नीतीश सरकार के फरमान से इस कदर झल्लाए तेजस्वी की कर दी हिटलर और मुसोलिनी से तुलना

तेजस्वी यादव विपक्ष में रहते हुए नीतीश सरकार के खिलाफ खासे हमलावर हैं (फाइल फोटो)

Tejashwi Yadav Tweet: बिहार में लगातार बन रहे नए कानून के बीच नीतीश सरकार के पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश निकाला है जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल हुए लोगों को सरकारी ठेके समेत नौकरी नहीं देने के संबंध में बातों का जिक्र है

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    पटना. बिहार की सियासत में मुसोलिनी और हिटलर की एंट्री हो गई है. दरअसल पूरा मामला बिहार की नीतीश सरकार (Nitish Government) के एक फरमान से है जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम रह चुके तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने उनकी तुलना मुसोलिनी और हिटलर से कर दी. मंगलवार की शाम बिहार सरकार के पुलिस मुख्यालय ने दरअसल एक आदेश निकाला जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल हुए लोगों को सरकारी ठेके समेत नौकरी नहीं देने के संबंध में बातों का जिक्र है. बस इस आदेश को तेजस्वी यादव ने हाथों-हाथ लिया.

    तेजस्वी ने लिखा

    अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से किए एक ट्वीट के जरिए तेजस्वी ने सीएम नीतीश पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीट (Tweet) में लिखा, ' मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते हैं अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी. मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे. बेचारे 40 सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?

    क्या है सरकारी आदेश

    बिहार पुलिस मुख्यालय ने चरित्र सत्यापन को लेकर एक नया आदेश जारी किया है. इस आदेश के तहत अगर कोई व्यक्ति विधि व्यवस्था की स्थिति में सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और अगर उसके खिलाफ अगर पुलिस चार्जशीट दाखिल कर देती है तब ऐसा शख्स किसी भी तरह के सरकारी ठेके में भाग लेने या फिर सरकारी नौकरी में योगदान करने के काबिल नहीं माना जाएगा.

    तेजस्वी यादव का ट्वीट
    तेजस्वी यादव का ट्वीट


    उठने लगे सवाल

    बिहार के डीजीपी एस के सिंघल के आदेश से निकले इस आदेश पत्र के बाद से खलबली मच गई है. दरअसल माना जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय इस तरह का आदेश निकाल कर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने में जुटा है. राजधानी पटना में विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन करने वाले सड़क पर उतरते हैं तो फिर उन्हें नौकरियां सरकारी ठेके से वंचित कर दिया जाना कितना उचित होगा?