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रघुवंश प्रसाद ने ऐसा क्यों कहा- केवल सीट बढ़ाने की पॉलिटिक्स करते हैं मांझी और कुशवाहा?

रघुवंश प्रसाद सिंह की कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई (फाइल फोटो)

रघुवंश प्रसाद सिंह की कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई (फाइल फोटो)

राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) ने सहयोगी जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को नसीहत देते हुए कहा है कि आपस में बयानबाजी करने के बजाए हमारे साथ बीजेपी से लड़ने की रणनीति बनाएं

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पटना. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रमी लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के संकटमोचक कहे जाने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) ने अपने सहयोगियों को दो टूक में कह दिया है तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री के चेहरा हैं और आगे भी रहेंगे. दरअसल, महागठबंधन में दो फाड़ हो चुका है और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को किसी कीमत पर मांझी और कुशवाहा अपना नेता मानने को तैयार नहीं हैं. लेकिन आरजेडी डंके की चोट पर एलान कर रहा है कि तेजस्वी ही मुख्यमंत्री के चेहरा हैं और आगे भी रहेंगे.

राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने सहयोगी जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को नसीहत देते हुए कहा है कि आपस में बयानबाजी करने के बजाए हमारे साथ बीजेपी से लड़ने की रणनीति बनाएं. उन्होंने कहा कि जब यह पहले ही तय हो चुका है कि महागठबंधन की तरफ से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री के चेहरा होंगे तो भला इसको लेकर किसी को कन्फ्यूजन क्यों है?  यही नहीं रघुवंश प्रसाद ने ये भी कहा कि आरजेडी के भीतर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने पर 5-5 बार प्रस्ताव पारित हो चुका है.

क्या अपनी सीट बढ़ाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स करते हैं?
जब रघुवंश प्रसाद सिंह से पूछा गया कि क्या केवल अपनी सीट बढ़ाने के लिए प्रेशर पॉलिटिक्स करते हैं मांझी और कुशवाहा, तो इस पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि केवल चुनाव में अपनी सीटों को बढ़ाने के लिए ये नेता कुछ-कुछ बयानबाजी करते रहते हैं. जबकि आज बिहार की जनता ने तय कर लिया है कि तेजस्वी यादव को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाना है. वैसे भी नेता वही होता है जिसके पास वोट होता जो तेजस्वी के पास है. केवल चेहरा देखकर नेता नहीं चुना जाता है. इस दौरान रघुवंश प्रसाद ने इशारों- इशारों में जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को ये भी बता दिया कि अगर वो मुख्यमंत्री का ख्वाब देख रहे हैं तो उसे छोड़ दें क्योंकि उनके पास जनता का वोट नहीं है.

रघुवंश प्रसाद का यह बयान इसलिए भी आया है कि कल तेजस्वी के आंदोलन पर जीतनराम मांझी और कुशवाहा ने सवाल उठाया था. जीतनराम मांझी ने तेजस्वी पर यह भी आरोप लगाया है कि वो जाति और अपनी राजनीति देखकर ही आंदोलन किया करते हैं. रघुवंश प्रसाद सिंह चूंकि आरजेडी के फायर ब्रांड नेता हैं इसलिए लालू यादव के कहने पर उन्होंने मोर्चा संभाल लिया है.

लालू के एक इशारे पर रघुवंश प्रसाद हो गए एक्टिव
गोपालगंज ट्रिपल मर्डर मामले को लेकर राबड़ी आवास के बाहर जिस तरह का हंगामा हुआ उसे किसी ने भी सही नहीं ठहराया. विरोधी तो विरोधी पार्टी के अंदर भी लोगों ने दबे जुबान से इसका विरोध किया. फिर लॉकडाउन में सोशल डिस्टनसिंग की जो धज्जियां उड़ाई गईं वो बेहद खतरनाक भी था. खुद रघुवंश प्रसाद सिंह भी इस पूरे हंगामे को लेकर नाराज थे. यही कारण था कि वो इस आंदोलन में शामिल भी नहीं हुए लेकिन जब लालू यादव यानि उनके दोस्त का एक इशारा हुआ तो फिर उनके संकटमोचक मैदान में कूद पड़े और जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को दो टूक में जवाब भी दे दिया. ऐसे भी रघुवंश प्रसाद पर लालू यादव आंख बंद कर के भी विश्वास करते हैं तभी तो उन्हें लालू और उनकी पार्टी संकटमोचक कहते हैं.

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