आज ही के दिन बनी थी लालू की RJD, अब ये भी तय नहीं कौन चलाएगा इसे

1997 में लालू प्रसाद यादव ने जनता दल से अलग होकर नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) बनाई थी. तब लालू ने कहा था कि पार्टी की स्थापना गरीबों की लड़ाई के लिए की गई है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 5, 2019, 10:39 AM IST
आज ही के दिन बनी थी लालू की RJD, अब ये भी तय नहीं कौन चलाएगा इसे
सत्ता संघर्ष में उलझी RJD
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 5, 2019, 10:39 AM IST
लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल 23वां स्थापना दिवस मना रही है. पटना में मुख्य कार्यक्रम प्रदेश अध्यक्ष डाॅ रामचन्द्र पूर्वे की अध्यक्षता में यह मनाया जा रहा है. इसमें दल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण लोगों की उपस्थिति रहेगी. जाहिर है पार्टी एकजुटता दिखाने की कोशिश करेगी. हालांकि बड़ी हकीकत यह है कि पार्टी को स्थापित हुए 22 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान में यह अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है.

अब तक की सबसे करारी हार

पिछले लोकसभा चुनाव में आरजेडी की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. वह एक भी सीट जीत पाने में कामयाब नहीं हो पाई. 40 में से एक भी सीट नहीं जीत पाना बिहार की इस सबसे बड़े जनाधार वाली राजनीतिक पार्टी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर रहा है. दरअसल बुरी से बुरी स्थिति में भी 20 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर पाने वाली आरजेडी इस बार के चुनाव में महज 15 प्रतिशत वोट शेयर ही हासिल कर पाई.

सत्ता संघर्ष में उलझा परिवार

1997 में लालू प्रसाद यादव ने जनता दल से अलग होकर नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) बनाई थी. तब लालू ने कहा था कि पार्टी की स्थापना गरीबों की लड़ाई के लिए की गई है. लेकिन बदले हालात में चारा घोटाला में सजा पाने के बाद से लालू जेल में है और लालू यादव के दोनों बेटों, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप में राजनीतिक विरासत को लेकर खींचतान है.

नेतृत्व की कमी से जूझ रही RJD

लालू यादव के नहीं रहने की स्थिति में माना जा रहा था कि राजनीतिक विरासत तेजस्वी यादव संभालेंगे. लेकिन लोकससभा चुनाव में करारी हार के बाद जिस तरह से तेजस्वी ने मैदान छोड़ दिया और राजनीतिक अज्ञातवास पर चले गए, इससे आरजेडी ने नेतृत्व में कमी महसूस की. तेजप्रताप, तेजस्वी और मीसा भारती के त्रिकोणीय जंग में आरजेडी फिलहाल नेतृत्व की कमी से जूझ रहा है.
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तेजप्रताप-तेजस्वी की तकरार!

तेजप्रताप यादव खुद को लालू यादव का दूसरा रूप बताते हैं. जाहिर तौर पर वह पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी की चाहत रखते हैं. जब तेजस्वी यादव अज्ञातवास पर थे तो वह काफी सक्रिय थे. वे सदन आ रहे थे. कभी मां राबड़ी देवी के साथ दिख जाते हैं. लालू-राबड़ी मोर्चा, डीएएस और अब तेज सेना का गठन कर चुके हैं. वे कभी बदलाव यात्रा, कभी प्रदेश कार्यालय में जनता दरबार लगाकर तेजस्वी को चुनौती देते दिखते हैं.

मीसा की खामोशी क्या कहती है?

लालू यादव ने जब 2015 में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राजनीतिक विरासत का बंटवारा किया था तो मीसा भारती को दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी. यानी लोकसभा और राज्यसभा से संबंधित चीजों को वही देखेंगी. लेकिन, बीतते वक्त के साथ ही वह हाशिये पर जाती चली गईं. जिस तरीके से मीसा भारती अपनी ही पार्टी में सिमट कर रह गई हैं और जिस अंदाज में उन्होंने चुप्पी साध रखी है, इसको लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

बहरहाल इन विरोधाभासों के बीच आरजेडी एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश कर रही है. शुक्रवार को होने वाले स्थापना दिवस समारोह में राबड़ी देवी के साथ तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, डाॅ मीसा भारती, डाॅ रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदनांद सिंह, शिवानंद तिवारी समेत सभी राज्य सभा सांसद पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, विधान पार्षद, पूर्व विधान पार्षद, प्रदेश पदाधिकारी सभी प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष एवं पदाधिकारी के साथ साथ कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे.

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First published: July 5, 2019, 10:18 AM IST
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