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    Bihar Election: क्‍या लंदन से बिहार बदलने आई 'ब्लैक ड्रेस' वाली पुष्पम प्रिया चौधरी हो पाएंगी कामयाब?

    बिहार की राजनीति में पुष्पम प्रिया चौधरी की एंट्री बड़े धमाकेदार अंदाज में हुई थी.
    बिहार की राजनीति में पुष्पम प्रिया चौधरी की एंट्री बड़े धमाकेदार अंदाज में हुई थी.

    Bihar Assembly Elections: 2020 बिहार की राजनीति में पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Chaudhary) की एंट्री बड़े धमाकेदार अंदाज में हुई थी. इसी साल 8 जनवरी को बिहार के समाचार पत्रों में दिए विज्ञापन में चौधरी ने बिहार की जनता के नाम एक खुला पत्र में अपने आपको मुख्यमंत्री प्रत्‍याशी (CM Candidate) बताया था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 29, 2020, 9:53 PM IST
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    पटना. Bihar Assembly Elections: 2020 बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है. दूसरे और तीसरे चरण के मतदान के लिए एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच कशमकश जारी है. इस बार का बिहार चुनाव कई मायने में एतिहासिक होने जा रहा है. बिहार के राजनीतिक इतिहास में शायद यह पहला मौका है, जब सीएम कैंडिडेट के लिए पांच-पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. मौजूदा मख्यमंत्री और एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar), महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) आरएलएसपी-बीएसपी-एआईएमआईएम (RLSP-BSP-AIMIM) गठबंधन से उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kuswaha), जन अधिकार पार्टी (Jan Adhikar Party) के संरक्षक और पूर्व सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) के साथ-साथ द प्लुरल्स पार्टी (The Plurals Party) की पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Chaudhary) पर भी सबकी निगाहें हैं. इन नामों में देखें तो सिर्फ पुष्पम प्रिया चौधरी ही नई उम्मीदवार हैं.

    पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार की राजनीति में कितना फिट बैठेंगी?
    बिहार की राजनीति में पुष्पम प्रिया चौधरी की एंट्री बड़े धमाकेदार अंदाज में हुई थी. इसी साल 8 जनवरी को पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार के समाचार पत्रों में दिए विज्ञापन में बिहार की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा था. इस विज्ञापन में उन्‍होंने अपने आपको मुख्यमंत्री प्रत्‍याशी बताया था और उन्होंने जनता से अपील की थी कि उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की यह गारंटी पत्र है. चौधरी की इसके बाद से ही चर्चा शुरू होने लगी. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस चुनाव में पुष्पम प्रिया चौधरी की सियासी जमीन कितनी मजबूत है?

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    एनडीए के सीएम कैंडिडेट नीतीश कुमार को पुष्पम कितना नुकसान पहुंचा रही हैं?




    1. बिहार चुनाव में कितना प्रभाव छोड़ पाएगी?
      पुष्पम विदेश में शिक्षा प्राप्त की और वहीं कुछ सालों तक नौकरी करने के बाद राजनीति में कदम रखी है. चौधरी अब बिहार की तस्वीर बदलना चाहती हैं. इस चुनाव में पुष्पम प्रिया चौधरी बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं. बीते 8-9 महीनों से चौधरी पूरे बिहार का दौरा कर रही हैं. पुष्पम जेडीयू नेता और विधान पार्षद विनोद चौधरी की बेटी हैं. मुजफ्फरपुर, दरभंगा और आस-पास के इलाकों में पुष्पम ठीक-ठाक प्रभाव डाल सकती हैं. भूमिहार और ब्राह्मण जाति की इस इलाके में ठीक-ठाक दबदबा है. हालांकि, पुष्पम जात-पात की राजनीति से ऊपर उठ कर बिहार की विकास की बात करती हैं.


    क्यों चर्चा में रहती है?
    बीते मंगलवार शाम को भी प्लूरल्स पार्टी की चीफ उस समय चर्चा में आई थी जब उनको पटना पुलिस ने हिरासत में लिया था. पुष्पम प्रिया राजभवन में समर्थकों के साथ घेराबंदी करने जा रही थी. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. चौधरी पर बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने पर पुलिस ने हिरासत में लिया था. इस घटना के बाद पुष्पम बेहद आहत दिखीं. उन्होंने अपने गुस्से का इजहार सीएम नीतीश कुमार पर ट्वीट कर निकाला.

