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क्या विधानमंडल के मॉनसून सत्र से बदलेगी बिहार की सियासत ? जानें वजह

लालू प्रसाद और नीतीश कुमार वर्तमान राजनीति में एक दूसरे के प्रबल विरोधी हैं (फाइल फोटो)

लालू प्रसाद और नीतीश कुमार वर्तमान राजनीति में एक दूसरे के प्रबल विरोधी हैं (फाइल फोटो)

Bihar Politics: जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Act) और जातिगत जनगणना (Caste Based Census) दो ऐसे मुद्दे हैं जिसको लेकर बिहार में जेडीयू और राजद (RJD) के सुर एक हैं. जबकि बीजेपी इससे ठीक उलट सोच रखती है. बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी निगाहें इसी मुद्दे पर होंगी.

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पटना. बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र क्या जेडीयू (JDU) और राजद के लिए भविष्य में एक साथ आने का रास्ता खोल सकता है, ये सवाल बिहार के सियासी गलियारे में उठने लगा है. सवाल उठने की ठोस वजह भी है क्योंकि भले ही बिहार में एनडीए की सरकार चल रही है लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे है जिसे लेकर जेडीयू और भाजपा आमने सामने दिख रही है. मामला तब और गम्भीर हो जाता है जब इसको लेकर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) धीरे-धीरे मुखर हो रहे हैं.

जब असम सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस कानून को लागू करने की बात कही थी उसके बाद से ही भाजपा इस मुद्दे को लेकर बिहार में काफी मुखर थी, वहीं जेडीयू की तरफ से मोर्चा खुद नीतीश कुमार ने सम्भाल लिया है और साफ-साफ लहजों में जेडीयू का स्टैंड क्लियर कर दिया है कि बिहार में ये कानून संभव नहीं है. जरूरत है महिलाओं को शिक्षित करने की और बिहार सरकार इस रास्ते पर चल भी रही है जबकि भाजपा के फायर ब्रांड नेता बिहार में भी जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना चाहते हैं. बिहार सरकार के मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं कि हर पार्टी की राय अलग-अलग होती है, इसमें बुराई क्या है. क्या इसके पहले धारा 370, अयोध्या विवाद जैसे मुद्दे पर भाजपा और JDU का रुख अलग-अलग नहीं था लेकिन तब क्या दोनों की सरकार नहीं चली लेकिन भाजपा मानती है कि देश की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है उसके लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होना ही चाहिए.

एक है राजद और जेडीयू की राय

जेडीयू के नेता और MLC खालिद अनवर कहते हैं कि कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिस पर जेडीयू कभी भी समझौता नहीं कर सकता है और उसमें जनसंख्या नियंत्रण कानून भी एक है. नीतीश कुमार के रहते ये कानून किसी भी कीमत पर लागू नहीं होगा. कुछ ऐसी ही राय राजद की भी है. राजद के वरिष्ठ विधायक और मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र कहते हैं कि भाजपा ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है और एक धर्म विशेष के खिलाफ इस तरह का बिल लाकर वोट की सियासत करना चाहती है लेकिन वो अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाएगी. ज़ाहिर है जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर राजद और जेडीयू की राय एक सामान दिख रही है और भाजपा की अलग है. कुछ ऐसी ही राय जातिगत जनगणना को लेकर भी जेडीयू और राजद की है.

जातिगत जनगणना का मुद्दा

नीतीश कुमार ने जहां कहा कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए और इसके लिए बिहार विधानसभा में दो बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव भी पारित किया गया था कि केंद्र को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए वहीं राजद लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठा रहा है और इसकी शुरुआत सबसे पहले लालू यादव ने की थी. केंद्र की सरकार ने जातिगत जनगणना की बात से इंकार किया है इस पर तेजस्वी यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि जब जानवरों की गणना हो सकती है तो OBC और EBC का क्यों नहीं. केंद्र सरकार की मंशा OBC और EBC को लेकर ठीक नहीं है.

पहले भी करवट ले चुकी है बिहार की सियासत

साफ है दो ऐसे मुद्दे हैं जिसकी वजह से फिलहाल राजद और JDU के सुर एक दिख रहे हैं और भाजपा के अलग लेकिन सवाल है कि क्या ये रुख आगे चल कर बिहार की सियासत में कुछ बड़ा खेल करने वाला है. इसके बारे में फिलहाल कोई कुछ नहीं कह सकता है लेकिन राजनीति है, कब क्या हो जाएं कोई नहीं जानता है. राजनीति में ना कोई स्थायी दोस्त होता है और ना ही स्थायी दुश्मन और बिहार की सियासत में पिछले पंद्रह साल में ऐसी तस्वीर खूब दिखी है.

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