पशुपति-चिराग पासवान के बीच जंग जारी, सामने आया रामविलास की पहली पत्नी का बयान

रामविलास के बाद परिवार में मचे सियासी संग्राम से टूट गईं राजकुमारी.

1960 का दशक जब राजकुमारी देवी से उनका विवाह हुआ था, लेकिन 2014 में ये कहकर चौंका दिया था कि उन्होंने 1981 में लोकसभा के नामांकन पत्र को चुनौती दिए जाने के बाद उन्होंने तलाक दे दिया था. उनके जाने के बाद परिवार के भीतर सियासी लड़ाई पर वह भावुक हैं और परिवार को एक होकर रामविलास की बनाई पार्टी को बचाने की बात कही है.

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पटना. देश के चंद चुनिंदा राजनीतिक परिवारों में से एक रामविलास पासवान ( Ram Vilas Paswan ) के परिवार में संग्राम छिड़ा है. कह सकते हैं कि पासवान परिवार परिवारवाद से निकल नहीं पाया. तब जब रामविलास इस दुनिया में थे और अब जब वे दुनिया छोड़ चुके हैं तो उनका पूरा परिवार बिखर गया है. रामविलास ने दलितों और पिछड़ों को आधार दिलाया था. खगडिय़ा की पगडंडी को पकडक़र दिल्ली की राजनीति में अपना मुकाम तलाशा ही नहीं बल्कि साबित कर दिखाया. कारण यही है कि पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंम्हा राव ने रामविलास पासवान में भविष्य की पनपती राजनीति को देखा था और कई बार उन्होंने इसकी चर्चा भी की थी. जयप्रकाश नारायण ने भी रामविलास के भीतर वो राजनीतिक चमक देखी थी.

1960 का दशक जब राजकुमारी देवी से उनका विवाह हुआ था, लेकिन 2014 में ये कहकर चौंका दिया था कि उन्होंने 1981 में लोकसभा के नामांकन पत्र को चुनौती दिए जाने के बाद उन्होंने तलाक दे दिया था. तब तक उनकी दो बेटियां इस दुनिया में आ चुकी थीं और तबतक रामविलास रीना शर्मा के हो चुके थे. बाद में रीना और रामविलास से एक बेटा और एक बेटी जन्म ले चुकी थी, लेकिन बातों के साथ राजकुमारी देवी ने उन्हें कागज के पन्नों में तलाक की बात को कभी नहीं माना. घर के दरवाजे पर रामविलास की तस्वीर और उनकी यादों को उन्होंने आजतक संजोए रखा है.

रामविलास पासवान के जाने के बाद सियासी उठापटक और पारिवारिक मनमुटाव की खबरों से राजकुमारी फिर टूट गयीं. रामविलास पासवान को यादकर भावुक हो गयीं. खराब तबीयत के बावजूद परिवार को समझाने के लिए न्यूज 18 का सहारा लेकर उन्होंने अपने मन की बात कह दी.

प्रश्न- परिवार में उठापटक के बीच परिवार बचेगी या पार्टी ?

उत्तर- पहले परिवार बचेगा तभी तो पार्टी बचेगी, पार्टी बचाना है और परिवार दोनों को. सबके मिलके बात करना होगा.

प्रश्न- चिराग का आपके साथ कैसा व्यवहार रहा ?

उत्तर- हम फोन किए थे चिराग ने फोन नहीं किया. यहां चिराग कभी आए नहीं और हम भी नहीं गए. करनी करेंगे चिराग को हम मानेंगे ही.

प्रश्न- परिवार के अलगाव पर क्या कहेंगी

उत्तर- सब चचा भतीजा मिलकर पार्टी मिलकर चलाएं. भाई बहन सब मिलकर चलाएं पार्टी को.

प्रश्न- चिराग से नहीं मिले पारस.

उत्तर- पार्टी जब पारस बचाएं हैं तो परिवार भी बचाएं...सबको लेकर चलें परिवार बचाएं

प्रश्न- चिराग परेशान हैं, कि परिवार में क्या हो गया

उत्तर- चिराग बेटा हैं . पारस देवर हैं. इसमें लड़ाई की क्या बात है. पारस से बात होगी कि क्यों गेट नहीं खुला चिराग के लिए.

प्रश्न- कितना दुख है पारिवारिक विवाद को लेकर.

उत्तर- बहुत दुख है...कभी नहीं सोचा था कि ये दिन देखना होगा.

प्रश्न- चिराग और पशुपति पारस के संबंध कैसे हैं.

उत्तर- मनमुटाव है. एक दूसरे से खुश नहीं हैं. चुनाव में पशुपति पारस को नहीं पूछे जाने को लेकर ही मुनमुटाव है.

प्रश्न- चिराग पासवान अगर आपसे परिवार को बचाने के लिए आगे आने को कहते हैं तो क्या आप आगे आएंगी.
उत्तर- वो कहें ना कहें. परिवार तो हमको बचाना ही है. बात अगर आपलोग करवा देंगे तो पशुपति से बात करेंगे. नहीं तो खुद से प्रयास करेंगे.

प्रश्न- चिराग पासवान ने अपनी मां को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था. क्या कहेंगी.

उत्तर- चार भाई, दो दमाद सबका मन अलग अलग है. इसपर क्या कहें. चाह गोतनी हैं, सबको मिलकर चलना चाहिए. रामविलास ने बहुत मुश्किल से पार्टी को खड़ा किया.

प्रश्न- रामविलास ने सोच समझकर चिराग को कुर्सी दी थी, लेकिन रामविलास के निधन के बाद सब बदल गया.
उत्तर- गलती हुई चाहे धोखा हुआ. अब भी सब मिलकर चलें तो ठीक होगा.

प्रश्न- दामाद साधु से कोई बात हुई.

उत्तर- साधु से बात नहीं हुई लेकिन टीवी पर देखे हैं.

प्रश्न- रामविलास के नहीं रहने का मलाल है.

उत्तर- रामविलास रहते तो ऐसा नहीं होता. सबको लेकर चलते थे.

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