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तेजस्वी यादव की काबिलियत पर उठ रहे सवाल, पढ़ें RJD का जवाब

लालू यादव की गैरमौजूदगी में तेजस्वी यादव ही आरजेडी के नेता माने जाते हैं.

लालू यादव की गैरमौजूदगी में तेजस्वी यादव ही आरजेडी के नेता माने जाते हैं.

बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद की मानें तो तेजस्वी पर आरजेडी का इस तरह से दांव लगाना उनकी पार्टी के लिए न सिर्फ घाटे का सौदा साबित होगा बल्कि असफल तेजस्वी पार्टी की लुटिया भी डुबो देंगे.

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पटना. तेजस्वी यादव आरजेडी के वो सेनापति हैं जिनके भरोसे लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की पार्टी आरजेडी 2020 की वैतरणी पार करने के सपने देख रही है. लालू की गैरहाजिरी में यक़ीनन तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) का कद पार्टी के बाकी नेताओं से कहीं ऊपर है. यही कारण है कि पार्टी तेजस्वी को अपना नेता भी मानती है. अगर 2020 में आरजेडी (RJD) के गठबंधन वाली सरकार बिहार में बनती है तो यकीनन आरजेडी का मुख्यमंत्री तेजस्वी ही होंगे, लेकिन विरोधी पार्टियां तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनना तो दूर उनकी काबिलियत और उनके नेतृत्व पर ही अब सवाल उठाने लगी हैं.

तेजस्वी के नेतृत्व पर सवाल
बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद की मानें तो तेजस्वी पर आरजेडी का इस तरह से दांव लगाना उनकी पार्टी के लिए न सिर्फ घाटे का सौदा साबित होगा बल्कि असफल तेजस्वी पार्टी की लुटिया भी डूबो देंगे. निखिल आनंद कहते हैं कि तेजस्वी की 2020 के चुनाव में वैसी ही हालत होनेवाली है जैसी 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में पार्टी का सूपड़ा तक साफ हो गया था.

लिटमस टेस्ट में फेल हुए तेजस्वी
विरोधियों के इस हमले और तेजस्वी पर तंज कसने के पीछे कुछ वजह भी है. दरअसल तेजस्वी की राजनीति में वैसे तो लांचिंग 2015 में हुई, लेकिन उनकी काबिलियत और दमखम का असली लिटमस टेस्ट 2019 में ही हुआ था.

अलग-अलग मोर्चों पर असफल रहे तेजस्वी!
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय की मानें तो चारा घोटाला मामले में लालू के जेल जाने के बाद लालू ने उनपर भरोसा करके पार्टी की पूरी कमान तो उन्हें सौंप दी, लेकिन तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से फ्लॉप हो गई. यही नहीं आरजेडी के इतिहास में पहली बार लालू की पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया.

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़े गए लोकसभा चुनाव में आरजेडी को करारी शिकस्त मिली.


रवि उपाध्याय कहते हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी न तो अपने भाई तेजप्रताप को ही साथ रख सके और न ही महागठबंधन की एकजुटता ही बरकरार रख सके. तेजस्वी यक़ीनन हर मोर्चे पर असफल ही साबित होते रहे हैं. यही कारण है अब तो गठबंधन से लेकर पार्टी के बड़े नेता भी उनपर सवाल उठाने लगे हैं.

रघुवंश की चिट्ठी ने तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ा दीं
ये बात कुछ हद तक सही भी है तभी तो आरजेडी के सबसे बड़े नेताओं में से एक रघुवंश प्रसाद सिंह को चिट्ठी लिखकर लालू यादव को शिकायत तक करनी पड़ी. जानकार भी मानते हैं कि रघुवंश प्रसाद की चिट्ठी ने तेजस्वी के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है.

दरअसल आज आरजेडी के दो बड़े नेता या यह कह लीजिए लालू के दो संकटमोचक जिस तरह से आमने-सामने खड़े हैं और तेजस्वी इन्हें संभाल भी नहीं पा रहे हैं, पार्टी के भीतर और बाहर इस बात को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या तेजस्वी पार्टी के अपने बड़े नेताओं को साथ लेकर चलने में नाकाम साबित हो रहे हैं?

आरजेडी के सीनियर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पार्टी में अनुशासन के नाम पर सख्ती से नाराज बताए जाते हैं.


विरोधी तेजस्वी की कुछ इन्हीं कमियों को लेकर उनपर तंज कस रहे हैं तो आरजेडी को अब अपने सेनापति पर पूरा भरोसा है. आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहते हैं कि जिन्हें हमारे नेता की काबिलियत पर थोड़ी सी भी शंका है तो वो विधानसभा चुनाव का इंतजार कर लेंं. 2020 में तेजस्वी यादव की ताकत का उन्हें बखूबी अंदाजा हो जाएगा. वैसे भी झारखंड में सबने झांकी देखी है अब बिहार की बारी है.

2020 चुनाव तेजस्वी के लिए अग्निपरीक्षा
आरजेडी के इस दावे और तेजस्वी पर उनका भरोसा 2020 में कितना कारगर साबित होता है ये तो समय और तब के चुनाव के नतीजे से पता चलेगा, लेकिन तेजस्वी के नेतृत्व को लेकर जिस तरह से पार्टी के अंदर और बाहर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं उनके लिए 2020 का चुनाव यक़ीनन एक अग्निपरीक्षा होगी.

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