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पढ़िये, आखिर क्या है नीतीश कुमार का 'पीके प्लान'

News18 Bihar
Updated: December 6, 2018, 12:55 PM IST
पढ़िये, आखिर क्या है नीतीश कुमार का 'पीके प्लान'
प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना यूनिवर्सिटी चुनाव में जीत-हार के गुणा-भाग से परे नीतीश कुमार के 'पीके प्लान' का ड्राफ्ट लंबे दौर की राजनीति के लिए है. इसमें बीजेपी की बैशाखी के बिना जेडीयू को अपने दम पर सर्वसमाज की पार्टी बनाने की रणनीति है. साथ ही प्रदेश के युवाओं पर फोकस कर राजनीति की अलग लकीर खींचने की दीर्घकालीन नीति है.

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पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में छात्र जेडीयू ने अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की. इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'पीके प्लान' ने पीयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का वर्चस्व तोड़ दिया. जाहिर है ये सब जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर यानि पीके की बेहतरीन प्लानिंग और उसको जमीन पर लागू करने के कारण हुई. हालांकि छात्र संघ चुनाव में जिस तरह से एक्टिव रहे उससे कई सवालों ने जन्म लिया है.

आखिर इतने बड़े राजनीतिक कद के व्यक्ति द्वारा छात्र संघ के चुनाव को इतना महत्व क्यों दिया गया? जिस व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी,नीतीश कुमार, देश के कई दलों और दिग्गज नेताओं के लिए स्ट्रेटेजी तैयार की, वे स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में क्यों उतरे? सवाल ये भी कि क्या नीतीश कुमार भविष्य की राजनीति का कोई खांका खींच रहे हैं जिसका नेतृत्व प्रशांत किशोर करेंगे?

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दरअसल नीतीश कुमार के 'पीके प्लान' के पीछे बिहार की विशिष्ट राजनीतिक विरासत है. 1975 में छात्र आंदोलन से निकले नेताओं ने अपनी खास पहचान बनाई. इस आंदोलन से निकले नेतृत्व ने देश-प्रदेश को दिशा भी प्रदान की है. लालू यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, सुशील मोदी और रविशंकर प्रसाद जैसे नेता इसी की उपज हैं. स्पष्ट है कि 'पीके प्लान' का केन्द्र बिंदु ही प्रदेश के युवा हैं. जाहिर है इसके लिए यूनिवर्सिटी कैम्पस से अधिक मुफीद जगह कोई नहीं.

युवाओं पर फोकस कर प्रशांत किशोर बीते अक्टूबर में जेडीयू के कई युवा नेताओं से मिले थे. युवा जेडीयू , छात्र जेडीयू के कार्यकर्ताओं और युवा पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण टास्क भी दिए थे. इसके नवंबर में प्रशांत किशोर ने युवाओं के लिए एक टोल फ्री नंबर- 9121691216 जारी किया था. इसके माध्यम से बिहार का कोई भी युवा उन्हें फोन कर सकता है. इसमें मुख्यत: तीन सवाल पूछे जाते हैं. कहां से हैं, क्या करते हैं और बिहार के लिए आपकी राजनीतिक सोच क्या है?

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इसके जरिये वे युवाओं से फीड बैक लेकर जेडीयू के उम्मीदवार तय करने, मेनिफेस्टो बनाने और एजेंडा सेट करने के लिए काम कर रहे हैं. वे कुछ युवाओं को बूथ लेवल के लिए भी तैयार कर रहे हैं जो आने वाले दिनों में एक राजनीतिक ताकत के तौर पर ग्रास रुट पर मौजूद रहेंगे. जाहिर है 'पीके प्लान' के जरिये बिहार के युवाओं को फोकस कर भविष्य की राजनीति का ड्राफ्ट तैयार करने की तैयारी है.
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'पीके प्लान' के सेंटर में यूनिवर्सिटी की राजनीति क्यों है इसे भी समझ लेते हैं. दरअसल बिहार के अधिकतर विश्वविद्यालयों में अब तक एबीवीपी का ही वर्चस्व रहा है. ऐसे में उनका मकसद या तो सेंट्रल पैनल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर एबीवीपी की हार सुनिश्चित करना रहा, या फिर एबीवीपी को कड़ी टक्कर देना रहा. PUSU चुनाव के नतीजों से साफ है कि वे इसमें कामयाब रहे हैं.

बड़ी बात ये है कि पटना यूनिवर्सिटी चुनाव में जीत-हार के गुणा-भाग से परे 'पीके प्लान' का ड्राफ्ट लंबे दौर की राजनीति के लिए है. जहां बीजेपी की बैशाखी के बिना जेडीयू को अपने दम पर सर्वसमाज की पार्टी बनाने की रणनीति है. इसमें प्रदेश के युवाओं पर उनका फोकस कर राजनीति की अलग लकीर खींचने की रणनीति है.

बहरहाल यह तो स्पष्ट है कि प्रशांत किशोर आज के युवाओं के लिए रोल मॉडल बनकर सामने आए हैं. बिहारी माटी की पैदावार इस शख्स ने देश की राजनीति को भी एक खास मोड़ दिया है. ऐसे में नीतीश का 'पीके प्लान' आने वाले दिनों में कैसे आगे बढ़ता है यह देखना दिलचस्प रहेगा.

विजय कुमार झा

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First published: December 6, 2018, 12:55 PM IST
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