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बिहार उपचुनाव: CM नीतीश की साख और तेजस्वी के नेतृत्व की परख

News18 Bihar
Updated: October 22, 2019, 8:44 AM IST
बिहार उपचुनाव: CM नीतीश की साख और तेजस्वी के नेतृत्व की परख
बिहार उपचुनाव में सीएम नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा दांव पर है तो तेजस्वी यादव की साख भी फंसी हुई है. (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के नेतृत्व में पूरा महागठबंधन एकजुट दिख रहा था, लेकिन इस बार यह स्थिति नहीं दिख रही है. हालांकि 5 में से 4 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर तेजस्वी ने अपना तेवर दिखाने की कोशिश की है.

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पटना. एक लोकसभा (Lok Sabha) और 5 विधानसभा (Assembly) सीटों पर उपचुनाव (By Election) संपन्न हो गए और इसके नतीजे 24 अक्टूबर को आएंगे. इन सीटों के चुनाव परिणाम क्या आएंगे इसको लेकर कयासबाजी भी शुरू हो चुकी है. हालांकि, इन  नतीजों का फिलहाल बिहार के सियासी गणित पर तो कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस परिणाम का असर वर्ष 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जरूर दिखेगा. दरअसल, इस उपचुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा है. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण बन पड़ा है, क्योंकि यहां सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की प्रतिष्ठा भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है.

CM नीतीश की साख का सवाल
दरअसल, पांच विधानसभा सीटों में से 4 पर दोनों ही नेताओं की पार्टी के बीच सीधा मुकाबला है. इनमें बांका के बेलहर, भागलपुर के नाथनगर, सीवान के दरौंदा और सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर में दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं. यह खास तौर पर सीएम नीतीश की साख का भी सवाल है, क्योंकि ये चारो ही सीटें जेडीयू के खाते में थीं और इस बार भी यहां से जेडीयू के उम्मीदवार ही मैदान में डटे हैं.

तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता की परख

लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पूरा महागठबंधन एकजुट दिख रहा था, लेकिन उपचुनाव में यह स्थिति नहीं दिख रही है. हालांकि 5 में से 4 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर तेजस्वी ने अपना तेवर दिखाने की कोशिश की है. लेकिन, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने उन्हें विपक्ष का नेता मानने से इनकार कर दिया है. यही नहीं नाथनगर से उन्होंने अपने प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतार दिए हैं. ऐसे में चुनाव नतीजों का असर तेजस्वी के साथ महागठबंधन के भविष्य पर भी पड़ेगा.

तेजस्वी को VIP ने दिखाए तेवर
यही नहीं सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में भी महागठबंधन में शामिल दो घटक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने यहां जफर आलम को प्रत्याशी बनाया है. लेकिन यहां भी महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने दिनेश यादव को चुनावी मैदान में उतार दिया.
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एनडीए में सबकुछ ठीक होने के संकेत
बीते 17 अक्टूबर को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने स्थिति साफ कर दी कि बिहार में एनडीए का चेहरा सीएम नीतीश ही होंगे. इससे गिरिराज सिंह (Giriraj Singh), सच्चिदानंद राय और संजय पासवान सहित (BJP) के ऐसे नेता खुद-ब-खुद किनारे लग गए जो सीएम नीतीश कुमार को टारगेट कर रहे थे. अब स्थिति साफ हो गई कि ऐसे नेताओं के बयानों का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व अभी सीएम नीतीश के नेतृत्व में ही आगे बढ़ना चाहता है.

बहरहाल, उपचुनाव में समस्‍तीपुर लोकसभा सीट पर LJP के प्रिंस पासवान (Prince Paswan)  और किशनगंज विधानसभा सीट (Kishanganj Assembly Seat) पर बीजेपी के स्वीटी सिंह (Sweety Singh) मैदान में हैं. बाकी चार विधानसभा सीटों पर जेडीयू के सामने कब्‍जा बरकरार रखने की चुनौती है तो तेजस्वी यादव को अपने ही उम्मीदवारों को आगे करने के फैसले को सही साबित करने का चैलेंज है.

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First published: October 22, 2019, 8:17 AM IST
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