OPINION: बिहार में रह-रहकर असमंजस और असहजता में क्यों फंस जाती है बीजेपी?

कभी सहयोगी दल जेडीयू (JDU) के नेताओं के कारण तो कभी अपनों के कारण ही भंवर में फंस जाती है बिहार (Bihar) बीजेपी (BJP).

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: September 10, 2019, 5:03 PM IST
OPINION: बिहार में रह-रहकर असमंजस और असहजता में क्यों फंस जाती है बीजेपी?
कभी सहयोगी दल जेडीयू के नेताओं के कारण तो कभी अपनों के कारण ही भंवर में फंस जाती है बिहार बीजेपी.
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: September 10, 2019, 5:03 PM IST
पटना. बिहार (Bihar) की राजनीति (Politics) में पिछले कुछ समय से कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे बिहार बीजेपी (BJP) और उसके नेताओं को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है कि करें तो क्या और कहें तो क्या? 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) और नरेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल के गठन के बाद से कुछ न कुछ ऐसा ही हो रहा है. ऐसे मामलों के आते ही जेडीयू (JDU) के नेता हमलवार हो जाते हैं और मुद्दाविहीन विपक्ष की ओर से बयानों का बाण चलने लगते हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के चुनावी झारखंड (Jharkhand) दौरे में सभी ने मिलकर बीजेपी (BJP) को कोसा और जमकर भड़ास निकाली कि झारखंड को बीजेपी ने बर्बाद कर दिया. झारखंड में जेडीयू ने नीतीश मॉडल का राग छेड़ दिया जबकि बीजेपी पिछले पांच वर्षों से झारखंड में रघुवर मॉडल का गुणगान करते थक नहीं रही.

वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी नेता संजय पासवान ने यह कहते हुए आग में घी का काम किया कि नीतीश कुमार अब बिहार की गद्दी बीजेपी के लिए छोड़ दें. नरेन्द्र मोदी की सरकार में शामिल न होने के बाद नीतीश कुमार ने अपना मंत्रिमंडल विस्तार किया, लेकिन इस मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी शामिल नहीं हुई.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी नेता संजय पासवान ने यह कहते हुए आग में घी का काम किया कि नीतीश कुमार अब बिहार की गद्दी बीजेपी के लिए छोड़ दें.


सिर्फ एक मंत्री बनाए जाने से नाराजगी

खुद नीतीश कुमार और उनके नेता खुलकर यह कहने से नहीं चूके कि मोदी मंत्रिमंडल में सांकेतिक रुप से सिर्फ एक मंत्री बनाए जाने से वे नाराज हैं. लेकिन नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने पर बिहार बीजेपी में सुशील कुमार मोदी, नंदकिशोर यादव जैसे नेता खुलकर बोल भी नहीं पाए कि मोदी मंत्रिमंडल में जेडीयू शामिल हुआ इस लिए बीजेपी भी नाराज हुई और नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार में इसी कारण शामिल नहीं हुए. इसी बीच दोनों दलों की ओर से बयानबाजी भी हुई और वह विपक्ष जिसके पास न तो कोई मुद्दा था और न ही कोई नेतृत्व, जमकर चुटकी लेता रहा.

मौन समर्थन
तीन तलाक, धारा 370 पर भी जब जेडीयू ने संसद में विरोध किया तो भले ही माना गया कि यह विरोध नहीं मौन समर्थन था, लेकिन इन प्रकरण में भी बीजेपी जेडीयू के विरोध का मजबूती से जबाव नहीं दे सकी. झारखंड चुनाव को लेकर नीतीश कुमार पिछले दिनों रांची गए. उनके साथ ललन सिंह और प्रशांत किशोर भी थे. सभी ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ जमकर बोला कि पिछले 18-19 वर्षों में बीजेपी ने झारखंड को बर्बाद कर दिया.
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कई बड़े नेता रहे चुप
बयान भले ही झारखंड केन्द्रित था, लेकिन निशाना साफ तौर पर कहीं और ही था इसपर भी बिहार में जमकर बयानबाजी हुई. बीजेपी पर हुआ यह हमला भी बिहार के नेताओं को असमंजस में डाल गया. सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार जैसे नेता चुप रहे. यहां तक कि नीतीश सरकार में मंत्री और झारखंड बीजेपी के प्रभारी मंगल पांडे तक ने चुप्पी साध ली.

गर्म हुई बिहार की सियासत
लेकिन सोमवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और बीजेपी के नेता संजय पासवान ने यह कहते हुए बिहार की सियासत को गरमा दिया कि नीतीश कुमार अब बिहार को बीजेपी के लिए छोड़ें और केन्द्र की राजनीति करें. इस बयान ने ऐसी आग लगाई कि जेडीयू में प्रवक्ता लेवल का हर नेता हमलावर हो गया और संजय पासवान के बहाने बीजेपी को बड़बोले बयान के लिए नसीहत देने लगा.

बयान भले ही झारखंड केन्द्रित था, लेकिन निशाना साफ तौर पर कहीं और ही था इसपर भी बिहार में जमकर बयानबाजी हुई


वहीं बीजेपी अपने आपको डिफेंस ही करती रही. सीनियर लीडरशिप ने तो इसको मानो तवज्जो ही नहीं दिया. कुल मिलाकर बिहार बीजेपी के लिए बड़ी समस्या यह है कि वह कई मौकों पर यह जता चुकी है कि नीतीश कुमार को बीजेपी की जितनी जरुरत है उससे ज्यादा जरुरत बीजेपी को नीतीश कुमार की है. सुशील मोदी और नंदकिशोर यादव जैसे नेता की नीतीश कुमार से नजदीकी किसी से छिपी भी नहीं है.

दोहरे जा सकती है 2015 की कहानी
ऐसे में बीजेपी का सीनियर लीडरशिप कुछ भी बोलकर नीतीश कुमार को नाराज नहीं कर सकता. क्योंकि बीजेपी को ऐसा लगता है कि अगर नीतीश कुमार फिर से अलग हुए तो 2015 की कहानी फिर से दोहराई जा सकती है. जिसके लिए बीजेपी बिलकुल भी तैयार नहीं है. लेकिन इतना तो जरुर है कि बीजेपी जेडीयू के रिश्तों पर अगर कोई भी सवालिया निशान लगता है तो सबसे पहले बिहार बीजेपी के नेताओं के माथे पर ही बल पड़ जाता है.

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First published: September 10, 2019, 4:52 PM IST
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