यादें: अब नहीं गूंजेगा 'नीचे धरती, ऊपर आसमान हर तरफ रामविलास पासवान'

पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में हुआ था.
पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में हुआ था.

Ram Vilas Paswan Death: दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोदी मंत्रिमंडल के कद्दावर मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे, लेकिन उनकी कई यादें उनके जाने के बाद भी याद आती रहेंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 6:18 AM IST
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नई दिल्ली. 90 के दशक में पहली बार एक छात्र के तौर पर रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की सभा में जाने का मौका मिला था. रामविलास पासवान पूरे बिहार में दलित चेतना यात्रा पर निकले थे. इसी दौरान पासवान का रथ बेगूसराय के ताराबरियारपुर इलाके में पहुंचा. पासवान के आने का लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. मुझे याद है कि शाम 6 बजे पासवान का पहुंचने का कार्यक्रम था, लेकिन वह तकरीबन 9 बजे रात में पहुंचे थे. इसके बावजूद भी लोगोंं के जोश में कमी आने का नाम नहीं ले रहा था. उस सभा में सीपीआई नेता और बेगूसराय के पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह भी मौजूद थे. सभा में हर तरफ एक नारा गूंज रहा था 'नीचे धरती, ऊपर आसमान हर तरफ रामविलास पासवान'. दलित और बिहार के बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोदी मंत्रिमंडल के कद्दावर मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे, लेकिन उनकी कई यादें उनके जाने के बाद भी याद आती रहेंगी. आइए जानते हैं रामविलास पासवान से जुड़ी यादें, जिन्हें बहुत कम लोगों को पता है.

लालू यादव ने कभी कहा था- ऊपर आसामन, नीचे पासवान
नीचे धरती, ऊपर आसमां हर तरफ रामविलास रामविलास पासवान' नारे के पीछे भी एक कहानी है. पटना के गांधी मैदान में लालू यादव एक रैली कर रहे थे. तब लालू प्रसाद यादव और पासवान एक साथ थे. इस रैली में रामविलास पासवान को आने का निमंत्रण दिया गया. जब लालू मंच से भाषण दे रहे थे, तभी रामविलास पासवान का हेलिकॉप्टर लैंड करने लगा. सभा में मौजूद सभी लोगों की निगाहें हेलिकॉप्टर पर अटक गईं. तभी लालू प्रसाद यादव ने कहा, ऊपर आसमान, नीचे पासवान. बाद में लोगों ने इस नारा को 'नीचे धरती, ऊपर आसमान हर तरफ रामविलास रामविलास पासवान' कर दिया. यह नारा उस समय खूब चर्चित हुआ था.

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पासवान के नाम कई रिकॉर्ड्स


बता दें कि रामविलास पासवान पिछले कई दिनों से दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे थे. पासवान की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई थी. बुधवार को भी डॉक्टरों ने उनका एक छोटा सा ऑपरेशन किया था. पासवान की स्थिति सुधरने पर चैन्नई ले जाने की बात चल ही रही थी तभी खबर आई की पासवान अब नहीं रहे. साल 2017 में भी पासवान की हालत बिगड़ गई थी, लेकिन विदेश में इलाज कराने के बाद वह ठीक हो गए थे. एक पत्रकार होने के नाते पिछले 7 सालों से पासवान को बेहद करीब से जाना. उनके बोलने से लेकर उनके खाने की ठेठ बिहारी गवई अंदाज उनके जाने तक भी उनसे नहीं छुटा. पासवान के नाम के आगे कई उपल्बधियां जुड़ी हैं. हाजीपुर संसदीय सीट से जीत कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने से लेकर देश के 6-6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव.

6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव
रामविलास पासवान पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच डी देवगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी और मौजादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी काम किया. पासवान के नाम के साथ एक और रिकॉर्ड है, जिसे शायद ही लोग जानते हों. मौजूदा दौर में पासावन से सीरियर राजनीति में सिर्फ दो ही नेता हैं, जो जीवित हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ही पासवान से राजनीति में वरिष्ठ हैं, लेकिन दोनों सक्रिय राजनीति से किनारे कर चुके हैं. जबकि, पासवान अभी तक राजनीति में सक्रिय ही नहीं थे, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाने वाले थे.

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6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनुभव.


बिहार के सबसे बड़े कद्दावर दलित नेता, जिसकी हर जाति में सम्मान
अगर बिहार के आम नागरिक की हैसियत से रामविलास पासवान को समझें तो उनकी बिहार के हर जाति में एक अलग ही पैठ थी. दलित समाज से आने के बाद भी वह सवर्णों में भी उतने ही लोकप्रिय थे, जितने दलित में थे. साल 2018 में रामविलास पासवान ने कहा था कि मैं दलित की राजनीति जरूर करता हूं, लेकिन बिहार में दलितों से ज्यादा सवर्णों ने मुझे सम्मान दिया.

12 जनपथ का बंगला और उसके साथ भी जुड़ा रिकॉर्ड
बता दें कि बिहार के किसी भी जाति और वर्ग के लिए उनका 12 जनपथ का बंगला हमेशा खुला रहता था. इस बंगले के साथ भी पासवान का पुराना रिकॉर्ड जुड़ा है. एलेजेपी के एक नेता के मुताबिक देश के किसी भी राजनेता ने 41 सालों तक एक बंगला में इतना लंबा समय नहीं बिताया, जितना पासवान ने 12 जनपथ में बिताया. साल 1989 में यह बंगला पासवान के नाम पर आवंटित की गई थी. तब से अब तक यह बंगला पासवान के नाम ही है. कई बार तो ऐसा भी हुआ जब यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी अपना बंगला 10 जनपथ से पैदल ही रामविलास पासवान के बंगले 12 जनपथ पहुंची थीं.

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रामविलास पासवान ने दो शादियां की थीं,


कौन करेगा भरपाई?
कुलमिलाकर कहें तो पासवान के निधन से बिहार को बहुत बड़ी क्षति हुई है. बिहार की राजनीति में फिलहाल पासवान के कद का कोई बड़ा नेता केंद्र की राजनीति में सक्रिय नहीं है. पिछले साल ही उन्‍होंने चुनावी राजनीति में 50 वर्ष पूरे किए थे. पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में हुआ था. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1969 में बिहार के डीएसपी के तौर पर चुने गए थे, लेकिन उन्होंने राजनीति में जाने का फैसला किया. 1969 में पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से विधायक बने.
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