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निर्भया कांड: केंद्र पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, RJD नेता को याद आए युधिष्ठिर
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Updated: January 23, 2020, 9:13 AM IST
निर्भया कांड: केंद्र पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, RJD नेता को याद आए युधिष्ठिर
आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी (फाइल फोटो)

आरजेडी (RJD) नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि निर्भया मामले (Nirbhaya Case) में दोषियों को जल्द से जल्द फांसी होनी चाहिए. पूरा देश यही चाहता है, क्योंकि पिछले सात वर्षों से निर्भया के दोषी कोई ना कोई हथकंडा अपना कर फांसी की सजा को लंबा खींच रहे हैं.

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  • Last Updated: January 23, 2020, 9:13 AM IST
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पटना. निर्भया गैंगरेप और हत्‍या (Nirbhaya Gang Rape Case) में दोषियों की फांसी में देरी से देश में बढ़ रही नाराजगी के बीच बुधवार को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गई. गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा कि मौत की सजा पर क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए समय सीमा तय की जाए. इसी पर आरजेडी (RJD) नेता शिवानंद तिवारी ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जिसे अपनी मौत सामने दिखाई दे रही हो तो वह इससे बचने के अचूक प्रयास करता ही है. लेकिन, निर्भया के दोषियों को जल्दी फांसी मिलने पर यह लोगों के लिये नजीर बनेगा.

'यक्ष ने पूछा युधिष्ठिर से प्रश्न'
आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि यक्षप्रश्न में भी युधिष्ठिर से ऐसा ही कुछ प्रश्न किया गया था कि लोग इस बात को जानते हैं कि उन्हें एक न एक दिन मरना है, लेकिन फिर भी वह जीना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि निर्भया मामले में दोषियों को जल्द से जल्द फांसी होनी चाहिए. पूरा देश यही चाहता है, क्योंकि पिछले सात सालों से निर्भया के दोषी कोई ना कोई हथकंडा अपना कर अपनी फांसी की सजा को लंबा खींच रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग

गृह मंत्रालय ने अपनी याचिका में मौत की सजा के मामलों में कानूनी प्रावधानों को 'दोषी केंद्रित' के बजाए 'पीड़ित केंद्रित' करने की अपील की है. इसका मतलब यह है कि मौत की सजा के मामलों में तय गाइडलाइंस को दोषी की जगह पीड़ित को ध्यान में रखते हुए बदला जाए. याचिका में कहा गया- वर्तमान कानून के गाइडलाइंस दोषी को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. इसके चलते वे सजा टालने के लिए कानूनी प्रावधानों से खिलवाड़ करते हैं. याचिका में मौत की सजा पाने वाले दोषी को मिले अधिकारों पर साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव की मांग की गई.

निर्भया केस के दोषियों की फांसी लगातार टल रही
गौरतलब है कि निर्भया के साथ दरिंदगी के चारों दोषियों की फांसी की सजा कानूनी पैंतरों की वजह से लगातार टल रही है. सोमवार को निर्भया के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की तरफ से दाखिल की जा सकने वाली याचिकाओं की संख्या पर निर्देश जारी करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट तय करे कि एक दोषी कितनी याचिकाएं दाखिल कर सकता है. ऐसा करने से ही महिलाओं को निश्चित समय में न्याय मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के एक दोषी पवन गुप्ता की याचिका खारिज की थी. उसने साल 2012 में हाईकोर्ट में वारदात के समय खुद के नाबालिग होने की याचिका खारिज होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.क्या है पूरा मामला
16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की थी. 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी. घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी. ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है. मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी. दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाए जाने का डेथ वॉरंट दिया था. 17 जनवरी को नया डेथ वॉरंट जारी किया गया, जिसमें 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश दिया गया.

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First published: January 23, 2020, 8:46 AM IST
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