RJD सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी चिट्ठी, वोटिंग नियमों में बदलाव वापस लेने की मांग
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RJD सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखी चिट्ठी, वोटिंग नियमों में बदलाव वापस लेने की मांग
आरजेडी राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की मांग (फ़ाइल तस्वीर)

चुनाव आयोग (Election commission) के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद अब तय हो गया है कि बिहार का विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) अब नए नियम के तहत ही होगा.

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पटना. आरजेडी (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा (Rajya Sabha MP Manoj Jha) ने मुख्य चुनाव आयुक्त Chief Election Commissioner) को पत्र लिखकर हाल ही में किए चुनाव नियमों में संशोधन को वापस लेने की मांग की है. आरजेडी सांसद ने इस तरह के बदलाव पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी से इस मामले में सलाह तक नहीं ली गई. उन्होंने इस तरह के फैसले लेने से पहले सर्वदलीय बैठक करने की मांग की है.

इन बदलावों से सहमत नहीं है RJD
दरअसल आरजेडी चाहती है कि इस फैसले को वापस ले लिया जाए. आरजेडी का तर्क है इस तरह के फैसले से सत्तापक्ष में बैठे लोगों को फायदा होगा. उनका कहना है कि इस फैसले के तहत नए लोगों को पोस्टल बैलेट से वोटिंग डालने के दौरान मॉनिटरिंग और सुपरविजन की जिम्मेदारी मौजूदा प्रशासन के लोगों की होगी. गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने इस तरह का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था जिसमें कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के प्रकोप के चलते 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग मतदाताओं (voters) को घर बैठे पोस्टल बैलेट (Postal Ballet) से मतदान करने का अधिकार दिया गया था. चुनाव आयोग के प्रस्ताव में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के साथ-साथ होम क्वारंटाइन और इंस्टिट्यूशनल क्वारींटीन में रह रहे मतदाताओं के लिए भी पोस्टल बैलेट से मतदान की बात कही गई थी.

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इसके अलावा मतदान के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखने की बात कही गई थी. सोशल डिस्टेंसिंग के चलते ही यह तय हुआ है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1000 से ज्यादा लोग वोट नहीं डाल पाएंगे. यानि इस बार बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. चुनाव आयोग के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद अब तय हो गया है कि बिहार का विधानसभा चुनाव अब नए नियम के तहत ही होगा. यही बात आरजेडी को रास नहीं आ रही है क्योंकि उसे लग रहा है कि इन नियमों से वोटिंग की पारदर्शिता प्रभावित होगी. लिहाजा उसकी तरफ से चुनाव आयोग के सामने अपना विरोध दर्ज कर फैसले को वापस लेने की मांग की जा रही है.
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