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लोकसभा चुनाव में RJD की हार पर महामंथन, किसके सिर फूटेगा ठीकरा?

File Photo

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रघुवंश प्रसाद सिंह ने तेजस्वी-तेजप्रताप विवाद को बड़ा कारण बताया है. अगर ऐसा है तो शायद कोई यह न मान ले कि हाशिये पर रहकर भी तेजप्रताप काफी कुछ कर गए और मेनस्ट्रीम में रहकर भी तेजस्वी कुछ नहीं कर पाए.

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2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बिहार में सभी विपक्षी पार्टियों की चूलें हिलाकर रख दी हैं. राजनीतिक पार्टियों में अमूमन होता यह है कि नेता बोलते हैं और कार्यकर्ता सुनते हैं. लेकिन बिहार के चुनाव परिणाम के बाद विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ता बोल रहे हैं और नेता चुपचाप सुन रहे हैं.

सबसे बुरी हालत तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके नेता तेजस्वी यादव की हुई है. चुनाव तक महागठबंधन में सिर्फ और सिर्फ तेजस्वी ही बोले. आरजेडी में भी सिर्फ तेजस्वी ही बोले. कोई और नहीं. लेकिन हालत यह है कि आज सब बोल रहे हैं और तेजस्वी चुप हैं.

ऐसे में मंगलवार को शाम जब आरजेडी में हार का महामंथन है तो देखना होगा कि कौन-कौन बोलता है? और कौन-कौन सुनता है? लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने तेजस्वी और तेजप्रताप के विवाद को सबसे बड़ा नुकसान बताकर यह संकेत दे दिए कि महामंथन में कुछ तो होगा जरूर.

तेजस्वी के नेतृत्व पर भी उठेगा सवाल?
बिहार में शून्य पर आउट होने के बाद आरजेडी अपनी हार की समीक्षा करने जा रही है. आज हारे हुए प्रत्याशी राबड़ी देवी के आवास पर बैठेंगे और बताएंगे कि हार कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? हालांकि पार्टी को मिली हार की पूरी जिम्मेदारी नेता की होती है. लेकिन यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आरजेडी के इस मंथन में हार का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाएगा? लेकिन इतना तो तय है कि पूरे चुनाव तक आरजेडी के जिन नेताओं ने तेजस्वी के फैसलों पर चूं तक नहीं की, वे अब भी चुप रहेंगे, इसके आसार न के बराबर हैं.

सोमवार को जहानाबाद प्रत्याशी सुरेन्द्र यादव ने अपनी हार के लिए तेजप्रताप यादव को जिम्मेदार ठहरा दिया. उन्होंने कहा कि तेजप्रताप के उम्मीदवार ने जो वोट काटे उसके कारण वे हार गए. रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी तेजस्वी तेजप्रताप विवाद को बड़ा कारण बता दिया है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सभी सीटों पर क्या तेज प्रताप यादव और दोनों भाइयों का विवाद ही मूल कारण है? क्योंकि अगर ऐसा है तो शायद कोई यह न मान लें कि हाशिए पर रहकर भी तेजप्रताप काफी कुछ कर गए और मेनस्ट्रीम में रहकर भी तेजस्वी कुछ नहीं कर पाए. यह आरजेडी के भीतर की राजनीति को एक अलग ही मोड़ देगा.

वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का मुद्दा भी महामंथन में उठेगा
महामंथन में सीनियर लीडर की उपेक्षा को लेकर भी सवाल उठेंगे कि जिस लालू यादव ने अपने सीनियर लीडर को कभी नहीं छोड़ा, उन नेताओं को तेजस्वी यादव ने क्यों और कैसे एक झटके में छोड़ दिया. हार के बाद जिस आरजेडी की एनडीए के नेता लानत-मलानत कर रहे हैं. वे नेता भी यह मानते हैं कि वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की जो फौज आरजेडी के पास है, वह शायद बिहार के किसी भी दल में नहीं है. लेकिन इसके बाद भी सभी वरिष्ठ नेता साइडलाइन किए गए.

हालांकि अभी भी आरजेडी में किसी ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल खड़ा नहीं किया है और न ही इस्तीफे की मांग की है. लेकिन हार के बाद पूरे देश के विपक्षी पार्टियों में इस्तीफे की लहर है. तो क्या तेजस्वी भी उस राह पर चलेंगे? या फिर इस महासंकट का सामना करने के लिए तैयार रहेंगे. महामंथन आज भी होगा और कल भी. नजर इस बात पर होगी कि इस महामंथन का फलाफल क्या निकलेगा?

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