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प्रशांत किशोर का सवाल- क्या JDU नेतृत्व बीजेपी का पिछलग्गू बन गया है?

Niraj Kumar | News18 Bihar
Updated: December 13, 2019, 9:02 PM IST
प्रशांत किशोर का सवाल- क्या JDU नेतृत्व बीजेपी का पिछलग्गू बन गया है?
नागरिकता कानून को लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं. (फाइल फोटो)

प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के करीबियों ने बताया कि जेडीयू प्लेटफॉर्म पर नागरिकता संशोधन बिल को लेकर पार्टी के नेताओं से राय नहीं ली गई.

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पटना. नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पर जेडीयू (JDU) के रुख से नाराज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) उर्फ पीके ने एक और नया ट्वीट किया है. प्रशांत किशोर ने कहा है कि भारत की आत्मा को बचाने का काम अब 16 गैर-बीजेपी (Non BJP) शासित राज्यों पर है क्योंकि लागू अमल में राज्यों को लाना है. प्रशांत किशोर ने लिखा है कि पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल ने नागरिकता संशोधन बिल को ना कहा है. अब बाकी राज्यों को अपना स्टैंड स्पष्ट करना है.

सवाल ये है कि आखिर प्रशांत किशोर नागरिकता कानून पर पार्टी से क्या चाहते  हैं. न्यूज18 इंडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर के करीबी लोगों ने बताया कि पीके जानना चाहते हैं कि क्या जेडीयू का नेतृत्व बीजेपी का पिछलग्गू बन गया है.



पार्टी के नेताओं से राय नहीं ली गई 

प्रशांत किशोर के करीबियों ने बताया कि पार्टी प्लेटफॉर्म पर नागरिकता संशोधन बिल को लेकर पार्टी के नेताओं से राय नहीं ली गई और संसद में सीधे नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन करने का फैसला किया गया. प्रशांत किशोर का ये भी मानना है कि जेडीयू ने लगातार बिल का विरोध किया था और अब दोनों सदनों में जेडीयू ने बिल का समर्थन कर दिया.

कब कब किया जेडीयू ने बिल का विरोध ? 
सबसे पहले बिल का विरोध जेडीयू नेता हरिवंश की तरफ से पार्टी की तरफ से किया गया था. इसके बाद जेडीयू की कार्यकारिणी में खुद नीतीश कुमार ने बिल का विरोध किया और पार्टी नेताओं को समझाया कि कैसे बिल असंवैधानिक है. इसके बाद जेडीयू के पदाधिकारियों की बैठक में भी नीतीश कुमार ने नागरिकता संशोधन बिल का जमकर विरोध किया और पार्टी नेताओं को बिल के खतरनाक पक्ष के बारे में बताया. जनवरी, 2019 में संसद में नागरिकता बिल लाया गया तब भी जेडीयू ने विरोध किया था.कौन हैं प्रशांत किशोर ?
प्रशांत किशोर जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं लेकिन इनकी पहचान और लोकप्रियता चुनाव रणनीतिकार के तौर पर अधिक है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की जीत और 2015 में बिहार में महागठबंधन की जीत में प्रशांत किशोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. फिलहाल प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनावी रणनीति बना रहे हैं.

क्या जेडीयू प्रशांत किशोर पर कार्रवाई करेगी या प्रशांत किशोर पार्टी छोडेंगे?
प्रशांत किशोर के करीबियों का कहना है कि प्रशांत किशोर पार्टी नहीं छोड़ेंगे और वो चाहते हैं कि पार्टी वो करे जो जेडीयू पार्टी के संविधान से जुड़ा है और जो सही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशांत किशोर के खिलाफ पार्टी कार्रवाई कर सकती है ? इसकी उम्मीद फिलहाल कम लगती है क्योंकि फिर पार्टी को अपने राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता के खिलाफ भी कार्रवाई करनी पड़ेगी क्योंकि वो भी बिल पर सवाल उठा चुके हैं.

जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर का मानना है कि वैचारिक तौर पर जेडीयू को बीजेपी का पिछलग्गू नहीं बनना चाहिए. उन्होंने यह सवाल भी किया है कि क्या जेडीयू का नेतृत्व यानि नीतीश कुमार वैचारिक तौर पर बीजेपी के पिछलग्गू बन गए हैं.

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First published: December 13, 2019, 8:22 PM IST
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