बिहार: छोटी पार्टियों के विलय प्रस्ताव पर RJD एकमत नहीं, मौका ढूंढ रही कांग्रेस

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश सिंह विलय के प्रस्ताव के समर्थन में हैं. वे कहते हैं, भाजपा को चुनौती देने के लिये छोटे दलों के बड़ी पार्टियों में विलय समय की जरूरत है. जबकि उनकी पार्टी में ही इस बात को लेकर मतभेद है.

News18 Bihar
Updated: June 8, 2019, 11:43 PM IST
बिहार: छोटी पार्टियों के विलय प्रस्ताव पर RJD एकमत नहीं, मौका ढूंढ रही कांग्रेस
विलय प्रस्ताव पर महागठबंधन में अलग सुर
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Updated: June 8, 2019, 11:43 PM IST
लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद महागठबंधन के छोटे दलों के आपसी विलय की चर्चा ने जोर पकड़ा है. कांग्रेस ने तो खुलकर कहा कि छोटी पार्टियों का बड़े दलों में विलय हो जाना चाहिए. शुरुआत में आरजेडी ने भी यही बात कही, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है और नई रणनीतियों पर बातचीत आगे बढ़ रही है. कई पार्टियां विलय के प्रस्ताव पर एकमत नहीं है. यहां तक कि आरजेडी जैसी पार्टियों में अलग-अलग नेताओं के अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं.

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश सिंह विलय के प्रस्ताव के समर्थन में हैं. वे कहते हैं कि भाजपा को चुनौती देने के लिए छोटे दलों के बड़ी पार्टियों में विलय समय की जरूरत है.

हालांकि विलय प्रस्ताव पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं, 'मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने आखिरकार इस तरह का बयान किस मकसद से दिया?'

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शिवानंद तिवारी कहते हैं कि यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं लगता है. आखिर कोई भी पार्टी अपना ही अस्तित्व क्यों खोना चाहेगी?  मौजूदा परिस्थितियों में छोटे दलों का बड़े दलो में विलय का प्रस्ताव व्यवहारिकता से कोसों दूर है.

वहीं कांग्रेस चाहती है कि छोटी पार्टियों विलय उसमें हो जाए. वह इसके पक्ष में पुरजोर तरीके से अपना तर्क पेश कर रही है. पार्टी प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा कहते हैं, आज की जो परिस्थितियां हैं इसके अनुसार छोटे दलों को जरूर सोचना चाहिए. उनके पास मजबूत संगठनों का अभाव है. वक्त पर उन्हें कैंडिडेट्स तक उपलब्ध नहीं होते हैं.

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बकौल प्रेमचंद्र मिश्रा, आज जिस तरह से छोटी पार्टियों का जनाधार इस चुनाव में सिकुड़ा है और वे दल औंधे मुंह गिरे हैं, इससे उनके पास विकल्प भी क्या है? अच्छा तो यह हो कि ये एक सिंबल पर लड़ने को राजी हों, जिससे गठबंधन का भी स्वरूप मजबूत हो.

वहीं बीजेपी महागठबंधन दलों के इस अंतर्विरोध को अपने लिए वरदान मान रहा है. पार्टी के सांसद रामकृपाल यादव कहते हैं, पहले तो ये विलय संभव नहीं है. अगर ये लोग आपस में  मिल भी जाएं तो  भी एनडीए के लिए कोई चुनौती खड़ी नहीं कर सकते.

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बहरहाल महागठबंधन में शामिल छोटे दलों के बड़े दलों में मर्जर की बात जिस तरीके से बहस का मुद्दा बन गई है ऐसे में इस प्रस्ताव पर आगे क्या राजनीतिक हालात बनते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में है. लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि महागठबंधन के दलों के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर जिस तरह का अंतर्विरोध है, इससे विलय के मुद्दे पर आगे बढ़ पाना फिलहाल मुश्किल ही लग रहा है.

रिपोर्ट- संजय कुमार

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First published: June 8, 2019, 3:27 PM IST
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