कवि दिनकर की जयंती पर प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, उनकी याद में कही ये बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. (फाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. (फाइल फोटो)

कवि रामधारी सिंह दिनकर (Poet Ramdhari Singh Dinkar) का जन्म 1908 में बिहार के सिमरिया में हुआ था, और देशभक्ति से ओत-प्रोत उनकी कविताओं ने स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) के दौरान लोगों को प्रेरणा दी थी. रामधारी सिंह दिनकर राज्य सभा (Rajya Sabha) के तीन बार सदस्य रहे. उनका निधन 1974 में हुआ था.

  • भाषा
  • Last Updated: September 23, 2020, 1:24 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंदी जगत के महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर बुधवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, और कहा कि उनकी कालजयी कविताएं देशवासियों को प्रेरित करती रहेंगी. मोदी ने ट्वीट किया,‘राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि. उनकी कालजयी कविताएं साहित्यप्रेमियों को ही नहीं, बल्कि समस्त देशवासियों को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी.’

दिनकर का जन्म 1908 में बिहार के सिमरिया में हुआ था, और देशभक्ति से ओत-प्रोत उनकी कविताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों को प्रेरणा दी थी. रामधारी सिंह दिनकर राज्य सभा के तीन बार सदस्य रहे. उनका निधन 1974 में हुआ था.






पंडित नेहरू ने दिनकर को बताया था राष्ट्रकवि

पंडित नेहरू ने ही दिनकर जी को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पंडित नेहरू के इस काम से दिनकर की कलम ने सरकार के खिलाफ लिखना बंद कर दिया हो. राज्यसभा में कई बार ऐसे मौके आए जब दिनकर ने सरकार और पंडित नेहरू को अपनी कविताओं के माध्यम से घेरा न हो. भारत चीन युद्ध के बाद तो दिनकर नेहरू के पूरी तरह से खिलाफ हो गए थे. लेकिन वैचारिक मतभेदों के बावजूद दोनों के संबंधों में शालीनता ताउम्र रही.

रेणुका और हुंकार जैसी रचनाओं के जरिये अंग्रेजों का दिनकर ने किया विरोध

पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने बी. ए. ऑनर्स की डिग्री हासिल करने के बाद दिनकर एक स्कूल में प्रिंसिपल बन गए. 1934 में बिहार सरकार ने इन्हें सब-रजिस्ट्रार का पोस्ट ऑफर किया. जिसे इन्होंने स्वीकार कर लिया. दिनकर जी नौ साल तक इस पद पर बने रहे. अंग्रेजी हुकूमत के दिए पद के बावजूद दिनकर ने अपने कलम से अंग्रेजों को नहीं बख्शा. रेणुका और हुंकार जैसी रचनाओं के जरिये अंग्रेजों की दिनकर जी ने मुखालफत की. जल्दी ही ब्रिटिश हुकूमत को अंदाजा लग गया कि, उन्होंने गलत आदमी पर भरोसा कर लिया. इसके बाद तो नौकरी में उन्हें परेशान करने का सिलसिला ही चल निकला. दिनकर जी का चार वर्ष में 22 बार तबादला किया गया.

जेपी आंदोलन में दिनकर की कविताओं का खूब इस्तेमाल हुआ

कांग्रेस सरकार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने हजारों लोगों के समक्ष दिनकर की पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का उद्घोष करके तत्कालीन सरकार के खिलाफ विद्रोह का शंखनाद किया था.
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