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ममता बनर्जी के साथ प्रशांत किशोर! JDU बोली- बिना नीतीश कुमार की इजाजत के संभव नहीं

News18 Bihar
Updated: June 6, 2019, 6:02 PM IST
ममता बनर्जी के साथ प्रशांत किशोर! JDU बोली- बिना नीतीश कुमार की इजाजत के संभव नहीं
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर.

जेडीयू नेता अजय आलोक ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर कोई भी किसी को सलाह दे सकता है, लेकिन पार्टी के पद पर रहते हुए यह संभव नहीं है.

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जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ काम करने की खबरों पर जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पार्टी के प्रवक्ता अजय आलोक ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि प्रशांत किशोर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. ऐसे में इस तरह की कोई भी बात बिना राष्ट्रीय अध्यक्ष की इजाजत के यह संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वैसे जेडीयू को इस बात की अभी तक कोई जानकारी नहीं है.

अजय आलोक ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर कोई भी किसी को सलाह दे सकता है, लेकिन पार्टी के पद पर रहते हुए ये संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इसके लिए पार्टी की कार्यसमिति और खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार आगे तय करेंगे. बता दें कि सूत्रों से ऐसी खबर मिल रही है कि लोकसभा चुनाव में झटका खाने के बाद ममता बनर्जी अब प्रशांत किशोर की सेवा लेने जा रही हैं. जानकारी के अनुसार, इसके लिए राज्य सरकार प्रशांत किशोर के साथ एक मीटिंग करने जा रही है. दरअसल, राज्य सरकार को लग रहा है कि आम लोगों के साथ राज्य प्रशासन अपना संवाद कायम रखने में नाकाम साबित हुई है.

इस वजह से प्रशांत किशोर का साथ चाहती है टीएमसी
प्रशांत किशोर ने कई राज्यों में अन्य राजनीतिक दलों के लिए एक रणनीतिक विशेषज्ञ के रूप में काम किया है, इसलिए टीएमसी उन्हें अपने साथ लाना चाहती है. खबर यह भी है कि प्रशांत किशोर ने भी इसके लिए सहमति दे दी है. हालांकि, इसकी पुष्टि होनी बाकी है. बताया जा रहा है कि टीएमसी यह जानना चाहती है कि लोकसभा चुनाव में क्या गलत हुआ है? इसके साथ ही आगामी नगरपालिका चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनावों में संभावित नुकसान को किस तरह रोका जाए. इसके लिए क्या रणनीति हो, इसपर विचार किया जाएगा. इसके अलावा टीएमसी के किए गए विकास कार्यों को जनता तक कैसे पहुंचाया जाए इसपर भी बात होनी है. टीएमसी और राज्य प्रशासन का मानना है कि मोदी सरकार के पास अच्छे कम्युनिकेशन कौशल के कारण सत्ता में वापस आ पाई, जिसका टीएमसी के पास अभाव था.

बता दें लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी ने कई ऐसे इलाके को खो दिया है जो कभी टीएमसी का गढ़ हुआ करती था. उसने न केवल क्षेत्र खोए, बल्कि लोगों के समर्थन का एक बड़ा हिस्सा भी गंवाया है. गौरतलब है कि हाल में ही प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई थी. इसमें उन्हें जबरदस्त सफलता भी हासिल हुई. आंध्र में जहां जगन मोहन रेड्डी अपार बहुमत के साथ मुख्यमंत्री बने. वहीं, उनकी पार्टी 25 लोकसभा सीटों में 22 पर जीतने में कामयाब रही.

इनपुट- अमित कुमार सिंह

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First published: June 6, 2019, 5:38 PM IST
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