Coronavirus: जेल में बंद कैदियों को पैरोल पर छोड़ने की कवायद तेज, विभाग ने बनाई लिस्ट
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Coronavirus: जेल में बंद कैदियों को पैरोल पर छोड़ने की कवायद तेज, विभाग ने बनाई लिस्ट
पटना का बेउर जेल (फाइल फोटो)

कोरोना (Coronaviurs) के कारण आई इस स्थिति के लिए जेलो में सात और दस साल की सजा काट चुके कैदियों की सूची लगभग तैयार है. गृह विभाग से अधिसूचना जारी होते ही इन्हें रिहा करना शुरू कर दिया जाएगा. हालांकि पैरोल (Parole) पर रिहा होने में कैदियों के लिए स्थानीय थाने की रिपोर्ट मायने रखेगी.

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रिपोर्ट- संजय कुमार

पटना. कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण को रोकने और जेलों में ह्यूमन डिस्टेंसिंग (Human Distancing) बनाये रखने के लिए कैदियों की भीड़ को कम करने की कोशिशें तेज कर दी गई है. कारा विभाग सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों को पैरोल (Parole) पर रिहा करने का संकेत मिलते ही सूबे की जेलों में भीड़ कम करने की कोशिशों में जुट गया है.

विशेष कमेटी का गठन



बिहार में कारा विभाग द्वारा मुख्यालय स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है. यह कमेटी जेलों में बंद सजावार कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के बारे में अंतिम तौर पर फैसला लेगी. बिहार के सभी जेलों को को ऐसे कैदियों की सूची बनाने को कहा गया है. अनुमात: सात वर्ष से अधिक की सजा काट चुके कैदियों की संख्या 450 से अधिक हो सकती है. सूबे के सबसे बड़े बेउर जेल में फिलहाल साढ़े चार हज़ार से अधिक कैदी बंद हैं.



पटना के बेउर जेल में हैं क्षमता से अधिक कैदी

बेउर जेल के क्षेत्रफल को देखते हुए कोरोना के संक्रमण को रोकना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. बेउर जेल में सजावार कैदियों की संख्या तो लगभग 1400 है लेकिन विचाराधीन कैदियों की संख्या काफी बहुत है. यहां साढ़े चार हजार कैदियों में 3 हज़ार से अधिक विचाराधीन कैदी हैं. वैसे देखा जाए तो बेउर जेल की क्षमता भी 3000 से 3200 कैदियों के रखने तक ही सीमित है. सात से दस साल तक सजा काट चुके कैदियों को अगर पैरोल पर छोड़ने का फैसला हुआ तो फिजिकल डिस्टेंसिंग को काफी हद तक मेंटेन किया जा सकता है.

सात और दस साल की सजा काट चुके बंदियों की सूची तैयार

जेलो में सात और दस साल की सजा काट चुके कैदियों की सूची लगभग तैयार है. गृह विभाग से अधिसूचना जारी होते ही इन्हें रिहा करना शुरू कर दिया जाएगा. हालांकि पैरोल पर रिहा होने में कैदियों के लिए स्थानीय थाने की रिपोर्ट और बतौर कैदी जेल में उनका व्यवहार कैसा रहा है, यह काफी मायने रखेगा. ऐसे कैदी जो जेल में रहकर भी बाहर अपराध में इन्वॉल्व रहे है उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा. जेल आइंजी मिथलेश मिश्र की पहल पर बिहार के सभी जेल प्रशासन ने कैदियों से मुलाकात की व्यवस्था में नायाब तरीका अपनाया है.

मुलाकात के भी बदल गए हैं तरीके

जेल मैन्युअल के अनुसार जेल के कैदियों को अपने स्वजनों से बात करने के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि कैदियों के परिजनों के नंबर का कन्फर्मेशन अब थानेदार नहीं बल्कि जेल सेवा से जुड़े परिक्षयमान अधिकारी कर सकेंगे. कोरोना संकट को देखते हुए फिलहाल कैदियों की परिजनों से मुलाकात पर रोक है इसके विकल्प के रूप में जेल प्रशासन ने ई मुलाकात यानी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए मुलाकात की व्यवस्था की है. इसके अलावा परिजनों की कैदियों से फोन पर बातचीत की भी सुविधा मिल सकेगी.

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