बिहार: जेलों में क्षमता से ज्यादा कैद हैं मुजरिम, सीतामढ़ी कारागार में 3 गुना ज्यादा कैदी

राज्य के सबसे बडे सेंट्रल जेल बेउर की क्षमता 2360 कैदियों की है लेकिन अभी 3026 कैदी बंद हैं

Brijam Pandey | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 15, 2018, 5:13 PM IST
बिहार: जेलों में क्षमता से ज्यादा कैद हैं मुजरिम, सीतामढ़ी कारागार में 3 गुना ज्यादा कैदी
प्रतीकात्मक तस्वीर
Brijam Pandey | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 15, 2018, 5:13 PM IST
बिहार के जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं. इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत हुआ है. राज्य के सबसे बडे सेंट्रल जेल बेउर की क्षमता 2360 कैदियों की है लेकिन अभी 3026 कैदी बंद हैं. वहीं गया केंद्रीय कारा में 1478 की जगह 1830 बंदी कैद हैं. इसी तरह मोतिहारी सेंट्रल जेल में 2237 कैदी बंद है जबकि क्षमता सिर्फ 1885 कैदियों की है.पूर्णिया केंद्रीय कारा में 890 कैदियों की क्षमता है लेकिन 1378 बंद है.

ये हाल सिर्फ केंद्रीय काराओं का ही नहीं है. जिला के जेलों में तो दुगने से अधिक कैदी बंद है. जिला जेल बेतिया में जेल की क्षमता 623 कैदियों की है लेकिन यहां 1151 कैदी बंद हैं. सीतामढ़ी जेल की तो हालत सबसे ज्यादा खराब है. इस जेल की क्षमता 286 कैदियों की लेकिन यहां तिगुना से ज्यादा 1017 कैदी बंद हैं. नवादा में जेल की क्षमता 218 है लेकिन कैदी 644 है.

इसी तरह छपरा जेल में कैदियों को रखने की क्षमता 674 है लेकिन कैदी हैं 1022 जबकि औरंगाबाद जेल की क्षमता 309 कैदियों की है लेकिन अभी 822 कैदी बंद हैं. इसी तरह गोपालगंज जेल की क्षमता 550 की है और कुल 718 कैदी बंद है.

आरटीआई कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय का कहना है कि जेलों में पशुओं सा व्यवहार हो रहा है. इसको लेकर मानवाधिकार आयोग को संज्ञान लेना चाहिए. कैदियों की भीड़ जेल में हाल के दिनों में बढ़ी है. जाहिर है शराबबंदी के तहत काफी संख्या में लोग जेल गए है. लेकिन इस मुताबिक जेल की क्षमता नहीं बढ़ी हैं.
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