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बिहार में सरकार गिरने के तेजस्वी के बयान पर आरसीपी सिंह ने ली चुटकी और दी यह सलाह

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने तेजस्वी और चिराग की तुलना करते हुए चुटकी ली.

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने तेजस्वी और चिराग की तुलना करते हुए चुटकी ली.

तेजस्वी के सरकार गिरने वाले बयान पर आरसीपी सिंह ने कहा कि हमारे पास बहुमत है और पूरे 5 साल हमारी सरकार चलेगी. बिना सीजन तेजस्वी यादव आम गिरने का इंतजार कर रहे हैं, तो क्या होगा? ऐसा ही बयान देंगे न.

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पटना. बिहार के सियासत के दो युवा चेहरे तेजस्वी यादव और चिराग पासवान इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं. तेजस्वी यादव ने राघोपुर में बयान दिया था कि दो-तीन महीने में सरकार गिरने वाली है और साथ ही चिराग पासवान को भी साथ आने का न्योता दिया. वही चिराग पासवान के निशाने पर भी नीतीश कुमार हैं, दोनों युवा नेताओं पर JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने निशाना साधा है.

'बिना सीजन आम गिरने का इंतजार न करें'

JDU दफ्तर में महिला उद्यमी वर्चुअल सम्मेलन में शामिल होने के बाद पत्रकारों ने तेजस्वी यादव के बयान और चिराग पर सवाल पूछा तो आरसीपी सिंह मुस्कुराने लगे और फिर बेहद चुटीले अन्दाज में जवाब दिया. उन्होंने शुरुआत एक देहाती कहावत से की और बोला कि आम का एक सीजन होता है. अगर बिना सीजन आम गिरने का इंतजार कीजिएगा तो इंतजार ही करते रह जाइएगा.

'जनता ने जो काम सौंपा, वह भी नहीं कर रहे तेजस्वी'

तेजस्वी के सरकार गिरने वाले बयान पर आरसीपी सिंह न कहा कि सरकार जनता बनाती है. जनता के वोट से बनती है और सरकार बनना और गिरना एकबार ही होता है. वो मौका चुनाव में आता है. हमारे पास बहुमत है और पूरे 5 साल हमारी सरकार चलेगी. बिना सीजन तेजस्वी यादव आम गिरने का इंतजार कर रहे हैं, तो क्या होगा? ऐसा ही बयान देंगे न और यही नेता प्रतिपक्ष सपना देख रहे हैं. जो काम उन्हें मिला है उसे ईमानदारी से करें. जनता ने विपक्ष में बैठने का और जनता में जाकर अपनी गलती ढूंढ़ने का मौका दिया है. वे जनता के बीच जाएं, लेकिन वो भी काम नहीं कर रहे हैं.

'चिराग और तेजस्वी के साथ आने से भी फर्क नहीं पड़ेगा हमें'

वही चिराग पासवान को तेजस्वी यादव के ऑफर पर आरसीपी सिंह ने कहा कि दोनों का बैकग्राउंड एक ही है. रामविलास जी गांव की पगडंडी से राजनिति सीख कर इतना आगे बढ़े, लेकिन चिराग पासवान दिल्ली के जनपथ से राजनीति सीख कर आए हैं. उन्हें क्या पता सियासत कैसे होती है. दोनों नेता की पृष्ठभूमि एक जैसी है. परिवारवाद की वजह से इन्हें राजनीति विरासत में मिल गई है. इसीलिए दोनों की सोच भी एक ही है. दोनों की एकता तो होनी ही है. लेकिन इससे कोई फर्क नही पड़ेगा अगर साथ आ भी जाएंगे तो.

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