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CM नीतीश के आवास पर होने वाली JDU की बैठक में शामिल नहीं होंगे प्रशांत किशोर

News18 Bihar
Updated: January 27, 2020, 3:03 PM IST
CM नीतीश के आवास पर होने वाली JDU की बैठक में शामिल नहीं होंगे प्रशांत किशोर
जेडीयू की मीटिंग में शामिल नहीं होंगे प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो)

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीते दिनों प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों से न सिर्फ JDU असहज महसूस कर रही है, बल्कि स्वयं नीतीश कुमार भी दुविधाजनक स्थिति झेल चुके हैं.

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पटना. 28  जनवरी को पटना के एक अणे मार्ग स्थित सीएम आवास पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) समेत जेडीयू के तमाम दिग्गज नेताओं की बैठक बुलाने जा रहे हैं. इसमें सभी सांसद और विधायक के साथ पार्टी के पदाधिकारी भी शामिल रहेंगे. ऐसे में सबकी नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बैठक में जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) शामिल होंगे या नहीं. इस बीच, सूत्रों से खबर है इसमें प्रशांत किशोर शामिल नहीं हो रहे हैं. जाहिर है अगर ऐसा होता है तो ये जेडीयू के लिए एक बड़ी बात होने जा रही है, क्योंकि PK विख्यात राजनीतिक रणनीतिकार माने जाते हैं और उनका पार्टी की अहम मीटिंग से दूर रहना एक नए राजनीति का संकेत भी दे रही है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीते दिनों प्रशांत किशोर द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों से न सिर्फ पार्टी असहज महसूस कर रही है, बल्कि स्वयं नीतीश कुमार भी कई बार दुविधाजनक स्थिति झेल चुके हैं. ऐसे में प्रशांत किशोर का बैठक से बाहर रहना जेडीयू और बिहार की राजनीति के लिए अहम बात होगी.

दरअसल, जेडीयू-बीजेपी का एक साथ दिल्ली चुनाव लड़ने का फैसला भी पार्टी की अहम बैठक से पीके की दूरी वजह मानी जा रही है. जेडीयू ने जब हाल में दिल्ली के विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की थी तो प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को इसमें जगह नहीं दी गई. बीते दिनों में दोनों ही नेताओं की पार्टी में बड़ी पूछ रही है.

prashant kishor
नागरिकता कानून को लेकर जेडीयू उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी के स्टैंड पर सवाल उठाया था. (फाइल फोटो)


इसी तरह बीते 22 और 23 जनवरी को राजगीर में जेडीयू का दो दिन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, लेकिन उसमें भी उनका अता-पता नहीं रहा. जबकि पिछली बार प्रशांत किशोर ने पार्टी वर्करों को प्रशिक्षित किया था. जाहिर है पीके का जेडीयू के बैठकों और कार्यक्रमों से दूर रहना आने वाली राजनीति का संकेत हो सकता है.

दरअसल, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीएम नीतीश कुमार राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं और ऐसे में उन्हें पता है कि फिलहाल बीजेपी और जेडीयू गठजोड़ का बिहार की राजनीति में कोई जवाब नहीं है. वहीं, पीके और बीजेपी के बीच की अदावत को सभी जानते हैं, ऐसे में सीएम नीतीश ये जरूर संकेत दे रहे हैं कि फिलहाल वे एनडीए की एकजुटता को ही तवज्जो देने जा रहे हैं.

इनपुट- आनंद अमृतराज

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First published: January 27, 2020, 2:50 PM IST
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