ANALYSIS: चाहे कुछ भी हो, आरजेडी की कमान लालू-राबड़ी परिवार के ही हाथों में रहेगी!

बिहार में लोकसभा चुनाव की हार से अगर कोई पार्टी अभी तक नहीं उबर पायी है, तो वह है आरजेडी. खासकर लालू-राबड़ी परिवार में पूरी तरह से घमासान मचा है. लालू परिवार के बीच का सत्ता संघर्ष कहीं कार्यकर्ताओं के मनोबल को तो नहीं लील जाएगा?

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: July 8, 2019, 9:15 PM IST
ANALYSIS: चाहे कुछ भी हो, आरजेडी की कमान लालू-राबड़ी परिवार के ही हाथों में रहेगी!
तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव और तेज प्रताप यादव. (फाइल फोटो)
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: July 8, 2019, 9:15 PM IST
बिहार में लोकसभा चुनाव की हार से अगर कोई पार्टी अभी तक नहीं उबर पायी है, तो वह है राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी). खासकर लालू-राबड़ी परिवार में घमासान मचा है. हार का गम कुछ ऐसा रहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 34 दिनों तक बिहार से बाहर अज्ञातवास में रहे. इस बीच बिहार में चमकी बुखार, लू का कहर और सूखे के हालात से राज्य त्राहिमाम कर रहा था. सरकार पशोपेश में थी, लेकिन सरकार पर हमला करने और सवाल पूछने के लिए नेता प्रतिपक्ष और पूरा विपक्ष नदारद था. उलटे सत्ता पक्ष के साथ महागठबंधन के सहयोगी दलों ने भी तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए.

तेजस्वी यादव के गायब रहने पर सियासी गलियारों में इस बात पर चर्चा रही कि क्या तेजस्वी हार के गम से उबर नहीं पा रहे? या फिर वे आरजेडी में अपना वर्चस्व चाहते हैं? और इसके लिए वे आरजेडी सुप्रीमो और अपने पिता लालू प्रसाद यादव का आश्वासन चाहते हैं. इस बीच विधानमंडल का सत्र शुरू हो गया. 34 दिनों के बाद तेजस्वी यादव वापस तो आए लेकिन इसके बाद भी विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने सदन में नहीं पहुंचे.

सदन शुरू होने के पांचवें दिन विधानसभा पहुंचे तेजस्वी यादव
इस बीच मीडिया में तेजस्वी यादव के इस्तीफे की अपुष्ट खबरें आने लगीं तो वो अचानक सदन शुरू होने के पांचवें दिन वे विधानसभा पहुंच गए. लेकिन इन घटनाक्रमों के बीच यह बात खुलकर जगजाहिर हो गई कि आरजेडी में इस समय सबसे बड़ा संकट घर के भीतर ही है क्योंकि पांच जुलाई को आरजेडी के स्थापना दिवस में लालू-राबड़ी कुनबा पूरा बंटा रहा. एक ओर जहां हार के बाद पूरी पार्टी का मनोबल गिरा हुआ था, वहां बजाए एकजुट होकर नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की बजाए मीसा भारती दिल्ली में स्थापना दिवस समारोह मना रही थी, तो पटना के आरजेडी कार्यालय में अलग कार्यक्रम था. उस कार्यक्रम में राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव सहित सभी नेता मौजूद थे लेकिन तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में नहीं आए.

लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव. (फाइल फोटो)


मंच पर मौजूद था लालू परिवार लेकिन साफ नजर आ रही थी तल्खी
6 जुलाई को आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कयास लगने लगे कि तेजस्वी इस बैठक में आएंगे या नहीं? लेकिन तेजस्वी कार्यकारिणी की बैठक में आए. मंच पर पूरा परिवार मौजूद था, लेकिन तल्खी साफ नजर आ रही थी. इस बीच बैठक में यह साफ हुआ कि 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या तेजस्वी सिर्फ नेतृत्व की बात को मनवाने के लिए इतना सब कुछ कर रहे हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि तेजस्वी सिर्फ विधानसभा में नेतृत्व को लेकर नहीं बल्कि पूरी पार्टी पर एकाधिपत्य चाहते हैं. एकाधिपत्य भी ऐसा कि अगर कोई वे कोई फैसला करें तो कोई उस पर कोई अंगुली न उठा सके.
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तेजस्वी की राह में रोड़े अटका रही है मीसा भारती की राजनीतिक महत्वाकांक्षा
इसके पीछे का कारण यह भी है कि तेजस्वी यादव को यह लगता है कि तेजप्रताप यादव का चुनाव के दौरान लगातार विरोधी बयान, दो सीटों पर उम्मीदवार उतारना भी आरजेडी की हार का बड़ा कारण है. साथ ही मीसा भारती की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी उनकी राह में रोडे़ अटका रही है. आरजेडी कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में इशारों में कहा कि वे जानते हैं कि उनके इस्तीफे की उड़ रही अफवाहों के पीछे कौन है.

दोनों बेटों को मिठाई खिलातीं राबड़ी देवी. (फाइल फोटो)


जाहिर है कि उनका इशारा मीसा भारती पर ही था. तेजस्वी यादव दोनों भाई बहनों को साइड लाइन करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए न तो लालू प्रसाद यादव तैयार हैं और न ही राबड़ी देवी. यही कारण है कि इन दिनों तेजस्वी 34 दिनों की वापसी के बाद भी उखड़े-उखड़े से हैं. न तो वे अभी तक चमकी बुखार से प्रभावित बच्चों को देखने मुजफ्फरपुर गए, न ही सरकार पर कोई हमला किया, और न ही सदन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी कोई भूमिका निभा रहे हैं. परिवार और पार्टी के सत्ता संघर्ष में तेजप्रताप और मीसा दोनों ही फिलहाल मौन हैं.

लालू-राबड़ी परिवार का ही कोई सदस्य करेगा राजद का नेतृत्व
हालांकि, आरजेडी में आगे क्या होगा, इस पर भले ही अभी धुंध है, लेकिन इतना तो बिल्कुल साफ है कि आरजेडी का नेतृत्व सिर्फ और सिर्फ लालू-राबड़ी परिवार का ही कोई सदस्य करेगा. ऐसा नहीं है कि अगर तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी परफॉर्म नहीं कर रही है तो पार्टी में दूसरा कोई नेता नहीं है कमान संभालने के लिए, लेकिन खुद लालू प्रसाद यादव ने कभी नहीं चाहा कि पार्टी उनके परिवार के हाथ से बाहर जाए. क्योंकि अगर ऐसा होता तो चारा घोटाला में फंसने के बाद लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री न बनाकर किसी और को बना देते. इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर संघर्ष करना चाहते हैं लेकिन परिवार का सत्ता संघर्ष फिलहाल सड़क पर उतरने की इजाजत नहीं दे रहा है.

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First published: July 8, 2019, 5:30 PM IST
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