...तो तेजस्वी ने तेज प्रताप को सलटा दिया ! पढ़ें 'एकाधिकार' की इनसाइड स्टोरी
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...तो तेजस्वी ने तेज प्रताप को सलटा दिया ! पढ़ें 'एकाधिकार' की इनसाइड स्टोरी
तेज प्रताप यादव को, RJD ने एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया

राजनीतिक जानकार इसे तेजस्वी (Tejaswi) के आरजेडी पर 'एकाधिकार' से भी जोड़ते हैं. यही वजह है कि हाल के दिनों में तेज प्रताप (Tej Pratap) को अपने ही कुनबे में बहुत भाव नहीं मिल रहा है

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पटना. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में लगातार विधान परिषद के चुनाव के लिए कई नामों की चर्चा थी. इनमें लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) का भी नाम सामने आ रहा था. लेकिन, आरजेडी ने तेजप्रताप यादव को फिलहाल एमएलसी कैंडिडेट (MLC Candidate) नहीं बनाने का फैसला लिया है. आरजेडी ने आखिरकार तीन नामों की घोषणा कर दी है. आरजेडी ने बिस्कोमान के अध्यक्ष सुनील सिंह, फारूख शेख और रामबली चंद्रवंशी के नाम पर मुहर लगाई है.

सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश
राजनीतिक हलकों में कहा तो यही जा रहा है कि आरजेडी ने जातिगत समीकरण के लिहाज से अपने उम्मीदवार तय किए हैं. इसी के तहत राजपूत समाज से प्रत्याशी बनाने की मांग हो रही थी. माना जा रहा है कि आरजेडी ने भूमिहार समाज से आरजेडी ने एडी सिंह को राज्यसभा भेजा था जिससे राजपूत समाज ने आरजेडी पर दबाव बढ़ा दिया था. बिस्कोमान के अध्यक्ष सुनील सिंह का नाम इसी रणनीति के तहत सामने आया है.

जातिवादी छवि बदलना चाहती है RJD
वहीं, आगामी विधान सभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम समुदाय का एक नाम जरूरी माना जा रहा था जिसके तहत ही फारूख शेख के नाम पर सहमति बनी है. वहीं रामबली सिंह चंद्रवंशी पिछड़े समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे, इसलिए उन्हें उम्मीदवार बनाया गया है. हालांकि तेज प्रताप  यादव को विधान परिषद नहीं भेजे जाने के फैसले से सबको आश्चर्य जरूर हो रहा है.



इसी बहाने तेज प्रताप भी हो गए किनारे
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह तेज प्रताप को सलटाने के गेम प्लान का हिस्सा भी हो सकता है. वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि हाल में तेज प्रताप ने खुद को विधान परिषद भेजे जाने के लिए दबाव भी बनाया था. उनके समर्थकों ने काफी हो-हंगामा भी किया था, लेकिन तेजस्वी और जगदानंद सिंह की जोड़ी आगामी विधान सभा चुनाव को देखते हुए ही रणनीति बना रही है, ऐसे में तेज प्रताप कहीं से भी फिट नहीं बैठ रहे थे.

आरजेडी ने सेट किया अपना गोल
रवि उपाध्याय कहते हैं कि अगर तेज प्रताप उम्मीदवार बनाए जाते तो एक बार फिर आरजेडी पर परिवारवाद से बाहर नहीं निकल पाने का आरोप लगता. दूसरा ये कि सवर्ण समुदाय को भी पार्टी जोड़ने की कवायद में लगी हुई है. इसी के तहत पहले ब्राह्मण समाज के मनोज झा फिर भूमिहार जाति के एडी सिंह को राज्यसभा भेजा गया, और अब राजपूत समाज के सुनील सिंह को एमएलसी बनाने जा रही है.

अब क्या करेंगे तेज प्रताप यादव ?
हालांकि राजनीतिक जानकार इसे तेजस्वी के आरजेडी पर 'एकाधिकार' से भी जोड़ते हैं. यही वजह है कि हाल के दिनों में तेज प्रताप को अपने ही कुनबे में बहुत भाव नहीं मिल रहा है और वे धीरे-धीरे ही सही वे आरजेडी के राजनीतिक सीन से ही गायब होते जा रहे हैं. बहरहाल विधान परिषद की उम्मीदवारी से नाम कटने के बाद अब तेज प्रताप क्या करेंगे यह देखना दिलचस्प होगा.
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