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...तो सहयोगियों के आगे नहीं झुकेगी RJD! पढ़ें- महागठबंधन के घमासान की इनसाइड स्टोरी
Patna News in Hindi

News18 Bihar
Updated: January 11, 2020, 5:09 PM IST
...तो सहयोगियों के आगे नहीं झुकेगी RJD! पढ़ें- महागठबंधन के घमासान की इनसाइड स्टोरी
आरजेडी ने ऐलान कर दिया है कि वह 150 सीटों से कम पर नहीं लड़ेगी.

लालू यादव के सबसे खास में से एक और पार्टी के कद्दावर नेता ने न्यूज़18 को कहा कि हमारे पास सदन में संख्या बल और सूबे में सबसे बड़ा जनाधार भी है, बावजूद इसके वो लोग जिनके पास ना तो जनाधार है और ना ही संख्या बल, भला वो कैसे बिहार का मुख्यमंत्री तय कर सकते हैं.

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 पटना. चेहरे और सीट शेयरिंग की माथापच्ची में फंसे महागठबंधन (Grand Alliance) के भीतर से घमासान मचा हुआ है. गठबंधन में शामिल सभी पार्टियां जहां अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रही हैं, वहीं आरजेडी (RJD) अपने रुख पर अड़ी हुई है. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आरजेडी ने अपने सहयोगियों को दो टूक में समझा दिया है कि 81 सीटों वाली आरजेडी से ही मुख्यमंत्री फेस होगा और सीटों के बंटवारे पर भी आरजेडी सहयोगी दलों के आगे झुकने नहीं जा रही है.


बिहार आरजेडी के बड़े नेताओं में से एक ने न्यूज 18 को नाम न छापने की शर्त पर साफ-साफ बताया कि सीट वाले ये तय नहीं कर सकते कि बिहार महागठबंधन का सीएम उम्मीदवार कौन होगा. जाहिर है, उनका इशारा सीधे-सीधे पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की तरफ है, जिनके पास सदन में सिर्फ एक ही विधायक है. बता दें, मांझी ही सबसे अधिक मुखर होकर तेजस्वी यादव की सीएम उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं.



लालू यादव के सबसे खास में से एक और पार्टी के कद्दावर नेता ने न्यूज़18 को कहा कि हमारे पास सदन में संख्या बल और सूबे में सबसे बड़ा जनाधार भी है, बावजूद इसके वो लोग जिनके पास ना तो जनाधार है और ना ही संख्या बल, भला वो कैसे बिहार का मुख्यमंत्री तय कर सकते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि आरजेडी अपने सहयोगियों को सम्मान तो करती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उनकी हर जिद्द को बर्दाश्त किया जाए.



जीतन राम मांझी के 85 सीटों की दावेदारी पर आरजेडी ने अपने रुख कड़े कर लिए हैं.
लालू और तेजस्वी, दोनों के बेहद करीबी माने जाने वाले इस बड़े नेता ने न्यूज 18 से साफ-साफ कहा कि  आरजेडी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी है और लालू यादव का बिहार में अपना जनाधार है. आरजेडी के पास सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार भी हैं और वे लड़ने को तैयार भी हैं. लेकिन, हम गठबंधन धर्म का पालन करना चाहते हैं इसलिए हमारा 150 सीटों पर ही दावा है.


अपना नाम उजागर ना करने की शर्त पर आरजेडी के एक दूसरे बड़े नेता ने कहा कि जो लोग आज 85 सीटों का दावा कर रहे हैं, इनके पास बिहार में कितना बड़ा जनाधार है ये 2019 के लोकसभा चुनाव में सबने देख लिया है. आरजेडी भी भले ही सभी सीटों पर हार गई थी, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी रही कि उनके सहयोगियों का वोट ट्रांसफर नहीं हुआ.


उन्होंने ये भी कहा कि ये वही हैं जिन्हें आरजेडी ने झोली भरकर लोकसभा में सीटें दी थीं, लेकिन क्या हुआ? तब यही मांझी जी मंच से कसम खाया करते थे कि तेजस्वी को ही 2020 में मुख्यमंत्री बनाएंगे और आज पलटी मार रहे हैं.


बता दें, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख ने इशारों इशारों में 80 से 85 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक दी है. उन्‍होंने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि हमारी पार्टी ने 80 से 85 सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है और पार्टी सभी सीटों पर जीतने का दम रखती है.




वहीं इससे पहले आरजेडी के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagdanad Singh) ने ऐलान किया था कि लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ही महागठबंधन के समन्वयक होंगे. इस पर गठबंधन में ही दरार पड़ गई और कांग्रेस ने ऐसी किसी भी घोषणा से पहले समन्‍वय समिति बनाने की मांग कर दी थी.




लालू को महागठबंधन का समन्वयक बताने पर राजनीति जारी.



वहीं राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने भी आपत्ति जताई. उन्‍होंने कहा कि इस संबंध में आपसी विमर्श से कोई फैसला किया जाना चाहिए. जबकि हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने सवाल उठाया कि समन्वय समिति का अध्‍यक्ष कौन होगा, यह आरजेडी के प्रदेश अध्‍यक्ष कैसे तय कर सकते हैं?


बहरहाल आरजेडी के कम से कम 150 सीटों पर लड़ने के दावे के बीच 243 सदस्यीय विधान सभा में गठबंधन के अन्य चार सहयोगियों के लिए महज 93 सीटें बचती हैं, जबकि अकेले मांझी ने ही 85 सीटों की दावेदारी कर दी है. जाहिर है, आरजेडी और सहयोगी दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन में अभी किच-किच जारी रहने की संभावना है.


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First published: January 11, 2020, 4:37 PM IST
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