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बिहार: ‘गोद भराई’ और ‘अन्नप्राशन' का दिखने लगा असर, महिला एवं शिशु पोषण स्तर में सुधार-रिपोर्ट

News18 Bihar
Updated: October 15, 2019, 3:10 PM IST
बिहार: ‘गोद भराई’ और ‘अन्नप्राशन' का दिखने लगा असर, महिला एवं शिशु पोषण स्तर में सुधार-रिपोर्ट
बिहार में महिला, शिशु पोषण स्तर में सुधार. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (PCI) के भारत में सहायक निदेशक इंद्रजीत चौधरी ने बताया कि महिलाओं को ‘पोषण वाटिका’ लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके तहत महिलाएं अपने घर के पास छोटी बाटिका तैयार करती है और उसमें साग सब्जी लगाती है.

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नई दिल्ली. बिहार सरकार के साथ बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Milinda Gates Foundation) तथा प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (PCI) द्वारा महिलाओं एवं शिशुओं में पोषण के स्तर (Nutritional Levels in Infants) को बेहतर बनाने के लिये पिछले वर्षो में शुरू किए गए कार्यक्रम के कारण बाल मृत्यु दर में एक तिहाई कमी आई है. बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की भारत में पोषम इकाई के प्रमुख डॉ आलोक रंजन ने संवाददाताओं को बताया कि महिलाओं में पोषण (Nutrition in women)के प्रति जागरूकता फैलाना हमारी योजना के केंद्र में है और इसके तहत बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में जमीनी स्तर पर हमने खास पहल की और इसमें प्रदेश सरकार का भी सहयोग मिला.

गोदभराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम का सकारात्मक असर
उन्होंने बताया कि इसके तहत बिहार के हर जिले में हर महीने की सात तारीख को ‘गोद भराई’ कार्यक्रम, हर महीने की 19 तरीख को ‘अन्नप्राशन कार्यक्रम’ आयोजित किया जाता है और महिलाओं को पोषण एवं पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी जाती है.

'पोषण वाटिका' के लिए भी किया जाता है प्रेरित 

पीसीआई के भारत में सहायक निदेशक इंद्रजीत चौधरी ने बताया कि महिलाओं को ‘पोषण वाटिका’ लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके तहत महिलाएं अपने घर के पास छोटी बाटिका तैयार करती है और उसमें साग सब्जी लगाती है. बिल एंड मिलिंड गेट्स फाउंडेशन तथा प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल ने इस बारे में एक अध्ययन किया है जिसमें महिला एवं बाल शिशु पोषण स्तर में सुधार का दावा किया गया है.

बाल मृत्युदर में एक तिहाई कमी
अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार के साथ महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देते हुए लक्ष्यकेन्द्रित प्रयास प्रारंभ किये गए थे और अब इसका प्रभाव दिखना शुरू हो गया है. पिछले कुछ वर्षो में राज्य में बाल मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई है.
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उन्होंने बताया कि अध्ययनों से पता चला है कि महिलाओं में जागरूकता बढ़ने से उन्होंने अपने बच्चों को विविध और स्वास्थ्यपूर्ण आहार खिलाने की ओर दोगुने से अधिक इच्छा दिखाई. बिहार रूरल लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (बीआरएलपीएस) के ‘जीविका मिशन’ ने हाल ही में नीति आयोग के समक्ष प्रस्तुती दी है.

इनपुट- भाषा

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First published: October 15, 2019, 3:02 PM IST
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