    बिहार चुनाव के बाद पुष्पम की राजनीति किस करवट लेगी?
    बिहार चुनाव के बाद पुष्पम की राजनीति किस करवट लेगी?


    किस विजन पर राजनीति करने आई
    चौधरी मीडिया से बातचीत में अक्सर कहती हैं, ‘मैं बिहार में पैदा हुई हूं और यहां की बेटी हूं. विदेश में पढ़ाई के दौरान बिहार ही मेरा रिसर्च एरिया भी रहा है. बीते 15 सालों में बिहार सरकार ने जो नीतियां बनाई है उसको गहनता से अध्ययन कर मैं राजनीति में आई हूं. ये नीतियां क्यों फेल हुई इसको लेकर भी हमने रिसर्च किया है. मुझे तब बुरा लगता है जब विदेशों में किसी नाकाम ये फेल हुई पॉलिसी को लेकर बिहार का उदाहरण दिया जाता है. इसलिए मैंने लाखों की पैकेज छोड़ कर जनता की भलाई के लिए आई हूं. मुझे लगता है कि मैं बिहार की गरीबी और आर्थिक स्थिति को अच्छी तरह से समझती हूं और इसे ठीक कर सकती हूं.

    क्या कहते हैं जानकार
    राजनीतिक विश्लेषक संजीव पांडेय कहते हैं, ‘प्लूरल्स पार्टी की एंट्री के बाद बिहार में वोटों का समीकरण बदल गया है. लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल कर कोई लड़की अगर बिहार की राजनीति में एंट्री लेती है तो यह सधारण बात नहीं है. बेशक इस चुनाव में चौधरी को सफलता हाथ न लगे, लेकिन उसके भविष्य की राजनीति के लिए यह चुनाव वरदान साबित होगा. मतदाताओं का नब्ज उसने पकड़ लिया है. 80 लाख नौकरियां देने का वायदा किया है. अगले 10 वर्षों में राज्य के विकास के लिए एक मास्टर प्लान भी उसके पास है. मुझे लगता है कि आज न कल जनता इसको समझने लगेगी.’

    क्या है प्लुरल्स का बिहार के लिए एजेंडा
    बता दें कि बिहार चुनाव से पहले ही पुष्पम ने राज्य को 8 विकास क्षेत्रों में विभाजित किया था. पाटलिपुत्र, आंग, मगध, चंपारण, मिथिला, कौशिकी, कैमूर और वैशाली. साथ ही सभी 38 जिलों को 8 भूमि एक्सप्रेसवे और आठ-लेन माल परिवहन गलियारे से जोड़ने का प्लान तैयार किया. राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आठ वैश्विक पर्यटन केंद्र विकसित करने का भी वायदा किया था. राज्य में कृषि को एक उद्योग का दर्जा देने का और किसानों को गारंटी ऋण और न्यूनतम बिक्री मूल्य देने का भी वायदा किया है. प्रत्येक क्षेत्र में बाढ़ और सिंचाई की व्यवस्था के साथ-साथ गंगा, सोन, कोसी, महानंदा, बागमती, फल्गु जैसी नदियों को आपस में जोड़ने का भी प्लान तैयार किया.

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    बिहार चुनाव से पहले ही पुष्पम ने राज्य को 8 विकास क्षेत्रों में विभाजित किया था.


    प्लुरल्स का घोषणा पत्र दूसरे से कितना अलग?
    इसी तरह शिक्षा सहित कई क्षेत्रों के लिए पुष्पम के पास एक आइडिया है. वार्ड से लेकर पंचायत तक विकास का एक नया मॉडल तैयार कर रखा है. मॉडल स्कूल, मॉडल अस्पताल, मॉडल लाइब्रेरी, मॉडल बस शेड, मॉडल मार्केट, मॉडल लाइब्रेरी परिसर, मॉडल पार्क, सामुदायिक केंद्र, स्टेडियम और योग संस्थानों को लेकर आइडिया है.

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    महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए भी पुष्पम ने एक ब्लू प्रिंट तैयार कर रखा है. प्लुरल्स के विजन डॉक्यूमेंट्स में राज्य के प्रत्येक बीपीएल परिवार में एक महिला को नौकरी देने, हर बीपीएल परिवार के लिए तीन कमरों का घर और उन्हें पांच साल के लिए मुफ्त राशन, मुफ्त चिकित्सा और मुफ्त शिक्षा भी देने का वायदा किया है.
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