...तो नेपाल-भारत के बीच नहीं खत्म होगा रोटी-बेटी का संबंध! रामायण सर्किट में तेजी से बिहार को होगा लाभ
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...तो नेपाल-भारत के बीच नहीं खत्म होगा रोटी-बेटी का संबंध! रामायण सर्किट में तेजी से बिहार को होगा लाभ
वर्ष 2018 में पीएम मोदी और नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने जनकपुर का दौरा किया था. (फाइल फोटो)

नेपाल (Nepal) के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी और नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा की मीटिंग में रामायण सर्किट ((Ramayana Circuit) से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों को विकसित करने पर चर्चा हुई.

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  • Last Updated: August 18, 2020, 5:17 PM IST
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पटना. नेपाल और भारत (Nepal And India) का रिश्ता रोटी-बेटी का है. खास तौर पर बिहार की सीमा से लगे सीमावर्ती क्षेत्र के दोनों देशों के लोगों को तो आपस में किसी भी प्रकार की दूरी की बात का कभी अहसास तक नहीं हुआ था. लेकिन, हाल के दिनों में उत्तराखंड के लिंप्याधूरा, लिपुलेख और कालापानी (Limpyadhura, Liphulekh and Kalapani) को नेपाल द्वारा अपने नए राजनीतिक नक्शे में दिखाने को लेकर दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही थी. इसका असर बिहार-नेपाल संबंधों पर भी दिख रहा था. बाढ़ के समय बिहार की नदियों का नेपाल की ओर से तटबंधों के मरम्मत में व्यवधान पैदा कर नेपाल ने अपना गैर जिम्मेदार रुख दिखाया था. इसके साथ ही भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) को नेपाल का बताकर नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने दोनों देशों के संबंधों में और खटास पैदा कर दी. खास तौर पर भगवान श्रीराम और माता जानकी से भावनात्मक लगाव रखने वाले लोगों को तो भारत-नेपाल के बीच की ये तल्खी असहनीय थी. बहरहाल अब एक अच्छी खबर आई है.

नेपाल से आई अच्छी खबर

दरअसल कुछ दिन पहले तक भारत के साथ कई मुद्दों पर असहमति जता रही नेपाल सरकार सोमवार को बदली-बदली सी थी. बैठक में भारत की मदद से नेपाल के कई जगहों को रामायण सर्किट (Ramayana Circuit in Nepal) से जोड़ने की परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी है जिसका सीधा लाभ बिहार और नेपाल को मिलने वाला है.



10 राज्यों में रामायण सर्किट
बता दें कि वर्ष 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा पर इस पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक खास प्रगति नहीं हो पाई है. खास कर पीएम ओली हाल के दिनों में भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे. गौरतलब है कि भारत सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना की रामायण सर्किट थीम के तहत उत्तर प्रदेश और बिहार सहित नौ राज्यों में विकास के लिए 15 स्थानों की पहचान की थी.

इन राज्यों को जोड़ेगा रामायण सर्किट

इसके तहत उत्तर प्रदेश के अयोध्या, नंदीग्राम, श्रृंगवेरपुर और चित्रकूट, बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर और दरभंगा, मध्यप्रदेश के चित्रकूट, ओडिशा के महेंद्रगिरी, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, महाराष्ट्र के नासिक और नागपुर, तेलंगाना के भद्राचलम, कर्नाटक के हम्पी और तमिलनाडु के रामेश्वर को स्वदेश दर्शन योजना की रामायण परिपथ थीम के अंतर्गत चिह्नित किया गया है.

भारत-नेपाल के बीच बनी थी सहमति

बता दें कि वर्ष 2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल दौरे पर गए थे तो उन्होंने कहा था कि भारत और नेपाल एक साथ मिलकर रामायण सर्किट बनाएंगे. इससे दो देशों का सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होगा. इस पर नेपाल ने भी अपनी सहमति दी थी. बता दें कि पिछले साल नवंबर में रामायण सर्किट को लेकर नेपाल के जनकपुर में अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था.

भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों में और पगाढ़ता लाने के उद्देश्य से ही नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी शर्मा ओली ने वर्ष 2018 में पीएम मोदी के नेपाल दौरे के समय सीता के जन्म स्थान जनकपुर से अयोध्या तक बस सेवा की शुरुआत की थी. अब एक बार फिर दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने 17 अगस्त को एक टेबल पर बैठकर दौरान रामायण सर्किट पर चर्चा की. जाहिर है इससे संबंधों में तल्खी कम होने की उम्मीद जगी है.
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