किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे प्रशांत किशोर, आज पटना में करेंगे नई भूमिका का ऐलान
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किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे प्रशांत किशोर, आज पटना में करेंगे नई भूमिका का ऐलान
पीके के नाम से मशहूर राजनीतिज्ञ और राजनीति रणनीतिकार (फाइल फोटो)

JDU में रहते नीतीश ने PK को नंबर दो की हैसियत से पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था. इसके बाद कई युवाओं को जोड़ने के लिए प्रशांत किशोर ने पार्टी को अपने सुझाव दिए थे.

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पटना. बिहार की राजनीति के लिए मंगलवार यानी 18 फरवरी का दिन काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. दरअसल, हाल में ही जेडीयू से बाहर किए गए प्रशांत किशोर मंगलवार को अपने अगले कदम को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं. पीके यानी प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पहले यह ऐलान 11 फरवरी को ही करने वाले थे, लेकिन दिल्ली चुनाव के नतीजों के कारण इसे टाल दिया गया था.

नहीं थामेंगे किसी पार्टी का हाथ
पीके के नाम से मशहूर राजनीतिज्ञ और राजनीति रणनीतिकार मंगलवार को क्या बोलेंगे या कौन सा ऐलान करेंगे इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है हालांकि उन्होंने साफ किया है कि वो न तो किसी पार्टी के साथ जाएंगे और न ही किसी के लिए प्रचार करेंगे. न्यूज18 से बात में प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं बिहार में किसी भी पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा ना ही किसी पार्टी से जुड़ूंगा. मैं पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के तौर पर ही काम करूंगा. हाल के दिनों में केजरीवाल की जीत से पीके काफी उत्साहित दिखे थे और दिल्ली चुनाव में AAP की जीत के बाद दोनों नेताओं की एक तस्वीर भी सामने आई थी. दरअसल, केजरीवाल की जीत के लिए दिल्ली में पीके की कंपनी आईपैक ने जमीन तैयार की थी. विधानसभा चुनाव में AAP को 70 में से 62 सीटें आई थीं.

नीतीश को था सबकुछ ठीक होने का भरोसा
बिहार में जेडीयू में रहते हुए भी विवादित मुद्दों पर पीके पार्टी फोरम से हटकर बयान दे रहे थे. फिर चाहे वह एनआरसी का मुद्दा हो या फिर सीएए का. इसको लेकर पटना में नीतीश के साथ प्रशांत किशोर की तल्खियां बढ़ी थीं, लेकिन नीतीश कुमार को सबकुछ ठीक होने का भी भरोसा था. ये बात और है कि सब कुछ ठीक नहीं हो सका और पीके की पार्टी से विदाई हो गई.



मुकाबला के मूड में हैं पीके!
नीतीश कुमार और जेडीयू को लेकर प्रशांत किशोर का स्टैंड क्या होगा इसका खुलासा तो 18 फरवरी को ही हो सकेगा, लेकिन राजनीतिक जानकारों की मानें तो पीके नीतीश कुमार से मुकाबला करने के मूड में हैं. मालूम हो कि JDU में रहते नीतीश ने पीके को नंबर दो की हैसियत से पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद कई युवाओं को जोड़ने के लिए पीके ने पार्टी को अपने सुझाव दिए थे.



इसी साल होना है चुनाव
बिहार में इसी साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं. हमेशा की तरह इस बार भी मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन ही है ऐसे में क्या पिछले चुनाव में नीतीश-लालू के मददगार बने पीके इस बार लालू का मददगार बन महागठबंधन के लिए काम करेंगे. ये सिर्फ सवाल है जिसका जवाब काफी हद तक कल होने वाले प्रशांत किशोर के ऐलान के साथ ही मिल जाएगा.
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