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काम से ज्यादा बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं मोदी कैबिनेट के मंत्री, राबड़ी को दी थी घूंघट की सलाह

फाइल फोटो

फाइल फोटो

चौबे ने राजनीति की शुरूआत छात्र जीवन में ही की थी और कई सालों तक वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे

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    केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री अश्विनी चौबे की पहचान बीजेपी के फायरब्रांड नेता और कट्टर हिंदू नेता के तौर पर होती है. बक्सर सीट जीतकर लोकसभा पहुंचे बिहार बीजेपी के इस सीनियर नेता को कैबिनेट में जगह मिली लेकिन वो अपने कामों से ज्यादा विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं. हाल ही में चौबे ने राबड़ी देवी को घूंघट में भी रहने की सलाह दी थी जिसको लेकर खूब हाय तौबा मचा था.

    उन्होंने ने यह बयान राबड़ी देवी ओर से किए गए इस दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिया कि नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली आरजेडी से अलग होने और एनडीए में वापसी के कुछ समय बाद आरजेडी के साथ फिर से एक होने की बात की थी. बक्सर सीट से चौबे को एनडीए ने दूसरी बार बक्सर सीट से टिकट दिया है लेकिन बाहरी बनाम स्थानीय की लड़ाई में चौबे को काफी मेहनत करनी पड़ रही है.

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    लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में बक्सर के लोगों ने अधिकांशत: किसी सवर्ण या ब्राह्मण उम्मीदवार को जिताया है और अश्विनी चौबे बाहरी होने के बावजूद इस सीट से सांसद बन पाए. इस बार के हालात पिछले चुनाव से अलग है, इस चुनाव में बीजेपी-जेडीयू साथ-साथ हैं जिसकी वजह से राजद की परेशानी बढ़ गई है तो वहीं बीजेपी की जीत इस बार केवल जातीय समीकरण पर नहीं बल्कि विकास फैक्टर भी निर्भर करेगी. क्योंकि बीजेपी और अश्निनी चौबे ने विकास के ही नाम पर यहां की जनता से वोट मांग रहे हैं.

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    दरअसल चौबे मूल रूप से भागलपुर के दरियापुर के रहने वाले हैं और वो सांसद बनने से पहले बिहार विधानसभा के लिए लगातार पांच बार चुने गए हैं. उन्होंने बिहार सरकार में बतौर स्वास्थ्य, शहरी विकास और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी सहित अहम विभागों को अपनी सेवा दी है. चौबे पहली बार साल 1995 में विधानसभा पहुंचे जिसके बाद वो 2014 तक लगातार इसके सदस्य रहे.

    चौबे ने राजनीति की शुरूआत छात्र जीवन में ही की थी और कई सालों तक वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे. वो 1970 के दशक में जेपी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे और जेल जाने वालों की सूचि में उनका भी नाम था. साल 2013 में केदारनाथ में आई त्रासदी के चौबे गवाह थे और अपने परिवार के साथ उन्होंने भीषण केदारनाथ बाढ़ का सामना किया था. उन्होंने इस आपदा पर ‘केदारनाथ त्रासदी’ पुस्तक भी लिखी है. उन्होंने प्राणी विज्ञान में बीएससी (ऑनर्स) किया है. योग में उनकी विशेष रुचि है.

    चौबे के साथ ही उनके पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे भी सक्रिय राजनीति में हैं. वो भागलपुर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और इस चुनाव में अपने पिता के लिए बक्सर में चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं.

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