भतीजे चिराग पर भड़के चाचा पशुपति पारस, पूछा- किस हैसियत से पार्टी से बाहर निकाला?

पशुपति पारस ने चिराग पासवान पर साधा निशाना.

Chirag Paswan v/s Pashupati Kumar Paras:  पशुपति पारस का कहना है कि चिराग के फ़ैसले से लोगों में नाराजगी थी. 99 प्रतिशत लोग वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकलाप (Bihar Politics) से नाख़ुश थे.

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पटना. लोक जनशक्ति पार्टी में सियासी छींचतान जारी है. चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने लोजपा (LJP) कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक के बाद बगावत करने वाले अपने चाचा पशुपति पारस (Pashupati Kumar Paras) समेत सभी 5 सांसदों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया. चिराग के इस कदम को पशुपति ने अब आड़े हाथों लिया है. पशुपति पारस का कहना है कि किस हैसियत से चिराग ने उन्हें और सांसदों को पार्टी से निकाला? उन्हें पहले नियम की जानकारी होनी चाहिए. पशुपति पारस का कहना है कि उनको पार्टी से निकालने का अधिकार नहीं है.

चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कार्यसमिति की सूची क्या उनके पास है?  कार्यसमिति की उनकी बैठक असंवैधानिक है. सर्वसम्मति से 17 जून को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा. पशुपति ने दावा किया है कि आंकड़े उनके पक्ष में है. 99 प्रतिशत लोग वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकलाप से नाख़ुश थे. चिराग के फ़ैसले से लोगों में नाराजगी थी. सबकी राय थी कि नेतृत्व परिवर्तन ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि आगे चिराग़ के लिए अभी मौका है. परिवार का बेटा है. काम करें पार्टी में रहे हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है.

चिराग पासवान ने पुराने खत किए शेयर

लोक जनशक्ति पार्टी में चल रही खींचतान के बीच अब पहली बार चिराग पासवान  ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने एक ट्वीट कर पशुपति पारस को लिखे कुछ पुराने पत्र साझा किए. इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि पापा की बनाई इस पार्टी और अपने परिवार को साथ रखने के लिए मैंने प्रयास किए लेकिन असफल रहा. पार्टी मां के समान है और मां के साथ धोखा नहीं करना चाहिए. लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है. आगे उन्होंने लिखा कि पार्टी में आस्था रखने वाले लोगों का मैं धन्यवाद देता हूं.

अपने ट्वीट के साथ ही साझा किए गए पत्र वे हैं जो चिराग ने पशुपति पारस को 29 मार्च को लिखे थे. इन पत्रों में चिराग ने पारस को लिखा है कि रामचंद्र पासवान के निधन के बाद से ही आप में बदलाव देखने को मिला. पापा की तेरहवीं में भी 25 लाख रुपये मां को देने पड़े इससे मैं दुखी था. चिराग ने एक पत्र में लिखा है कि मैंने हमेशा भाइयों को साथ लेकर चलने की कोशिश की. पापा के जाने के बाद आपने बात करना बंद कर दिया. चिराग ने एक पत्र में आरोप लगाया है कि पापा के रहते हुए भी आपने पार्टी तोड़ने का प्रयास‌ किया. वहीं प्रिंस राज पर रेप के मामले का जिक्र करते हुए चिराग ने कहा कि प्रिंस पर आरोप के दौरान भी मैं परिवार के साथ खड़ा रहा.

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