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क्या बिहार में 'NDA को हराओ' मिशन पर हैं प्रशांत किशोर, युवाओं को जोड़ने की मुहिम से उठे सवाल
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News18 Bihar
Updated: February 29, 2020, 2:27 PM IST
क्या बिहार में 'NDA को हराओ' मिशन पर हैं प्रशांत किशोर, युवाओं को जोड़ने की मुहिम से उठे सवाल
प्रशांत किशोर ने 'बात बिहार की' नाम से अभियान की शुरुआत की है. (फाइल फोटो)

प्रशांत किशोर के युवाओं को जोड़ने का अभियान सियासी दलों के नेताओं के लिए चिंता का सबब बन रहा है.

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अशोक मिश्रा

पटना. जेडीयू से निकाले जाने के बाद चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर बिहार पहुंचे, तो सियासत में खलबली मचनी स्वाभाविक थी. लेकिन क्या वे 'NDA को हराओ' मिशन के तहत बिहार गए हैं? यह सवाल सियासतदानों को परेशान किए हुए है. हालांकि खुद प्रशांत किशोर ने अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं. अलबत्ता उन्होंने अपनी प्रेसवार्ता में कहा भी था कि वह राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर बिहार आए हैं और किसी पार्टी को ज्वाइन नहीं करेंगे. लेकिन सियासी गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर कयासों का दौर जारी है.

सियासी पार्टियों को क्यों हो रहा संदेह
प्रशांत किशोर ने अपनी प्रेसवार्ता में साफ तौर पर कहा था कि वे 'बात बिहार की' नाम का अभियान लॉन्च करने वाले हैं. इसके जरिए वे बिहार के युवाओं को एकजुट करना चाहते हैं, ताकि राज्य के विकास का खाका खींचा जा सके. किशोर ने कहा था कि बिहार को देश के 10 विकसित राज्यों की लिस्ट में लाने के लिए लिए आगामी 100 दिनों में वे आम लोगों और खासकर युवाओं को जोड़ने का अभियान छेड़ेंगे. इसके तहत प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि वे प्रदेश के सभी 38 जिलों के गांवों और पंचायतों तक पहुंचेंगे. अभियान की शुरुआत करने के साथ ही किशोर ने 'बात बिहार की' कैंपेन से ढाई लाख से अधिक युवाओं को जोड़ लेने का दावा भी किया. प्रशांत किशोर के साथ युवाओं का यही जुड़ाव, बिहार के सियासी दलों के नेताओं के लिए चिंता का सबब बन रहा है.



बीजेपी से ज्यादा सदस्य जोड़ने का दावा


चुनाव रणनीतिकार के तौर पर बीजेपी, जेडीयू समेत कई पार्टियों के साथ काम कर चुके प्रशांत किशोर की कवायद चुनावी साल में सुर्खियों में है. किशोर ने अब योजना बनाई है कि वे जून तक बिहार के 10 लाख से अधिक युवाओं को अपने अभियान से जोड़ेंगे. उन्होंने दावा किया है कि इतनी बड़ी तादाद में नौजवानों को जोड़ने के बाद उनका संगठन बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक दल बीजेपी से भी बड़ा हो जाएगा. आपको बता दें कि बिहार बीजेपी इकाई का दावा है कि अभी प्रदेश में उसके सदस्यों की संख्या 9 लाख है. किशोर की योजना है कि वह अपने अभियान के तहत प्रदेश के 8 हजार से अधिक पंचायतों और 45 हजार से अधिक गांवों तक पहुंचे, ताकि हर वर्ग और समुदाय तक उनकी पहुंच बन सके. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रशांत किशोर किस मकसद से इस स्तर का संगठन बनाने में जुटे हैं. यही सवाल बिहार के सियासी दलों को भी परेशान किए हुए है.

नेताओं से भी मिल रहे हैं पीके
प्रशांत किशोर ने मीडिया के साथ बातचीत के दौरान यह साफ कर दिया था कि इस बार वे किसी पार्टी या नेता के साथ बिहार नहीं आए हैं, और न ही कम दिनों के लिए आए हैं. बल्कि किशोर ने साफ तौर पर कहा था कि बिहार के लिए कुछ करने के मकसद वे पूरी योजना बनाकर आए हैं. इसी क्रम में किशोर ने बीते दिनों महागठबंधन के घटक दल RLSP के नेता उपेंद्र कुशवाहा, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी और वीआईपी के नेता मुकेश सहनी से मुलाकात की. वहीं, प्रशांत किशोर ने सीपीआई नेता और जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार से भी मुलाकात की. इन मुलाकातों में गौर करने वाली बात यह थी कि किशोर ने बिहार के तमाम विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात की, मगर वे बीजेपी या जेडीयू के किसी नेता से नहीं मिले. यहां तक कि राजद के किसी नेता से भी उनकी मुलाकात नहीं हुई. ऐसे में यह चर्चा जोर-शोर से उठ रही है कि क्या प्रशांत किशोर विधानसभा चुनाव में 'एनडीए हराओ' मिशन पर आए हैं.

डिस्क्लेमरः लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं.

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First published: February 29, 2020, 2:27 PM IST
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