Corona पर बिहारी इम्यूनिटी पड़ रही भारी, 52 प्रतिशत रिकवरी रेट, मौत की दर भी कम
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Corona पर बिहारी इम्यूनिटी पड़ रही भारी, 52 प्रतिशत रिकवरी रेट, मौत की दर भी कम
बिहार में 55 प्रतिशत रिकवरी रेट

मृत्यु दर कम होने के मामले में भी बिहार काफी आगे है और यह 0.59% है. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 3.30 फ़ीसदी के करीब है. सबसे खास बात ये है कि बिहार में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज करीब 9 दिनों में ही स्वस्थ हो जा रहे हैं.

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पटना. बिहार में कोरोना पॉजिटिव (Corona positive) मरीजों की संख्या बुधवार की शाम 5.00 बजे तक 5,583 हो गयी थी. इनमें  कुल 2,934 कोरोना संक्रमित मरीज (Corona infected patient) ठीक होकर अपने घर वापस जा चुके हैं. ये प्रदेश में कुल संक्रमित व्यक्तियों का 52 प्रतिशत है. बता दें कि देश का रिकवरी रेट (Recovery rate) 48.43% है. इस तरह कोरोनावायरस 10 राज्यों में रिकवरी रेट और के मामले में बिहार छठे स्थान पर आ गया है.

मृत्यु दर कम होने के मामले में भी बिहार काफी आगे है और यह 0.59% है. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा :30 फ़ीसदी के करीब है. सबसे खास बात ये है कि बिहार में कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज करीब 9 दिनों में ही स्वस्थ हो जा रहे हैं.

















































राज्य रिकवरी रेट मौत
राजस्थान 74.78 256(2.25%)
मध्य प्रदेश 68.32 420(4.26%)
गुजरात 68.29 1313(6.23%)
उत्तर प्रदेश 58.83 301(2.65%)
तमिलनाडु 52.48 307(0.87%)
बिहार 52.00 33(0.59%)
महाराष्ट्र 46.96 3,289(3.62%)
कर्नाटक 44 66(1.11%)
पश्चिम बंगाल 40.28 415(4.61%)
दिल्ली 37.88 905(2.89%)

बिहार के डॉक्टर एनके मिश्रा कहते हैं कि प्रदेश में लोग  ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होते हैं और बचपन से ही कई तरह के वायरस का सामना करते हैं. इसलिए प्रतिरोधक क्षमता अधिक होना एक बड़ी वजह हो सकती है.

वहीं, डॉ मिश्रा कहते हैं कि बिहार में मलेरिया जैसे रोग का मलेरिया का सामना करते-करते बिहार के लोगों की वायरस प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हो गई होगी. यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि कोरोना  वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज में मलेरिया की दवाई हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन या एचसीक्यू कारगर साबित हो रही है.

वहीं, डॉ मुरारी कृष्ण कहते हैं कि बिहार में रिकवरी रेट बेहतरीन क्यों है इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है, लेकिन इतना तो साफ है कि राष्ट्रीय औसत से यह अधिक है.  वे बताते हैं कि हो सकता है कि बिहारवासियों में शरीर में बेस्ट लाइन इम्यूनिटी सिस्टम डेवलप कर गया हो. हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं है.

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