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Tokyo Olympics: खेल और बिहार को लेकर छलका तेजस्वी यादव का दर्द, फेसबुक पर लिखी दिल की बात

राजद नेता तेजस्वी यादव ने टोक्यो ओलंपिक के खत्म होने के बाद खेल को लेकर अपनी बात रखी है (फाइल फोटो)

राजद नेता तेजस्वी यादव ने टोक्यो ओलंपिक के खत्म होने के बाद खेल को लेकर अपनी बात रखी है (फाइल फोटो)

Tejashwi Yadav Facebook Post: खिलाड़ी से राजनेता नेता बने बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को एक बात का मलाल है, ओलम्पिक ख़त्म होने के बाद उन्होंने अपने दिल की यह बात फेसबुक पेज पर लिखी है.

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पटना. खेल में सफलता या असफलता के ग़म या खुशियों को एक खिलाड़ी ही समझ सकता है. ऐसा ही अपना एक दर्द बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने जताया है. ग़ौरतलब है कि राजनीति में आने से पहले तेजस्वी एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके हैं. इस वक़्त जब ओलम्पिक (Tokyo Olympics) में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है, उसमे बिहार के खिलाड़ियों की भागीदारी नही दिखी, इसी बात की कसक को तेजस्वी यादव ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है.

तेजस्वी यादव ने लिखा है कि टोक्यो में भारत के शानदार प्रदर्शन पर देश ख़ुशी मना रहा है, बिहार के लोगों ने भी ख़ुशी मनाई लेकिन एक बात की टीस मेरे साथ हर बिहारवासी को हो रही होगी कि बिहार का एक भी खिलाड़ी विश्व स्तर के इस खेल मंच पर प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा था. तेजस्वी ने अनुरोध किया कि मेरी इस भावना को राजनीतिक चश्मे से ना देखा जाए. इस भाव को एक आम बिहारवासी, एक पूर्व खिलाड़ी और बिहार के एक खेलप्रेमी के रूप में देखा जाए. मुझे विश्वास है कि मेरी तरह बिहार के सभी पूर्व व वर्तमान खिलाड़ियों का बिहार का प्रतिनिधित्व करने का सपना रहा होगा पर बिहार में खेल कूद से जुड़े विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना की भारी कमी है. सरकार की ओर से किसी भी रूप में प्रोत्साहन या सकारात्मक पहल का अभाव बिहार को हतोत्साहित कर रहा है.

तेजस्वी ने कहा है कि बेशक किसी भी प्रदेश में खेलों और अच्छे खिलाड़ियों के होने या नहीं होने की ज़िम्मेवारी राजनीति व सरकार का ही अंग है. यह बिहार के सभी राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए एक विचारणीय विषय है. बिहार में खेल कूद को बढ़ावा देने के लिए बस खानापूर्ति ही की गई, जबकि हमने पूरी ईमानदारी से राज्य में खेलकूद के विकास की प्रतिबद्धता के साथ 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एक “नई खेल नीति” को राजद के घोषणापत्र में शामिल किया था. एक पूर्व खिलाड़ी और युवा होने के नाते मेरी बड़ी इच्छा है कि राज्य में हमारी जब भी सरकार बनेगी , हम एक समयबद्ध दृढ़ निश्चय से खेल कूद और खिलाड़ियों के विकास की पूरी व्यवस्था करेंगे और यह व्यवस्था विश्व स्तरीय हो ये भी सुनिश्चित करेंगे.

तेजस्वी ने लिखा है बिहार में स्पोर्ट्स कोटे के नाम पर नौकरी तो है, पर उससे सरकार के करीबी लोगों तक जैसे तैसे लाभ पहुंचाया जाता है. मणिपुर, जो एक छोटा राज्य है, वह दिखाता है कि अगर खेल कूद को संस्कृति का हिस्सा बना दिया जाए तो प्रतिभा स्वयं आगे आने लगती है. बिहार में प्रतिभाओं व प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है. सरकार को हर संभव प्रयास कर जाति-धर्म से ऊपर उठकर बिहार में भी खेल कूद की संस्कृति का विकास करना होगा. इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा.

तेजस्वी ने लिखा है कि माता-पिता और शिक्षकों को भी जीवन में खेलकूद और स्वास्थ्य के महत्व को समझना होगा, उन्हें अपने बच्चों व विद्यार्थियों को यह बात समझानी होगी कि खेल कूद ना सिर्फ हमें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाते है, बल्कि चुनौतियो का सामना करना, तालमेल बिठाना, लक्ष्य साध कर मेहनत करना और एक दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ना सिखाती है. व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए खेलो के महत्व को बिहारवासियों और व्यवस्था को समझना ही पड़ेगा.

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