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जेल में बनेगी NDA को हराने की रणनीति, लालू प्रसाद यादव से मिलेंगे RJD के 3 बड़े नेता

लालू प्रसाद यादव इन दिनों जेल में हैं.(फाइल फोटो)
लालू प्रसाद यादव इन दिनों जेल में हैं.(फाइल फोटो)

बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा की मिली-जुली सरकार है. अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसको लेकर अभी से हलचल शुरू हो गई है.

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बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसको लेकर अभी से हलचल शुरू हो गई है. इसी सिलसिले में राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद, RJD) के तीन बड़े नेता शुक्रवार को लालू प्रसाद यादव से मिलेंगे, जिसमें शिवानंद तिवारी और रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे नाम शामिल हैं.

हालांकि चर्चा ये भी है कि इस मुलाकात के दौरान आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति आरजेडी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव बनाएंगे और फिर उस पर पूरी पार्टी अमल करेगी. जबकि इस मुलाकात को लेकर बिहार में सियासी पारा चढ़ चुका है. यही वजह है कि सत्‍तापक्ष के लोग लालू से उनके दल के नेताओं की मुलाकात पर तंज कस रहे हैं.

विपक्षी नेताओं ने दी ये सलाह
इस वक्‍त बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू और भाजपा की मिली-जुली सरकार है. हालांकि बिहार विधानसभा का चुनाव जेडीयू और आरजेडी ने मिलकर लड़ा था और जीत हासिल की थी. जबकि कुछ समय के बाद नीतीश ने पाला बदलकर भाजपा का दामन थाम लिया. जबकि इन दिनों आरजेडी नेताओं की जेल में बंद लालू प्रसाद यादव से मुलाकात को लेकर विपक्षी जमकर तंज कर रहे हैं. कोई कह रहा है कि लालू पहले अपनी पार्टी के उन बाहुबलियों से राय ले लें जो सलाखों के पीछे हैं. इशारा मोहम्मद शहाबुद्दीन और राजबल्लभ की ओर है जो इस वक्‍त जेल में बंद हैं.
कांग्रेस ने बताया सामान्‍य मुलाकात


लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने वाले नेताओं को लेकर कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा थोड़े नरम दिखाई दे रहे हैं. उनका मानना है कि आरजेडी के नेताओं की लालू से मुलाकात सामान्‍य है और इसके कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकालने चाहिए.

रघुवंश प्रसाद सिंह ने चली ये चाल
लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम ने बिहार में महागठबंधन की सभी पार्टियों को बैकफुट पर खड़ा कर दिया है. लेकिन इन सबमें सबसे अधिक फजीहत आरजेडी की हुई है. महागठबंधन की अगुआई करने वाली आरजेडी एक भी सीट नहीं जीत सकी. लोकसभा रिजल्ट ने आरजेडी के इतिहास पर ही दाग लगा दिया कि आरजेडी का एक भी सांसद लोकसभा में नहीं दिखेगा.

अब हालत यह है कि रिजल्ट आने के बाद से आरजेडी के मौजूदा सबसे बड़े नेता बने तेजस्वी यादव दिल्ली से वापस लौटने का नाम ही नहीं ले रहे और न ही कुछ बोल रहे हैं. पूरी पार्टी में सन्नाटा छाया हुआ है. सहयोगी दल भी अब इधर उधर छिटकने लगे हैं. पार्टी की हालत तो यह हो गई है कि रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे बड़े नेता आरजेडी को वापस ट्रैक पर लाने के लिए तेजस्वी की तरफ नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ देख रहे हैं. क्योंकि उन जैसे नेताओं को ऐसा लग रहा है कि 2015 में जिस तरह लालू-नीतीश एकजुट हुए थे, उस समय भी मुश्किलों में खड़ी आजेडी को संजीवनी मिली थी. अगर इस बार भी नीतीश कुमार फिर से साथ आ गए तो हताशा में जा रही आरजेडी फिर से अपने पैरों पर खड़ी होने लगेगी.

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