क्‍या बि‍हार में पशुपति पारस का स्‍ट्रोक, बीजेपी के ल‍िए यूपी व‍िधानसभा चुनाव में होगा 'मास्‍टर स्‍ट्रोक', जानें कैसे

उत्तर प्रदेश में आने वाले वक्त में विधानसभा चुनाव होने हैं और उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों का चुनावी हार जीत में खासा प्रभाव रहता है.

Dalit Vote Bank: यूपी में दलितों की आबादी लगभग 21.5 प्रतिशत है. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सीटों पर दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका में होते हैं. प्रदेश में 85 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए रिजर्व हैं और इन सीटों पर दलित निर्णायक हैं और दलितों को बीएसपी का वोटबैंक माना जाता रहा है लेकिन पिछले तीन-चार साल में ये वोट बैंक बीएसपी से छिटकता हुआ दिखा है.

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लोकजन शक्‍ति पार्टी के सांसद पशुपति कुमार पारस समेत 5 सांसदों ने रामविलास पासवान के बेटे च‍िराग पासवान को अलग कर एनडीए में शामिल होने का संकेत दिया है. इन 5 सांसदों के एनडीए में शामिल होने से बिहार विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र में एनडीए का हिस्सा एलजेपी है या नहीं इसके भ्रम पर विराम लग जाएगा. वहीं ब‍िहार में एक रात में हुए राजनीतिक उलटफेर का असर उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है और इसका फायदा बीजेपी को म‍िल सकता है.

अभी एनडीए में तकरीबन 20 राजनीतिक पार्टियां है, लेकिन इस घटक दल में बड़ी दलित पार्टी के तौर पर कोई पार्टी नहीं बची है. उत्तर प्रदेश में आने वाले वक्त में विधानसभा चुनाव होने हैं और उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों का चुनावी हार जीत में खासा प्रभाव रहता है. यूपी में दलितों की आबादी लगभग 21.5 प्रतिशत है. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई सीटों पर दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका में होते हैं. प्रदेश में 85 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए रिजर्व हैं और इन सीटों पर दलित निर्णायक हैं और दलितों को बीएसपी का वोटबैंक माना जाता रहा है लेकिन पिछले तीन-चार साल में ये वोट बैंक बीएसपी से छिटकता हुआ दिखा है.



उत्‍तर प्रदेश चुनाव में र‍िजर्व सीटों पर क्‍या रहे नतीजे
राज्य की 85 रिजर्व सीटों पर 2012 में सपा ने 31.5 फीसदी वोट लेकर 58 और बसपा ने 27.5 प्रतिशत वोटों के साथ 15 सीटें जीती थीं. वहीं बीजेपी को 14.4 फीसदी वोट के साथ महज 3 सीटें मिली थीं. 2017 में नतीजे बिल्कुल उलट गए और 85 सुरक्षित सीटों पर 2017 के नतीजों में 69 सीटें भाजपा ने जीती. उन्हें 39.8 प्रतिशत वोट मिले. वहीं सपा को 19.3 फीसदी वोट और 7 सीट मिली जबकि बीएसपी सिर्फ 2 सीटें जीत पाई. गणित इस बात को बताने के लिए काफी है कि यूपी में दलितो के वोट का कितना असर है.

रामविलास पासवान एनडीए में सबसे बड़े दलित चेहरे के तौर पर देखे जाते थे. रामविलास पासवान एनडीए में दलित स्टार कंपेनर थे. जाहिर सी बात है की उनकी मृत्यु के बाद एनडीए में उस रिक्त स्थान को कोई भर नही पाया था. लेकिन अगर पशुपति पारस की एलजेपी एनडीए में शामिल होती है तो फिर से बीजेपी के गठबंधन को एक सक्रिय दलित पार्टी और दलित नेता मिल जाएगा, जिससे बीजेपी गठबंधन को बिहार में मजबूत होगी बल्कि इसका फायदा पार्टी गटबंधन को उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में भी हो सकता है.

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