बिहार में खेल के साथ खिलवाड़, नेताओं के पास संघों की कमान

बिहार में खेल के साथ लगातार खिलवाड़ होता आ रहा है. बीते 17 वर्षों में राज्य से एक भी खिलाड़ी क्रिकेट में अपनी पहचान नहीं बना सके हैं.

Brijam Pandey | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 14, 2018, 10:38 AM IST
बिहार में खेल के साथ खिलवाड़, नेताओं के पास संघों की कमान
फोटो- News18
Brijam Pandey | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 14, 2018, 10:38 AM IST
बिहार में खेल के साथ लगातार खिलवाड़ होता आ रहा है. बीते 17 वर्षों में राज्य से एक भी खिलाड़ी क्रिकेट में अपनी पहचान नहीं बना सके हैं. यहां अक्सर खेल में राजनीति होती आ रही है. कई ऐसे खेल संगठन हैं, जिनकी नुमाइंदगी खिलाड़ी नहीं बल्कि नेता करते हैं. खिलाड़ी सियासत के चक्कर में अपना भविष्य गंवा रहे हैं.

बिहार में सियासत और खेल साथ-साथ चलता है. 17 वर्षों से लगातार बिहार को क्रिकेट के लिए डिसक्वालिफाइ कर दिया गया गया. यहां चार क्रिकेट एसोसिएशन बन चुके हैं. चारों के अपने-अपने दावे हैं. क्रिकेट के नुमाइंदों की तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी, प्रेम रंजन पटेल, मिथलेश तिवारी, आदित्य वर्मा जैसे लोग हैं, जो कभी क्रिकेट खेले ही नहीं. इन्होंने क्रिकेट को लेकर जमकर राजनीति की और एक-एक एसोसिएशन के साथ दावा भी पेश करते रहे हैं.

इस लडाई मे बीसीसीआई ने बिहार को क्रिकेट की मान्यता दी ही नहीं. 2000 से 2003 तक बिहार से रणजी खेल चुके प्रमोद कुमार को इसका मलाल आज भी है कि बिहार का क्रिकेट 25 साल पीछे चल रहा है. प्रमोद कहते हैं कि यहां खेल में इतनी सियासत होती है कि जो खिलाड़ी होते हैं वो पीछे छूट जाते हैं. ये हाल सिर्फ क्रिकेट के साथ ही नहीं है. कई ऐसे खेल संघ हैं जिसको लेकर लोग दावा तो पेश करते हैं, लेकिन वो उससे कभी जुड़ी नहीं होते हैं.

हम अगर मृत्युंजय तिवारी की बात करें तो वो किसी भी खेल के कभी भी खिलाड़ी नहीं रहे हैं. जब इस सवाल का जबाब मांगा गया तो कहने लगे कि ऐसा कहीं नही होता है कि खेल संघ चलाने के लिए खिलाड़ी होना जरुरी हो. हालांकि जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह टेबल टेनिस के खिलाडी रहे हैं और उनका मानना है कि जो खिलाड़ी नहीं रहेगा वो कभी खेल और खिलाडियों की भावना को नहीं समझेगा.

बिहार में खेल के साथ खेल के सवाल को लेकर ईटीवी/न्यूज18 की टीम पहुंची खेल मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि के पास. खेल मंत्री ने कहा कि उन तमाम खेल संघों चिन्हित किया जा रहा है, जो बिहार में बड़े पैमाने पर नहीं होता है. साथ ही उन खेल संघ को खेल विभाग की तरफ से मान्यता भी दी जाएगी.

बिहार सरकार खेल को लेकर भले बड़ी-बड़ी बातें कर ले, लेकिन ये भी सच है कि खेल को बढ़ावा देने में ईमानदारी पूर्वक पहल नहीं की जाती है. ऐसे हालात में बिहार से प्रतिभावान खिलाड़ी पलायन कर जाते हैं या फिर वो खेलना छोड़ देते हैं.
News18 Hindi पर Jharkhand Board Result और Rajasthan Board Result की ताज़ा खबरे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें .
IBN Khabar, IBN7 और ETV News अब है News18 Hindi. सबसे सटीक और सबसे तेज़ Hindi News अपडेट्स. Bihar News in Hindi यहां देखें.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर