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Bihar Politics: जनसंख्या नियंत्रण कानून: 'अपनों' के आगे झुक जाएंगे CM नीतीश या अड़े रहेंगे?

बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर पसोपेश में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  (फाइल फोटो)

बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर पसोपेश में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

Population Control Act in Bihar: जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी जैसे सहयोगियों ने सीएम नीतीश के सुर में सुर मिलाया है, और सीएम नीतीश कुमार की दलील का समर्थन किया है. जाहिर है भाजपा के कोर मुद्दे पर जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार की पार्टी का स्टैंड भी भाजपा से अलग है.

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पटना. जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Act) बनाए जाने की मांग बिहार विधान सभा (Bihar Assembly) में उठी. बुधवार को ध्यानाकर्षण सूचना में सत्तापक्ष के विधायक विजय कुमार खेमका, अवधेश सिंह , विनय चौधरी, कृष्ण कुमार ऋषि और डॉ सुनील कुमार ने यह मांग उठाई. हालांकि नीतीश सरकार ने इस मसले पर फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है और इसको लेकर सरकार ने समय मांगा है. इस बीच जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर JDU विधायक संजीव कुमार ने बड़ा बयान दिया है. न्यूज 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाना चाहिए और इसे सबसे पहले नेताओं पर लागू करना चाहिए ताकि देश व समाज में इसका मैसेज अच्छा जाए. जाहिर है जेडीयू विधायक के इस बयान के बाद सीएम नीतीश के सामने पसोपेश की स्थिति है क्योंकि भाजपा के साथ ही जदयू के नेता भी जनसंख्या कानून की मांग करने लगे हैं.

बड़ा बदलाव तो कांग्रेस के स्टैंड में भी दिख रहा है क्योंकि जनसंख्या कानून पर कांग्रेस के भी सुर बदलने लगे हैं. कांग्रेस की विधायक नीतू सिंह ने इसका समर्थन करते हुए  जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिहार में भी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के पक्ष में है, लेकिन किसी जाति को टारगेट कर कानून नहीं बनाया जाना चाहिए. जाहिर है सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव के बीच बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है.

नीतीश की दलील में कितना दम?
दरअसल जब से यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस कानून का मसौदा तैयार किया है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी यह कानून बनाने का दबाव बढ़ गया है. हालांकि सीएम नीतीश ने इस मसले पर हाल में ही साफ कहा था कि कोई राज्य कुछ करना चाहे, तो करे, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना. मेरा मानना है कि अगर घर की महिला पढ़ी-लिखी होगी तो जनसंख्या खुद नियंत्रित हो जायेगी. सीएम नीतीश ने ने उदाहण देते हुए कहा कि चीन में पहले एक, फिर दो बच्चों की बात, अब क्या हो रहा है. मुझे लगता है कि 2040 तक बिहार में जनसंख्या पर नियंत्रण हो जायेगा.

भाजपा नेताओं के अलग बोल
पर सीएम नीतीश के कहने के बावजूद इस पर बिहार में सियासत जारी है. नीतीश सरकार में नंबर दो पर काबिज बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को जागरूक करने की जरूरत है. पुरुषों के अंदर जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए नसबंदी को लेकर भी काफी डर के स्थिति है. बिहार के कई जिलों में तो नसबंदी सिर्फ एक प्रतिशत ही है. साफ है कि सीएम नीतीश इस मसले पर अपनों (भाजपा) की विचारधारा व नीतियों से भी घिरे हुए हैं.

योगी के कानून के सपोर्ट में कुशवाहा!
अपनों से घिरे होने की बात कहने की बात को यू समझें कि इससे पहले जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने योगी सरकार के उत्तर प्रदेश में लागू किये गए जनसंख्या नियंत्रण कानून का समर्थन किया था. कुशवाहा के अनुसार बिहार में भी इसकी आवश्यकता बढ़ गयी है, क्योंकि जिस तरह से आबादी बढ़ रही है उसका असर विकास पर दिखेगा. राज्य सरकार को भी परामर्श कर इस कानून को लागू करने की आवश्यकता है. दूसरी ओर तेजस्वी यादव की पार्टी राजद ने भी जनसंख्या कानून को जबरन थोपने की बात कहकर इसका विरोध किया है.

मांझी-सहनी का नीतीश को मिला साथ
हालांकि जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी जैसे सहयोगियों ने सीएम नीतीश के सुर में सुर मिलाया है, और सीएम नीतीश कुमार की दलील का समर्थन किया है. जाहिर है भाजपा के कोर मुद्दे पर जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार की पार्टी का स्टैंड भी भाजपा से अलग है. इस बीच भाजपा कोटे से पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कई बार दो बच्चों के कानून की बात उठाई है और पंचायत चुनाव में इसे लागू करने की बात भी कही है. हालांकि विवाद हुआ तो उन्होंने इस बार के पंचायत चुनाव में इसे लागू करने की बात से इनकार कर दिया.

यूपी सरकार के मसौदे में ये प्रावधान
बता दें कि उत्तर प्रदेश की सरकार नई जनसंख्या नीति लाने की तैयारी में है. नए जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. प्रस्तावित कानून के तहत दो से अधिक बच्चों के पिता को किसी भी सरकारी सब्सिडी या किसी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा. इसके अलावा ऐसे व्यक्ति किसी सरकारी नौकरी के लिए भी आवेदन नहीं कर सकता है. साथ ही नए मसौदे में ये भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को स्थानीय निकाय चुनाव में भी लड़ने की मनाही होगी. बहरहाल अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर अपनों के दबाव में सीएम नीतीश आ जाते हैं या फिर वे अपने वर्तमान स्टैंड पर ही कायम रहेंगे?

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