDU के विरोध के कारण चिराग पासवान को जगह न मिल पाए, लेकिन आगामी चुनाव में उन्हें साथ रखने की रणनीति पर अभी से बीजेपी काम करेगी.

भाजपा के सामने यह है बड़ा चैलेंज
दरअसल पिछले सात साल में BJP पहलीबार कमजोर दिख रही है. उसके सामने अपने पुराने सहयोगियों को बनाए रखने और नए सहयोगियों को खोजने की बड़ी चुनौती है. ऐसे भी JDU को भी LJP के सांसदों को साथ लेने का कोई खास फायदा नहीं मिलने जा रहा. जो भी एलजीपी के सांसद जीते हैं बीजेपी एलजेपी गठबंधन की वजह से जीते हैं.

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