तेजस्वी यादव के फेल होते ही पार्टी का यू-टर्न, अब इस फार्मूले पर चलेगी RJD

आरजेडी के थिंक टैंक ने तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद यादव की राह पकड़ने की सलाह दी है.

Niranjan Singh | News18 Bihar
Updated: July 29, 2019, 11:33 PM IST
तेजस्वी यादव के फेल होते ही पार्टी का यू-टर्न, अब इस फार्मूले पर चलेगी RJD
फिर पुराने रास्‍ते पर लौटेगी लालू प्रसाद की पार्टी. (फाइल फोटो)
Niranjan Singh | News18 Bihar
Updated: July 29, 2019, 11:33 PM IST
राष्‍ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान पिता की तीन दशकों की राजनीतिक लाइन से अलग राह तो पकड़ी, लेकिन नाकामयाबी ने उन्हें लौटने के लिए बाध्य कर दिया. तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी अब फिर से लालू के फॉर्मूले को ही अपनाने जा रही है. यानि अब उसे सवर्णों से परहेज-गुरेज नहीं होगा. उन्हें संगठन में भी उचित भागीदारी मिल सकती है और टिकटों का भी सूखा खत्म होगा. जबकि मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण के साथ-साथ अति पिछड़ों और दलितों को भी बराबर की तरजीह मिलेगी.

खुलने वाले हैं आरजेडी के खिड़की-दरवाजे
आरजेडी में फिलहाल संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. रांची से लालू प्रसाद यादव का फरमान बिहार पहुंच चुका है. पंचायतों से प्रदेश स्तर तक नए और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है. इसी महीने पार्टी के स्थापना दिवस समारोह और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया था कि संगठन में 60 फीसदी भागीदारी अति पिछड़ों, एससी-एसटी और अल्पसंख्यकों की होगी. जाहिर है कि यादवों की पार्टी के रूप में पहचान रखने वाले आरजेडी के खिड़की-दरवाजे खुलने वाले हैं.

राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा

रांची जाकर लालू प्रसाद यादव से लगातार मिलते-जुलते रहने वाले आरजेडी के थिंक टैंक ने तेजस्वी को लालू की राह पकड़ने की सलाह दी है. उनका मानना है कि तेजस्वी के पास अब ज्यादा मौके नहीं हैं. आगे अगर एक चुनाव में भी हार मिलती है तो पार्टी को बचाना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए आरजेडी के नए नेतृत्व के सामने नए प्रयोग और जोखिम उठाने का वक्त नहीं है. लोकसभा चुनाव की गलतियों को फिर नहीं दोहराने का मतलब साफ है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सियासत के जिस रास्ते पर बढ़ते हुए आरजेडी को असफलता का सामना करना पड़ा था, उस पर अब आगे नहीं बढ़ना है.

लालू प्रसाद के कभी खास रहे पप्पू यादव ने कहा
लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव में कोई क्षमता नहीं है पार्टी और राज्य चलाने की. वह बहुत अंहकारी है और इसी वजह से लोकसभा चुनाव में कीमत चुकानी पड़ी. यही हाल रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में भी नुकसान होगा.
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यही नहीं, बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव की लंबी होती अनुपस्थिति के भी अर्थ लगाए जा रहे हैं. विरोधी दलों के हमले तो जारी हैं ही, कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या होने वाला है. प्रखंड स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं के सामने संकट है कि उन्हें दिशानिर्देश नहीं मिल रहा कि वह कैसे हमलावर हों. जनता दल यूनाइटेड (JDU) पर कितना और किस हद तक आक्रमण करें और बीजेपी को किस हद तक छूट दें. दूसरे-तीसरे दर्जे के कई नेताओं को भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है.

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First published: July 29, 2019, 11:26 PM IST
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