नीतीश के बाद कौन? बिहार में संभावनाओं की सियासत पर आगे बढ़ रहे चिराग!
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नीतीश के बाद कौन? बिहार में संभावनाओं की सियासत पर आगे बढ़ रहे चिराग!
चिराग पासवान (फाइल फोटो)

चिराग पासवान और नीतीश कुमार (Chirag Paswan and Nitish Kumar) के तल्ख तेवरों के बीच ये सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस बार के विधानसभा चुनाव में बिहार एनडीए (Bihar NDA) का वर्तमान स्वरूप कायम रह सकेगा?

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  • Last Updated: August 12, 2020, 12:17 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) का वक्त निकट आने के साथ ही सूबे में सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है. सीट शेयरिंग के मुद्दे को लेकर प्रदेश के दोनों प्रमुख गठबंधन, एनडीए और महागठबंधन (NDA and Grand Alliance) के भीतर आपसी खींचतान भी लगातार जारी है. इन सब के बीच सबसे अधिक जिस बात की चर्चा हो रही है वह है लोक जन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान (LJP President Chirag Paswan) के बगावती तेवर. एलजेपी वैसे तो एनडीए के सहयोगी हैं, लेकिन बीते कुछ महीनों से चिराग लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सरकार पर हमलावर रहते हैं. हाल में जब उन्होंने ये कहा कि लोजपा सभी 243 सीटों पर लड़ने को तैयार है तो बिहार की राजनीति में काफी हलचल देखी जा रही है.

तेज होती जा रही तल्खी
चिराग और सीएम नीतीश के बीच बढ़ती तल्खी और तेज तब होती दिखी जब जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने मंगलवार को कहा कि जदयू का गठबंधन भाजपा से है न कि लोजपा से. त्यागी ने कहा कि लोजपा तो कभी हमारे साथ रही ही नहीं, न 2005 में, न 2010 और न ही 2015 के विधानसभा चुनाव में. जदयू और भाजपा का दो दशक का साथ है. त्यागी ने आगे कहा कि वर्ष 2015 के अपवाद को छोड़कर हम 1999 से साथ हैं और दोनों पार्टियां एक-दूसरे को अच्छे से समझती हैं और सम्मान भी करती हैं.

केंद्र से करें CMM की मांग
त्यागी ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कई बार कह चुके हैं कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विधानसभा का चुनाव लड़ेगा. इन बड़े नेताओं की बात के उलट लोजपा द्वारा सवाल खड़ा करना बैठे-बिठाए विपक्ष को मुद्दा देगा. एनडीए को कमजोर करने की इजाजत किसी को कैसे दी जा सकती है? बिहार में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की चिराग की मांग पर त्यागी ने कहा कि लोजपा केंद्र सरकार का हिस्सा है, वहां वह इसकी मांग क्यों नहीं करती?



लगातार सवाल कर रहे चिराग
जाहिर है जेडीयू और एलजेपी, या यूं कहें कि चिराग और नीतीश के तल्ख तेवरों के बीच ये सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस बार के विधानसभा चुनाव में बिहार एनडीए का वर्तमान स्वरूप कायम रह सकेगा? सवाल इसलिए कि चिराग ने हर वो मुद्दा उठाया है जो सीधे सीएम नीतीश कुमार की छवि को चोट पहुंचाता रहा है. सवालों की बौछार तब से शुरू है जब बिहार भर की यात्रा पर निकले थे. पहले शिक्षक बहाली के मामला उठाते हुए सरकार को घेरा, उसके बाद लॉ एंड ऑर्डर पर भी सवाल खड़े किए.

सवालों के गर्भ में क्या है?
चिराग ने लॉकडाउन राशन कार्ड बनवाने या राशन बंटवाने का मामला हो या फिर  हाल में शराबबंदी पर खड़े किए गए सवाल, सभी के सभी सीधे सीएम नीतीश को टारगेट कर ही किए गए. वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय इस बारे में कहते हैं कि चिराग काफी सोच-समझकर ये बातें कह रहे हैं. यही नहीं इसके पीछे राम विलास पासवान की भी कहीं न कहीं सहमति है तभी चिराग सीधे सीएम नीतीश को निशाना बना रहे हैं. हालांकि इन सियासी हमलों के तह में जाएंगे तो दो बातें स्पष्ट हो जाएंगी. पहला तो ये की चिराग बिहार की राजनीति का विकल्प बनने की चाहत रख रहे हैं. दूसरा ये कि इस चुनाव में अधिक से अधिक सीट एलजेपी के लिए हासिल कर पाएं.

चिराग की दिखावटी तल्खी?
वहीं इस मसले पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि सवाल तो ये भी खड़ा होता है कि चिराग पासवान पीएम मोदी के समर्थक और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आलोचक क्यों हैं? जाहिर है इसके तह में ये बात भी जाहिर होती है कि एलजेपी बिहार की सत्ता में भी भागीदारी चाह रही है. दरअसल 2017 में बीजेपी के साथ बिहार में नीतीश ने NDA की सरकार बनाई थी तब LJP नेता व चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस बिहार सरकार में मंत्री बने थे. पर 2019 में वे सांसद बन गए और बिहार सरकार में इसी के साथ ही एलजेपी की भागीदारी भी खत्म हो गई.

ये वादा करें CM नीतीश तो...
रवि उपाध्याय कहते हैं कि चिराग की तल्खी सीट बंटवारे पर सहमति बनने और अगली बिहार सरकार में लोजपा की भागीदारी सुनिश्चित होने के वादे के साथ ही खत्म हो जाएगी. हाल में जब राम विलास पासवान ने ये कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मसले पर चिराग ने सीएम नीतीश से बात की थी तो ये जाहिर हो गया कि ये तल्खी भीतरी तौर पर उतनी नहीं है जितनी कि बाहर से दिखती है.

संभावनाओं की सियासत कर रहे चिराग!
वहीं, अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि चिराग पासवान ने जब से खुद को युवा बिहारी कहना शुरू किया, और बिहार फर्स्ट का नारा दिया तब से ही ये तल्खी बढ़ी है. जाहिर है ये सब एक रणनीति के तहत किया जा रहा है और चिराग खुद को सीएम नीतीश की छवि से अलग करते हुए बिहार की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में जुटे हैं. ऐसे भी ये कहा जा रहा है कि ये विधानसभा चुनाव सीएम नीतीश का आखिरी विधानसभा चुनाव है, ऐसे में चिराग नीतीश के बाद की संभावनाओं की सियासत पर आगे बढ़ रहे हैं.
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