बिहार: रोहिणी नक्षत्र के आगाज के साथ धान बीज गिराने की तैयारी, कषि मंत्री का दावा- किसानों को घर में भी मिल जाएंगे बीज

धान का बिचड़ा गिराने की तैयारी में बिहार के किसान.

धान का बिचड़ा गिराने की तैयारी में बिहार के किसान.

Bihar News: कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बीज की आपूर्ति बिहार राज्य बीज निगम के चिन्हित बीज विक्रेताओं द्वारा की जाएगी. प्रत्येक जिले में तकरीबन 1600 से 1800 क्विंटल धान बीज के वितरण अनुदानित दर पर दिए जाएंगे.

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पटना. कोरोना संक्रमण के बीच आज से रोहिणी नक्षत्र का आगमन हो गया है जो 8 जून की सुबह 6 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इसी बीच लगभग सभी किसान धान का बीज डालने की तैयारी में हैं. लॉकडाउन में किसान बीज के लिए भटक रहे हैं जबकि राज्य सरकार ने किसानों को धान की बीज सब्सिडी पर मुहैया कराने की घोषणा कर रखी है. हैरत की बात यह है कि विभाग के पास किस वैरायटी के कितने बीज हैं या किसान बीज कहां से प्राप्त करेंगे, ऑफलाइन आवेदन करना होगा या ऑनलाइन, बीज की कीमत क्या है, इन साब बातों की विस्तृत जानकारी अबतक किसानों को कृषि विभाग की तरफ से नहीं दी गई है. ऐसे में बिहार के किसान बेहद परेशान हैं. हालांकि कृषि

रोहिणी नक्षत्र की शुरूआत होते ही किसान अपने हल लगे ट्रैक्टर और कुदाल लेकर अपने अपने खेतों में पहुंच धान की बीज डालने की तैयारी में जुट गए हैं. इन्हीं किसानों में से एक किसान मुकेश रौशन हैं. मुकेश कहते हैं कि रोहिणी नक्षत्र में ही बीज डालने की तैयारी में हैं. इनका यह भी कहना है कि हम किसानों को लेकर सरकार की उदासीन रवैये ने हमें परेशान कर रखा है. समझ नहीं आता कि धान के बीज कैसे प्राप्त करें. विभाग की तरफ से अबतक कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है.

कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया

कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने न्यूज़ 18 के सवाल पर कहा कि बीज की आपूर्ति बिहार राज्य बीज निगम के चिन्हित बीज विक्रेताओं द्वारा की जाएगी. प्रत्येक जिले में तकरीबन 1600 से 1800 क्विंटल धान बीज के वितरण अनुदानित दर पर दिए जाएंगे. जिलों में बीज विक्रेताओं को चिन्हित कर लिया गया है और उनके द्वारा राशि बिहार राज्य बीज निगम को भेजी जा चुकी है. विभाग का प्रयास है कि रोहिणी नक्षत्र में किसानों को बीज उपलब्ध करा दिया जाए.  इस साल विभाग किसानों को उनके घर पर बीज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. किसानों के द्वारा घर पर बीज प्राप्त करने के लिए आवेदन भी दिया गया है. वहीं कृषि मंत्री ने यह भी दावा किया कि प्रत्येक जिले में उर्वरक और कीटनाशी दवाओं की कोई कमी नहीं है.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

किसानों के सामने धान के बीज को लेकर उत्पन्न समस्या को लेकर जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर अमरेंद्र सिंह ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में जो किसान बिचड़ा (बीज) गिरा देते हैं उनके लिए खरीफ के साथ ही साथ रवि फसल के लिए काफी लाभदायक होता है. अलग-अलग प्रजाति के जो धान हैं वह अलग-अलग समय में तैयार होता है. जब किसान इस महीने में बिचड़ा डालेंगे तो जो 155 दिन में तैयार होने वाला धान है. वह नवंबर माह के पहले सप्ताह में कट जायेगा और समय से किसान रबी फसल की बुआई कर लेंगे. लेकिन यदि समय से किसान बिचड़ा नहीं डाल पाए तो फिर उन्हे रवि फसल के लिए भी नुकसान उठाना पड़ेगा.

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