नीतीश के चेहरे और सीट शेयरिंग मुद्दे के पीछे है प्रशांत किशोर का दिमाग!

सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर की मुलाकात का ही असर है कि जेडीयू एनडीए में सीटों के तालमेल और नीतीश के नेतृत्व को लेकर मुखरता से बीजेपी पर दबाव बनाती नजर आ रही है.

News18 Bihar
Updated: June 14, 2018, 1:19 PM IST
नीतीश के चेहरे और सीट शेयरिंग मुद्दे के पीछे है प्रशांत किशोर का दिमाग!
नीतीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर ( फाइल फोटो)
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Updated: June 14, 2018, 1:19 PM IST
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर नीतीश कुमार को जीत की राह दिखाएंगे. प्रशांत किशोर की दिल्ली और पटना में नीतीश कुमार के साथ मुलाकात हो चुकी है. पटना में नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर की बैठक में जेडीयू नेता केसी त्यागी और पवन वर्मा भी मौजूद रहे.

सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर की मुलाकात का ही असर है कि जेडीयू एनडीए में सीटों के तालमेल और नीतीश के नेतृत्व को लेकर मुखरता से बीजेपी पर दबाव बनाती नजर आ रही है. प्रशांत किशोर ने जेडीयू नेताओं को नीतीश कुमार के चेहरे की चमक तेज करने को लेकर सुझाव दिए हैं. 2015 बिहार विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए तैयार 'बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है' काफी सुर्खियों में रहा था.

जानकारी के मुताबिक दिल्ली के बिहार भवन में मुलाकात के दौरान नीतीश के अलावा आरसीपी सिंह और केसी त्यागी भी मौजूद थे जबकि पटना में दोनों की मुलाकात के दौरान केसी त्यागी, पवन वर्मा और आरपीसी मौजूद रहे.

हाल के दिनों में बिहार में चेहेरे को लेकर जदयू-बीजेपी और रालोसपा में बयानबाजी तेज हैं. तीनों पार्टियां अपने नेताओं के चेहेर को लेकर लगातार दावा कर रही है. कांग्रेस छोड़कर जेडीयू में हाल ही में शामिल हुए अशोक चौधरी ने मंगलवार को कहा, 'नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस प्रदेश में अगर अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा गया तो एनडीए को नुकसान होगा.'

चौधरी के अनुसार, यह प्रश्न कहां उठता है कि नीतीश को एनडीए के चेहरे के तौर पर बिहार में पेश किया जाए या नहीं, बल्कि हकीकत यह है कि एनडीए को उनका नेतृत्व स्वीकार करना पड़ेगा क्योंकि बिहार में गठबंधन में कोई ऐसा नेता नहीं जो कि उनकी तरह सभी को स्वीकार्य हो.

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर नरेंद्र मोदी की टीम में थे. बीजेपी की जीत के लिए रणनीति तैयार की. बताया जाता है कि प्रशांत किशोर 'चाय पर चर्चा' की रणनीति के अहम हिस्सेदार रहे, लेकिन सरकार गठन के बाद उनके अमित शाह के साथ मतभेद उभरे और साल भर बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर, नीतीश कुमार के लिए रणनीति तैयार करने लग गए.

प्रशांत किशोर की रणनीति का नीतीश कुमार को फायदा हुआ और लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुके नीतीश कुमार ने अपनी खोई हुई जमीन हासिल की. लालू प्रसाद और कांग्रेस के साथ नीतीश कुमार ने भारी बहुमत के साथ एनडीए पर जीत दर्ज की. जीत के बाद कुर्ता-पायजामा में उनकी नीतीश कुमार के साथ तस्वीर टीवी और अखबारों की प्रमुख तस्वीर बनी.

भाजपा और नीतीश कुमार के अलावा पंजाब में कांग्रेस की जीत में भी प्रशांत किशोर की रणनीति काम आई. पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम करने के दौरान प्रशांत किशोर ने पटना छोड़ दिया. सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर महागठबंधन टूटने को लेकर नाराज थे.

सूत्रों का कहना है कि पंजाब में अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने के बाद अप्रैल में पटना लौटने पर प्रशांत किशोर कुछ घंटे ही नीतीश कुमार के आवास पर रुके. फिलहाल प्रशांत किशोर आंध्रप्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी के साथ काम कर रहे हैं और उनकी टीम अभी वहीं कैंप कर रही हैै.

मालूम हो कि साल 2015 में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड को मिलाकर महागठबंधन बनवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था लेकिन महागठबंधन टूटने और बीजेपी के साथ नई सरकार बनाने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था.

(दिल्ली से दिवाकर तिवारी के साथ प्रेम रंजन की रिपोर्ट)

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