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जगदानंद सिंह को बिहार RJD की कमान सौंपना लालू का 'मास्टरस्ट्रोक' क्यों माना जा रहा है? पढ़ें 5 वजह

News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 9:57 AM IST
जगदानंद सिंह को बिहार RJD की कमान सौंपना लालू का 'मास्टरस्ट्रोक' क्यों माना जा रहा है? पढ़ें 5 वजह
लालू यादव ने जगदानंद सिंह को बिहार आरजेडी की कमान सौंपकर यह बता दिया कि पार्टी की कमान उनके ही हाथ में है.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि जगदा बाबू (जगदानंद सिंह) को प्रदेश अध्यक्ष बनाना आरजेडी का सवर्ण कार्ड है. मुस्लिम-यादव वाली पार्टी या फैसला अपकमिंग इलेक्शन को देखते हुए लालू का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक है.

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पटना. जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) को बिहार आरजेडी का अध्यक्ष (President of RJD) बनाए जाना आरजेडी में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. इसके साथ ही इसे लालू का मास्टरस्ट्रोक भी कहा जा रहा है. माना जा रहा है ऐसा करके लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने एक साथ कई निशाने साधे हैं. एक तरफ पार्टी और परिवार में कलह को शांत करने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है तो दूसरी ओर बदलते वक्त के हिसाब से इसे भविष्य की राजनीति को देखते हुए उठाया गया कदम बताया जा रहा है. जगदानंद सिंह को बिहार आरजेडी (Bihar RJD) की कमान सौंपना आखिर लालू का मास्टरस्ट्रोक क्यों माना जा रहा है?

राजद के इस वरिष्ठ नेता को कमान सौंपने के पीछे जो स्पष्ट कारण दिखता है वह यह है कि राजद में जगदानंद सिंह, बेदाग और विश्वसनीय चेहरा है. काबिल व अनुभवी होने के साथ ही कम बोलने वाले हैं. रघुवंश प्रसाद सिंह और शिवानंद तिवारी जैसे नेताओं की तरह वे न तो अक्सर मीडिया से मुखातिब होते हैं और न ही हर मुद्दे पर अपनी टिप्पणी देते हैं. वे अति महत्वाकांक्षी नहीं हैं. जाहिर है संगठन में ऐसे लोगों की जरूरत और अहमियत अधिक होती है.

राजद में गुटबाजी खत्म करने की कवायद
राजद की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि रामचंद्र पूर्वे लगातार 5 बार से राजद के प्रदेश अध्यक्ष थे, लेकिन लालू यादव की अनुपस्थिति में पार्टी उत्तरोत्तर कमजोर होती चली गई. इतना ही नहीं राजद में गुटबाजी भी बढ़ी और लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव रामचंद्र पूर्वे को पसंद भी नहीं करते थे. जाहिर है पार्टी में गुटबाजी बढ़ती जा रही थी जो आने वाले समय में पार्टी के लिए अच्छा साबित नहीं होता.

जगदानंद सिंह को आरजेडी की कमान सौंपने के साथ ही लालू यादव ने एक साथ कई निशाना साधा है.


तेजस्वी-तेजप्रताप तकरार पर विराम
बकौल अशोक कुमार शर्मा बीते दो सालों में जिस तरह के लालू यादव के दोनों बेटों, तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच जिस प्रकार के कथित मनमुटाव की खबरें आती रहीं, इससे पार्टी की साख को खासा नुकसान हुआ. ऐसे वक्त में लालू यादव को भी एक ऐसा नेता चाहिए था जो न्यूट्रल हो. संगठन को एकता के सूत्र में पिरोकर चलाने के लिए यही जरूरी था. जाहिर है जगदानंद सिंह सिर्फ और सिर्फ लालू के आदमी माने जाते हैं.
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नाराज सवर्णों को साधने की कोशिश
वहीं, रवि उपाध्याय कहते हैं कि जगदा बाबू (जगदानंद सिंह) को प्रदेश अध्यक्ष बनाना आरजेडी का सवर्ण कार्ड है. मुस्लिम-यादव वाली पार्टी या फैसला अपकमिंग इलेक्शन को देखते हुए लालू का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक है. हालांकि सवाल अब भी यही है कभी कथित तौर पर 'भूरा बाल साफ करो' का नारा देने वाली और सवर्ण आरक्षण का विरोध करने वाली आरजेडी पर सवर्ण समुदाय विश्वास करते हैं या नहीं?

वफादार और ईमानदार नेताओं को संदेश
अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि माइनस लालू राजद में लालू के समानानंतर कोई भारी भरकम शख्सियत अगर कोई है तो वह जगदानंद सिंह है. सबसे बड़ी बात है कि लालू परिवार के लिए लॉयल हैं. हर अच्छे बुरे वक्त में साथ रहे हैं. वह न तो तेजस्वी के आदमी हैं और न ही तेजप्रताप यादव के. वे सिर्फ और सिर्फ लालू के आदमी हैं. जाहिर है लालू की आरजेडी को विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे ही निष्पक्ष और निष्ठावान लोगों की जरूरत थी.

जगदानंद सिंह राष्ट्रीय जनता दल के निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष चुने गए.  (फाइल फोटो)


तेजस्वी यादव के लिए लालू का खास संदेश
जगदा बाबू को प्रदेश की कमान सौंपने का सीधा मतलब लोग तेजस्वी को दिए गए लालू यादव के 'खास' संदेश से भी जोड़कर देखते हैं. अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि दरअसल लालू ने पार्टी की मजबूती के लिए ये कदम उठाया है. उनका मानना है कि पार्टी मजबूत रहेगी तभी किसी खास व्यक्ति की अहमियत रहेगी. ऐसे में तेजस्वी को ये संदेश है कि मनमानी मत कीजिए, विवाद को विराम दीजिए और मिलजुल कर आगे बाढ़िए.

बहरहाल कहा जाता है कि तेजस्वी भी जगदा बाबू को काफी सम्मान देते हैं और तेजप्रताप ने तो उन्हें पितातुल्य बताया है. वहीं यह भी माना जा रहा है कि तमाम दुश्वारियों को बीच लालू यादव की ये बड़ी पहल है और पार्टी और संगठन को मजबूत करने का मास्टरस्ट्रोक है. जगदा बाबू को प्रदेश की कमान सौंपने के साथ ही लालू यादव ने यह भी क्लीयर कट मैसेज दे दिया है कि अभी भी पार्टी की लगाम उनके ही हाथ में है.

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First published: November 27, 2019, 9:24 AM IST
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